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फ्रीडम ऑफ स्पीच पर विवाद: कुणाल कामरा के समर्थन में उतरे जया बच्चन और उद्धव ठाकरे

फ्रीडम ऑफ स्पीच पर विवाद: कुणाल कामरा के समर्थन में उतरे जया बच्चन और उद्धव ठाकरे

नई दिल्ली: स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा के एक शो में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर किए गए व्यंग्य के बाद विवाद खड़ा हो गया है। शिवसेना (शिंदे गुट) के कार्यकर्ताओं ने इस पर नाराजगी जताते हुए विरोध प्रदर्शन किया और तोड़फोड़ की। वहीं, विपक्षी दलों ने इस घटना को अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया है।

सपा सांसद जया बच्चन और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे खुलकर कामरा के समर्थन में आ गए हैं। जया बच्चन ने सवाल उठाया कि “फ्रीडम ऑफ स्पीच कहां है?” जबकि उद्धव ठाकरे ने कहा कि “कामरा ने कुछ भी गलत नहीं कहा, जो गद्दार है, वो गद्दार है।”

जया बच्चन ने उठाया अभिव्यक्ति की आजादी का सवाल
राज्यसभा सांसद जया बच्चन ने पत्रकारों से बातचीत में कहा,

“आप (एकनाथ शिंदे) अपनी असली पार्टी छोड़कर सत्ता के लिए दूसरी पार्टी में आ गए। क्या यह बालासाहेब ठाकरे का अपमान नहीं है?”

उन्होंने यह भी कहा कि “कार्रवाई की आजादी तभी होती है जब हंगामा हो, लेकिन बोलने की आजादी कहां है?” जया बच्चन के इस बयान को सरकार पर सीधा हमला माना जा रहा है।

शिंदे सरकार पर बरसे उद्धव ठाकरे
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी कुणाल कामरा का समर्थन किया। उन्होंने कहा,

“मुझे नहीं लगता कि कुणाल कामरा ने कुछ गलत कहा है। अगर कोई सच कह रहा है और उसे दबाने की कोशिश की जा रही है, तो यह लोकतंत्र की हत्या है। जो गद्दार है, वो गद्दार है।”

शिवसेना (यूबीटी) ने बताया विरोधियों का डर
शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा,

“वे एक ऐसे मज़ाक पर धमकी दे रहे हैं, जिसमें एकनाथ शिंदे का नाम तक नहीं लिया गया। उनकी तोड़फोड़ से साफ पता चलता है कि इससे उन्हें ठेस पहुँची है। इससे साबित होता है कि जो मज़ाक में कहा गया, उसमें सच्चाई थी।”

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने भी कहा कि कुणाल कामरा द्वारा कही गई हर बात सटीक थी।

“अगर हम इस देश में लोकतंत्र मानते हैं, तो हमें इसे स्वीकार करना होगा।”

कांग्रेस ने भी किया समर्थन, कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
कांग्रेस विधायक नाना पटोले ने कहा कि महाराष्ट्र में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।

“लोग डर के मारे महाराष्ट्र छोड़ रहे हैं। उद्योग यहां से जा रहे हैं। सरकार कहती है कि शांति होनी चाहिए, लेकिन उनके लोग ही कानून तोड़ रहे हैं। वे महाराष्ट्र को बर्बाद करना चाहते हैं।”

विरोध और तोड़फोड़ पर क्या बोले शिंदे गुट?
शिवसेना (शिंदे गुट) ने इस पूरे विवाद पर कोई सीधा बयान नहीं दिया है, लेकिन उनके कार्यकर्ताओं ने मुंबई और नागपुर में विरोध प्रदर्शन किया। उनके समर्थकों का कहना है कि कामरा ने “अभद्र” टिप्पणी की है, जिससे शिवसेना का अपमान हुआ है।

फ्रीडम ऑफ स्पीच या राजनीतिक हमला?
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम राजनीतिक असहिष्णुता की बहस को हवा दे दी है। जहां विपक्ष इसे लोकतंत्र की हत्या बता रहा है, वहीं शिंदे गुट इसे अपनी पार्टी और नेता का अपमान मान रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।

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