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देखो-देखो शेर आया: राहुल गांधी ने दिया जीत का मंत्र, RJD के साथ गठबंधन पर सस्पेंस बरकरार

देखो-देखो शेर आया: राहुल गांधी ने दिया जीत का मंत्र, RJD के साथ गठबंधन पर सस्पेंस बरकरार

बिहार विधानसभा चुनाव की आहट के बीच राहुल गांधी के हालिया दौरे ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। सोमवार को बिहार पहुंचे कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सदाकत आश्रम में पार्टी के नवनियुक्त जिलाध्यक्षों और कोर कमिटी के साथ बंद कमरे में बैठक की। इस बैठक में सभी नेताओं के फोन बंद कराकर राहुल ने अगामी चुनाव के लिए जीत का गुप्त मंत्र दिया। लेकिन गठबंधन को लेकर रहस्य बरकरार है। कांग्रेस नेताओं ने बैठक के बाद कहा कि “आज तो गठबंधन है, आगे रहेगा या नहीं, यह राहुल गांधी ही तय करेंगे।”

बैठक के बाद कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा ने साफ किया कि राहुल गांधी ने संगठन की रणनीति में बड़ा बदलाव करने का संकेत दिया है। इसी कड़ी में कांग्रेस ने 40 जिलाध्यक्षों को बदला है, जिससे यह साफ होता है कि पार्टी अब जमीनी स्तर पर नई धार के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में है। राहुल गांधी ने दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों को संगठन में प्रमुखता देने का संदेश दिया है। नई बनने वाली प्रदेश कमिटी में इन वर्गों को दो-तिहाई प्रतिनिधित्व देने की बात कही गई है।

राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं से कहा कि वे अपने-अपने जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में दलितों से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन, धरना और जन आंदोलन चलाएं। उन्होंने नेताओं को “बब्बर शेर” बताते हुए प्रोत्साहित किया और कहा कि कांग्रेस का कार्यकर्ता अगर संकल्प ले तो कोई ताकत उसे रोक नहीं सकती।

पटना में संविधान सुरक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “महागठबंधन दलितों, महिलाओं और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों (EBC) के उत्थान के लिए संकल्पित है। हम जाति जनगणना के जरिए देश का एक्स-रे करेंगे, लेकिन भाजपा और संघ इससे डरते हैं।”

राहुल गांधी का यह दौरा ऐसे वक्त हुआ है जब विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ की एकजुटता पर सवाल उठ रहे हैं। आरजेडी के साथ गठबंधन को लेकर बयानबाजी चल रही है। हालांकि कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि इस पर अंतिम निर्णय राहुल गांधी लेंगे। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस बिहार में अकेले दम पर चुनाव लड़ेगी या फिर गठबंधन को नया रूप देकर मैदान में उतरेगी।

बिहार की जनता को लेकर राहुल गांधी ने कहा, “मुझे भरोसा है कि बिहार फिर से देश को नई दिशा देगा। यह राज्य हमेशा से सामाजिक न्याय और जन आंदोलनों का नेतृत्व करता रहा है।”

इस पूरे घटनाक्रम से इतना तो तय है कि कांग्रेस अब मूल मुद्दों और सामाजिक न्याय की राजनीति को केंद्र में रखकर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। लेकिन यह तय नहीं है कि वह यह लड़ाई अकेले लड़ेगी या फिर तेजस्वी यादव की पार्टी आरजेडी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर। फिलहाल कांग्रेस का यह “गुप्त मंत्र” और गठबंधन को लेकर सस्पेंस, बिहार की सियासत में गर्मी जरूर बढ़ा चुका है।

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