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ICICI Bank Fraud Case: चंदा कोचर उनके पति और वेणुगोपाल धूत को नहीं मिली राहत, 29 तक बढ़ी कस्टडी

ICICI Bank Fraud Case: चंदा कोचर उनके पति और वेणुगोपाल धूत को नहीं मिली राहत, 29 तक बढ़ी कस्टडी

ICICI Bank Loan Fraud Case: लोन फ्रॉड केस में गिरफ्तार ICICI बैंक की Ex-CEO चंदा कोचर (Chanda Kochhar) उनके पति दीपक कोचर (Deepak Kochhar) और वीडियोकॉन ग्रुप के संस्थापक वेणुगोपाल धूत (Venugopal Dhoot) की कस्टडी स्पेशल कोर्ट ने दो दिन के लिए बढ़ा दी है। इसके साथ ही अब ये तीनों 29 दिसंबर तक सीबीआई की कस्टडी में रहेंगे। बता दें मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सीबीआई ने वीडियोकॉन के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत, आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व प्रबंध निदेशक और सीईओ चंदा कोचर और उनके पति दीपक कोचर की हिरासत मांगी थी।

बता दें कि तीनों को बुधवार को विशेष न्यायाधीश एसएम मेनजोगे की अदालत में पेश किया गया। बुधवार को उनकी मौजूदा हिरासत अवधि खत्म हो रही थी। आरोप है कि चंदा कोचर जब ICICI बैंक की प्रमुख थीं तो उन्होंने वीडियोकॉन की अलग-अलग कंपनियों को नियमों की अनदेखी करते हुए 3250 करोड़ रुपए का लोन दिया था। बाद में वीडियोकॉन ग्रुप इस लोन से 2810 करोड़ रुपए (लगभग 86%) नहीं चुका पाया और 2017 में बैंक ने इतनी बड़ी रकम को NPA (Non Performing Assests) में डाल दिया।

शिकायत के बाद मिला स्पेशल बेड : 
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक CBI की कस्टडी में चंदा कोचर ने शिकायत करते हुए कहा था कि उन्हें सर्दी के मौसम में भी फर्श पर सोने के लिए कहा जाता है। हालांकि, इसके बाद तीनों को स्पेशल बेड और मैट्रेस दिया गया है।  इसके अलावा CBI कोर्ट ने आरोपियों को घर के खाने और दवाएं लेने की भी परमिशन दे दी है।

धूत को इन्सुलिन के लिए मिला अटेंडेंट : 
वीडियोकॉन के फाउंडर वेणुगोपाल धूत ने अपनी खराब हेल्थ का की बात करते हुए कुर्सी के अलावा स्पेशल बेड, गद्दे, तकिया और तौलिया इस्तेमाल करने की परमिशन मांगी थी। बता दें कि अदालत ने धूत को इन्सुलिन लेने में मदद करने के लिए एक अटेंडेंट रखने की भी परमिशन दी थी।

कैसे हुआ ICICI-वीडियोकॉन लोन फ्रॉड केस : 
– इस घोटाले में वेणुगोपाल धूत की कंपनियों (वीडियोकॉन, सुप्रीम एनर्जी और नू पावर रिन्यूवेबल) के अलावा चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की कंपनी पिनेकल एनर्जी भी शामिल थी।
– 2008 में धूत और दीपक कोचर ने 50-50% की पार्टनरशिप में नू पावर नाम की कंपनी बनाई। हालांकि, 2009 में धूत ने डायरेक्टर की पोस्ट से इस्तीफा देते हुए दीपक कोचर को पूरी कंपनी की कमान दे दी।
– 2010 में कोचर की नू पावर कंपनी को पैसों की जरूरत थी तो धूत की कंपनी सुप्रीम एनर्जी ने 64 करोड़ रुपए का कर्ज दे दिया।
– चूंकि धूत ने बैंक से 300 करोड़ का लोन लिया था और इसी में से उन्होंने कोचर को की नू पावर को 64 करोड़ रुपए दे दिए। हालांकि, लोन की ये शर्त थी कि 64 करोड़ रुपए के बदले नू पावर के शेयर्स सुप्रीम एनर्जी को देने होंगे।
– शेयर ट्रांसफर होने के बाद धूत के पास एक बार फिर नूपावर कपंनी की कमान आ गई। 2011 में धूत की कंपनी सुप्रीम एनर्जी ने नू पावर को महेशचंद्र पुगलिया को ट्रांसफर कर दिया।
– 2012 में जब धूत की कंपनी वीडियोकॉन को पैसों की जरूरत पड़ी तो ICICI बैंक ने 3250 करोड़ रुपए का लोन दिया। वीडियोकॉन ग्रुप ने इस लोन में से 86% रकम (करीब 2810 करोड़ रुपए) नहीं चुकाई। बाद में इस लोन को 2017 में NPA घोषित कर दिया गया।

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