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Hyderabad Liberation Day पर बोले अमित शाह-वोटबैंक की खातिर कभी इसे मनाने का साहस नहीं किया, सिक्योरिटी में चूक

Hyderabad Liberation Day पर बोले अमित शाह-वोटबैंक की खातिर कभी इसे मनाने का साहस नहीं किया, सिक्योरिटी में चूक

हैदराबाद. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आज (17 सितंबर) हैदराबाद मुक्ति दिवस समारोह (Hyderabad Liberation Day celebrations) में शामिल हुए। केंद्र सरकार पहली बार 17 सितंबर को ‘हैदराबाद मुक्ति दिवस’ मना रही है। बता दें कि भारत की आजादी के एक साल से भी ज्यादा समय के बाद निजाम के अधीन रहे पूर्वी हैदराबाद राज्य का इसी दिन भारतीय संघ में विलय संभव हो सका था। तेलंगाना सरकार ने इसे ‘तेलंगाना राष्ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में मना रही है। यह तीन दिवसीय उत्सव है। राज्य में सरकारी छुट्टी रहेगी। सरकारी दफ्तर, स्कूल और कॉलेज सब बंद रहेंगे। अमित शाह ने यहां राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस बीच शाह की सुरक्षा में चूक सामने आई है।पढ़िए क्या बोले केंद्रीय गृह मंत्री…

वादे तो अनेक लोगों ने किए मगर
शाह ने कहा-वादे तो अनेक लोगों ने किया, मगर सत्ता पर आते ही रजाकारों के डर से पलट गए। आज मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देना चाहता हूं, जिन्होंने निर्णय किया कि हैदराबाद मुक्ति दिवस को मनाया जाएगा। इस क्षेत्र में ये मांग थी कि हैदराबाद मुक्ति दिवस को सरकार की अनुमोदना के साथ मनाया जाए। मगर दुर्भाग्य की बात है कि 75 साल चले गए, जिन्होंने यहां पर शासन किया उन्होंने वोटबैंक की राजनीति के कारण हैदराबाद मुक्ति दिन मनाने का साहस नहीं किया। रजाकारों ने तीन क्षेत्रों के लोगों को दबाने और भय फैलाने के लिए कई मनमाने कानून लागू किए। निजामों ने लोगों को कुचलने की कोशिश की और कई लोगों की जान चली गई।

अगस्त 1947 में भारत को स्वतंत्रता मिली, हालांकि, हैदराबाद राज्य पर अभी भी निज़ाम का शासन था। अगले 13 महीनों तक राज्य की जनता को निजाम के रजाकारों का अत्याचार सहना पड़ा। राज्य के लोग आधिकारिक तौर पर हैदराबाद मुक्ति दिवस मनाना चाहते थे। विभिन्न राजनीतिक नेताओं ने दिन मनाने का वादा किया। हालांकि, एक बार सत्ता में आने के बाद, उन्होंने वोट बैंक की राजनीति के कारण दिन मनाने से इनकार कर दिया।

सरदार पटेल के कारण हैदराबाद आजाद हुआ
यह सरदार पटेल की पुलिस कार्रवाई थी, जिसके कारण हैदराबाद को आजाद कराया गया। 13 सितंबर से 17 सितंबर तक 109 घंटे तक कई वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दी। आज हैदराबाद मुक्ति दिन मनाने का उद्देश्य स्पष्ट है कि इस मुक्ति आंदोलन की कहानी को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।  मुक्ति संग्राम के नामी-अनामी अनेक योद्धाओं और शहीदों को जनमानस में पुनर्जीवित करके नई पीढ़ी को देश भक्ति की लौ जगानी है।

काफिले के सामने TRS नेता ने घुसा दी कार
इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सुरक्षा में फिर से चूक का मामला सामने आया है। हैदराबाद में उनके काफिले के सामने टीआरएस नेता ले कार घुसा दी। आनन-फानन ने सुरक्षाकर्मियों ने कार को हटवाया। शाह जब एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे, तभी टीआरएस नेता गोसुला श्रीनिवास ने काफिले के आगे अपनी कार खड़ी कर दी। श्रीनिवास ने तक दिया कि वे टेंशन में थे, इस वजह से अचानक कार रुक गई। इस बीच उनकी कार में तोड़फोड़ कर दी गई। इससे पहले पिछले सोमवार को मुंबई में भी एक शख्स गृह मंत्री अमित शाह के आसपास घूमता पकड़ा गया था। उसने खुद को आंध्र प्रदेश के एक सांसद का पीए बताया था। इस शख्स की पहचान महाराष्ट्र के धुले जिले के हेमंत पवार के रूप में हुई थी, जिसे अरेस्ट किया गया था।

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