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बिहार विधानसभा चुनाव 2025: एनडीए के घटक दलों की जातीय समीकरण और वोट बैंक की रणनीति

बिहार विधानसभा चुनाव 2025: एनडीए के घटक दलों की जातीय समीकरण और वोट बैंक की रणनीति

बिहार में आगामी 2025 के विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हो गई हैं। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने चुनावी तैयारियों में जुटते हुए 220 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य निर्धारित किया है। आइए जानते हैं कि एनडीए में शामिल दल कौन-कौन से हैं और उनका जातीय आधार तथा वोट बैंक की स्थिति क्या है।​

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी):

एनडीए की सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी है। पिछले विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने 74 सीटें जीती थीं। इसका मुख्य वोट बैंक सवर्ण जातियों के साथ-साथ कुछ अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) जातियों में भी है। पार्टी का प्रभाव पूरे बिहार में देखा जाता है, हालांकि सीमांचल क्षेत्र में इसकी उपस्थिति अपेक्षाकृत कमज़ोर मानी जाती है।​

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू):

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जेडीयू एनडीए की दूसरी प्रमुख पार्टी है। 2020 के विधानसभा चुनावों में जेडीयू ने 43 सीटें जीती थीं। इसका मुख्य आधार कुर्मी और कोइरी (कुशवाहा) जातियों में है, साथ ही कुछ अति पिछड़ी जातियों और मुस्लिम समुदाय के एक हिस्से का समर्थन भी इसे मिलता रहा है। नीतीश कुमार की ‘प्रगति यात्रा’ के माध्यम से पार्टी ने विकास कार्यों को जनता तक पहुंचाने का प्रयास किया है, जिससे आगामी चुनावों में वोट बैंक को मजबूत किया जा सके। ​

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) लोजपा (रामविलास):

रामविलास पासवान के निधन के बाद उनके बेटे चिराग पासवान के नेतृत्व में यह पार्टी दलित समुदाय, विशेषकर पासवान (दुसाध) जाति का प्रतिनिधित्व करती है। 2020 के विधानसभा चुनावों में लोजपा (रामविलास) ने 5.66% वोट शेयर के साथ एक सीट जीती थी।​

हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम):

पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी द्वारा स्थापित यह पार्टी अनुसूचित जाति की मुसहर जाति का प्रतिनिधित्व करती है, जिसकी बिहार में आबादी लगभग 3% है। पार्टी का प्रभाव गया, औरंगाबाद, नवादा, जहानाबाद और रोहतास जिलों में देखा जाता है। 2020 के चुनावों में ‘हम’ ने 0.89% वोट शेयर के साथ चार सीटें जीती थीं।​

राष्ट्रीय लोकमंच:

उपेंद्र कुशवाहा द्वारा स्थापित इस पार्टी का मुख्य आधार कोइरी या कुशवाहा जाति है, जिसकी बिहार में आबादी लगभग 4.21% है। हालांकि, 2020 के विधानसभा चुनावों में इस पार्टी को 1.77% वोट मिले थे, लेकिन कोई सीट जीतने में सफल नहीं रही थी।​

एनडीए की चुनावी रणनीति और लक्ष्य:

एनडीए ने आगामी चुनावों में 220 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है और इसके लिए विभिन्न स्तरों पर बैठकों और जनसंपर्क अभियानों की योजना बनाई है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में, गठबंधन पंचायत स्तर से लेकर विधानसभा स्तर तक कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करने और अभियान को प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है।​

जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए, एनडीए के घटक दल अपने-अपने वोट बैंक को मजबूत करने में जुटे हैं। बीजेपी जहां सवर्ण और ओबीसी जातियों में अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश कर रही है, वहीं जेडीयू कुर्मी, कोइरी और अति पिछड़ी जातियों के समर्थन को सुनिश्चित करने में लगी है। लोजपा (रामविलास) दलित समुदाय, विशेषकर पासवान जाति, में अपनी उपस्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रही है, जबकि ‘हम’ पार्टी मुसहर जाति के समर्थन को बनाए रखने की दिशा में कार्यरत है।​

बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा से महत्वपूर्ण रहे हैं, और आगामी चुनावों में भी ये कारक निर्णायक भूमिका निभाएंगे। एनडीए के घटक दलों की रणनीति और उनके जातीय वोट बैंक की मजबूती चुनावी परिणामों को प्रभावित करने में अहम साबित होगी।​

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