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पाकिस्तान कैसे बना आतंक और तस्करी के नेटवर्क का बड़ा केंद्र? भारत से लेकर अफगानिस्तान तक समझिए पूरा कनेक्शन

पाकिस्तान कैसे बना आतंक और तस्करी के नेटवर्क का बड़ा केंद्र? भारत से लेकर अफगानिस्तान तक समझिए पूरा कनेक्शन

द फ्रंट डेस्क: एक तरफ मुंबई का 26/11 हमला, दूसरी तरफ कश्मीर में आतंकी गतिविधियां और अब पाकिस्तान के भीतर लगातार बढ़ती आतंकवादी हिंसा… पाकिस्तान का नाम जब भी आतंकवाद की चर्चा में आता है, कहानी सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहती। इसके तार भारत, अफगानिस्तान और हिंद महासागर तक फैले दिखाई देते हैं। सवाल यह है कि आखिर पाकिस्तान की जमीन और उसके आसपास का इलाका आतंकवाद, हथियारों और ड्रग्स के नेटवर्क के लिए इतना अहम कैसे बन गया? इस सवाल का जवाब सिर्फ आज की घटनाओं में नहीं मिलेगा। इसके पीछे भौगोलिक स्थिति, अफगानिस्तान में लंबे समय से चली आ रही अस्थिरता, पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन और भारत-पाकिस्तान के बीच दशकों से चला आ रहा तनाव है। और 2025 के आंकड़े पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति की गंभीर तस्वीर जरूर दिखाते हैं। Global Terrorism Index 2026 के मुताबिक 2025 में पाकिस्तान आतंकवाद से दुनिया का सबसे ज्यादा प्रभावित देश रहा। इस दौरान वहां 1,139 लोगों की मौत, 1,595 लोग घायल और 1,045 आतंकी घटनाएं दर्ज की गईं।

कहानी की शुरुआत भारत से समझिए…

भारत के लिए पाकिस्तान का नाम आतंकवाद के मुद्दे पर नया नहीं है। 2008 का मुंबई हमला आज भी इसकी सबसे बड़ी मिसालों में गिना जाता है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के रिकॉर्ड में लश्कर-ए-तैयबा को पाकिस्तान आधारित संगठन बताया गया है और 26/11 मुंबई हमलों में उसकी भूमिका का उल्लेख है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार इस हमले में करीब 164 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। यानी भारत के लिए पाकिस्तान से जुड़ा आतंकवाद केवल सीमा पर होने वाली गोलीबारी का मुद्दा नहीं रहा। यह सवाल आतंकी संगठनों, उनकी फंडिंग, ट्रेनिंग और सीमा पार नेटवर्क तक पहुंचता है। लश्कर-ए-तैयबा के अलावा जैश-ए-मोहम्मद का नाम भी भारत में हुए बड़े आतंकी मामलों के संदर्भ में सामने आया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के रिकॉर्ड में जैश-ए-मोहम्मद को पाकिस्तान स्थित संगठन बताया गया है और 2001 के भारतीय संसद हमले में उसके शामिल होने का उल्लेख है।यही वह जगह है जहां पाकिस्तान की कहानी भारत के लिए सीधे सुरक्षा के सवाल में बदल जाती है।

लेकिन पाकिस्तान खुद भी आतंक की आग में क्यों है?

यह कहानी का सबसे बड़ा विरोधाभास है। जिस पाकिस्तान पर भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद को लेकर सवाल उठाता रहा है, वही देश आज खुद आतंकवादी हिंसा से बुरी तरह प्रभावित है। Global Terrorism Index के मुताबिक 2025 में पाकिस्तान में आतंकवाद से होने वाली मौतों की संख्या बढ़कर 1,139 हो गई। यह 2013 के बाद पाकिस्तान में आतंकवाद से मौतों का सबसे ऊंचा स्तर था। देश में 1,045 आतंकी घटनाएं हुईं। यानी तस्वीर यह है कि पाकिस्तान सिर्फ दूसरे देशों के लिए सुरक्षा चुनौती से जुड़ा विषय नहीं है; वह खुद भी आतंकी संगठनों की हिंसा से जूझ रहा है।

पाकिस्तान की मौजूदा सुरक्षा स्थिति को समझने के लिए दो नाम खास तौर पर सामने आते हैं। TTP और BLA। TTP यानी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान पाकिस्तान के लिए बड़ा सुरक्षा खतरा बना हुआ है। Global Terrorism Index के अनुसार 2025 में TTP से जुड़ी हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई और संगठन की गतिविधियों में खास तौर पर पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा के आसपास तेजी देखी गई। दूसरी तरफ बलूचिस्तान में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी यानी BLA सक्रिय है। इस क्षेत्र में अलगाववादी हिंसा और आतंकी हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था के सामने अलग चुनौती खड़ी की है। यानी पाकिस्तान के सामने एक नहीं, कई दिशाओं से सुरक्षा संकट है।

