कुणाल कामरा के जोक से मचा सियासी संग्राम: उद्धव-फडणवीस आमने-सामने, अजित पवार ने साधा संतुलित रुख

कुणाल कामरा के जोक से मचा सियासी संग्राम: उद्धव-फडणवीस आमने-सामने, अजित पवार ने साधा संतुलित रुख

मुंबई: मशहूर स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा के महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लेकर किए गए तंज से राज्य की सियासत में नया घमासान छिड़ गया है। कामरा ने अपने पैरोडी गीत के जरिए शिंदे पर कटाक्ष किया, जिसे लेकर शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस आमने-सामने आ गए। हालांकि, इस पूरे विवाद में एनसीपी नेता और उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने बेहद संतुलित प्रतिक्रिया दी, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

उद्धव ठाकरे ने किया कामरा का समर्थन
कुणाल कामरा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उद्धव ठाकरे ने खुलकर उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा,
“मुझे नहीं लगता कि कुणाल कामरा ने कुछ गलत कहा है। जो गद्दार है, वो गद्दार है।”
ठाकरे ने इस मुद्दे को भुनाते हुए शिंदे और बीजेपी गठबंधन पर हमला बोला और कहा कि कामरा ने वही कहा है जो जनता के मन में है।

उद्धव ठाकरे के इस बयान के बाद भाजपा ने उन पर तीखा पलटवार किया।

फडणवीस का पलटवार: “अपमानजनक टिप्पणी स्वीकार्य नहीं”
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कुणाल कामरा के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए इसे महाराष्ट्र की जनता का अपमान बताया। उन्होंने कहा,
“हास्य के नाम पर व्यक्तिगत हमले और अपमानजनक टिप्पणियां करना स्वीकार्य नहीं है। यह केवल एक उपमुख्यमंत्री का नहीं बल्कि महाराष्ट्र की जनता का भी अपमान है, जिसने उन्हें चुना है।”

फडणवीस ने उद्धव ठाकरे पर भी निशाना साधते हुए कहा,
“जो लोग ऐसी टिप्पणियों का समर्थन कर रहे हैं, वे सिर्फ अपनी सियासी जमीन बचाने की कोशिश कर रहे हैं।”

“कोई भी लोगों को हंसा जरूर सकता है, लेकिन अपमानजनक बयान देना स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर सही नहीं ठहराया जा सकता।”

अजित पवार का संतुलित रुख: “संविधान के दायरे में होना चाहिए”
इस पूरे विवाद के बीच अजित पवार ने संयमित प्रतिक्रिया देकर सबका ध्यान खींचा। उन्होंने कहा,
“सब कुछ संविधान के दायरे में होना चाहिए। वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए जिससे पुलिस का काम बढ़ जाए।”

उनकी यह टिप्पणी यह दर्शाती है कि वे न तो कुणाल कामरा के समर्थन में हैं और न ही उनके खिलाफ बयान दे रहे हैं। इससे पहले एक इफ्तार समारोह में भी अजित पवार ने कहा था,
“मुस्लिम भाइयों पर आंख दिखाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।”
उनके इस बयान को भी उनकी संतुलित छवि के रूप में देखा जा रहा है।

जया बच्चन और संजय राउत भी उतरे मैदान में
संसद के बाहर समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन ने भी कुणाल कामरा विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा,
“बोलने की आजादी कहां है? कार्रवाई तभी होती है जब हंगामा होता है।”
उन्होंने एकनाथ शिंदे पर निशाना साधते हुए कहा,
“आप अपनी असली पार्टी छोड़कर सत्ता के लिए दूसरी पार्टी में चले गए, क्या यह बालासाहेब ठाकरे का अपमान नहीं है?”

वहीं, शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने भी कुणाल कामरा के समर्थन में बयान दिया। उन्होंने कहा,
“अगर कुणाल कामरा ने व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की है, तो इसे स्वीकार किया जाना चाहिए। यही लोकतंत्र की खूबसूरती है।”

क्या है पूरा मामला?
स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने अपने एक पैरोडी गीत में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर तंज कसा था। इस बयान के बाद भाजपा और शिवसेना (यूबीटी) के बीच राजनीतिक घमासान मच गया। उद्धव ठाकरे ने जहां कामरा का समर्थन किया, वहीं फडणवीस ने इसे महाराष्ट्र की जनता का अपमान बताया।

क्या होगा आगे?
यह विवाद अब सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं रह गया है। बीजेपी, शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी और अन्य दलों के नेता इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने की संभावना है।

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