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लखनऊ, 20 मई 2021

लखनऊ में एक जीव विज्ञान शिक्षक, जिसने अपने घरों में गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) स्थापित करने का वादा करके एक डॉक्टर के रूप में कोविड रोगियों के परिवारों को ठगा था, उसे एक मरीज की मौत के बाद गिरफ्तार किया गया है।

मृत मरीज की पत्नी पी.के. वशिष्ठ ने डॉक्टर की शिकायत की थी। जिसके बाद फर्जीवाड़ा करने वाले, आरोपी शाहशिवेंद्र पटेल को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस जांच में पता चला कि पटेल एक मेडिकल फर्म खोलकर और स्मार्ट क्लिनिक के जरिए इलाज कराकर रैकेट चला रहा था।

उन्होंने इसके जोनल मैनेजर और मुख्य विपणन अधिकारी होने का दावा किया।

महामारी के दूसरे दौर में उसने डॉक्टर होने का दावा कर और अस्पताल से गठजोड़ कर लोगों को ठगना शुरू कर दिया।

अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (एडीसीपी), पूर्वी क्षेत्र, कासिम आबिदी ने कहा कि पटेल घर पर चिकित्सा परामर्श और उपचार के लिए कोविड रोगियों से संपर्क करते थे।

वह बाराबंकी के सफदरगंज के एक सरकारी स्कूल में छठी से दसवीं कक्षा के छात्रों को जीव विज्ञान पढ़ाता है। उसने रोगियों और उनके परिचारकों को प्रभावित करने के लिए ऑक्सीजन संतृप्ति, नाड़ी दर, रक्तचाप और अन्य शर्तों जैसे चिकित्सा शब्दों के अपने बुनियादी ज्ञान का इस्तेमाल किया।

आबिदी ने कहा कि उन्होंने कोविड रोगियों के आवास पर एक अस्थायी गहन चिकित्सा इकाई स्थापित करने का भी वादा किया और इलाज के लिए भारी शुल्क लिया। वह डॉक्टरों की तरह एक सफेद एप्रन पहनते थे, लेकिन खुद कभी किसी मरीज के घर नहीं जाते थे। इलाज के लिए ड्राइवर भेजते थे।

पटेल ने वशिष्ठ का इलाज किया था, जिनकी हाल ही में इलाज के दौरान मौत हो गई थी।

आरोपी ने मृतक की पत्नी पर डेढ़ लाख रुपये फीस और इलाज पर खर्च करने का दबाव बनाना शुरू किया लेकिन उसने मना कर दिया।

पटेल ने उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देना शुरू कर दिया। जिसके बाद महिला ने पुलिस से शिकायत की और जांच ने रैकेट का पदार्फाश किया।

एडीसीपी ने कहा कि पटेल के साथ कई अन्य व्यक्ति धोखाधड़ी में शामिल हैं। पुलिस उनकी पहचान करने के लिए कॉल डिटेल रिकॉर्ड एकत्र कर रही है।

सूत्रों ने कहा कि पटेल पर पहले भी शिक्षा विभाग में धोखाधड़ी करने का संदेह है । पुलिस उसके अपराध रिकॉर्ड का पता लगाने के लिए उसके अतीत की जांच कर रही है।