असली पेच अफगानिस्तान की सीमा पर है

अब कहानी पाकिस्तान के पश्चिमी हिस्से की तरफ जाती है। पाकिस्तान की अफगानिस्तान से लगती सीमा लंबे समय से सुरक्षा और तस्करी के लिहाज से संवेदनशील रही है। Global Terrorism Index के मुताबिक 2021 में तालिबान के अफगानिस्तान की सत्ता में लौटने के बाद पाकिस्तान में आतंकवादी गतिविधियों में बढ़ोतरी हुई और पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा के आसपास सक्रिय समूहों की गतिविधियां तेज हुईं। यही इलाका ड्रग्स और दूसरे अवैध कारोबार के नेटवर्क के लिए भी महत्वपूर्ण है। UNODC के मुताबिक अफगानिस्तान से निकलने वाली ड्रग्स की Southern Route पाकिस्तान या ईरान के रास्ते हिंद महासागर तक पहुंच सकती है और वहां से आगे अफ्रीका, यूरोप और एशिया के दूसरे हिस्सों तक जाती है।यानी एक तरफ सीमा है, दूसरी तरफ समुद्र… और बीच में एक ऐसा पूरा नेटवर्क है जिसे रोकना किसी भी देश के लिए आसान नहीं है।

ड्रग्स का रास्ता पाकिस्तान से समुद्र तक कैसे पहुंचता है?

UNODC के दस्तावेजों में अफगानिस्तान से निकलने वाले ड्रग्स के एक दक्षिणी मार्ग का उल्लेख है। इसके अनुसार ड्रग्स पाकिस्तान के बलूचिस्तान से होकर मकरान तट तक पहुंचाए जा सकते हैं। वहां से छोटी नावों के जरिए इन्हें अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र तक ले जाकर दूसरी नौकाओं में ट्रांसफर किया जाता है। यही वजह है कि पाकिस्तान का बलूचिस्तान सिर्फ आतंकवाद के कारण महत्वपूर्ण नहीं है। इसकी भौगोलिक स्थिति और समुद्री पहुंच इसे अवैध तस्करी के नेटवर्क के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बनाती है। लेकिन यहां एक बात साफ रहनी चाहिए—किसी देश से ड्रग्स का ट्रांजिट होना यह साबित नहीं करता कि वहां की पूरी सरकार या पूरी आबादी इस कारोबार में शामिल है।

भारत के लिए ड्रग्स वाला एंगल क्यों महत्वपूर्ण है?

अब इस पूरी कहानी का एक और सिरा भारत से जुड़ता है। अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र से निकलने वाले अवैध ड्रग्स नेटवर्क का असर केवल पश्चिम एशिया या यूरोप तक सीमित नहीं रहता। भारत की भौगोलिक स्थिति उसे भी दक्षिण एशिया के ड्रग्स रूट के आसपास ले आती है। यही कारण है कि भारत में सुरक्षा एजेंसियां सिर्फ आतंकवाद ही नहीं, बल्कि ड्रग्स और हथियारों की सीमा पार तस्करी को भी राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से देखती हैं। आतंकवाद और ड्रग्स के नेटवर्क अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन जहां संगठित अपराध, हथियार और अवैध पैसा एक साथ मौजूद हों, वहां सुरक्षा चुनौती और ज्यादा जटिल हो जाती है।

पाकिस्तान में आतंकी संगठनों की लंबी सूची क्यों है?

पाकिस्तान और आसपास के क्षेत्र में अलग-अलग समय पर कई आतंकी संगठन सक्रिय रहे हैं। इनमें TTP, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, अल-कायदा और BLA जैसे संगठन अलग-अलग संदर्भों में सामने आते हैं। इनमें से कई संगठनों पर संयुक्त राष्ट्र या दूसरे देशों ने प्रतिबंध लगाए हैं। उदाहरण के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सूची में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद दोनों दर्ज हैं। लेकिन इन संगठनों की प्रकृति और गतिविधियां एक जैसी नहीं हैं। कुछ का फोकस भारत रहा है, कुछ पाकिस्तान के भीतर सक्रिय हैं और कुछ का नेटवर्क अफगानिस्तान या दूसरे देशों तक फैला रहा है। यही वजह है कि “पाकिस्तान में आतंकवाद” को एक ही संगठन या एक ही कारण से समझना मुश्किल है।

तो क्या पाकिस्तान ‘दुनिया का सबसे बड़ा आतंकी अड्डा’ है?

यहीं सबसे जरूरी बात आती है। Global Terrorism Index 2026 ने पाकिस्तान को 2025 में आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित देश जरूर बताया है। लेकिन रिपोर्ट ने पाकिस्तान को “दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी अड्डा” घोषित नहीं किया है। दोनों बातें अलग हैं। इसी तरह ड्रग्स की तस्करी के महत्वपूर्ण रूट का हिस्सा होना भी पाकिस्तान को दुनिया का “सबसे बड़ा ड्रग्स अड्डा” साबित नहीं करता। फिर भी आंकड़े एक गंभीर तस्वीर जरूर दिखाते हैं। आतंकवाद, सीमा पार गतिविधियां और अवैध तस्करी से जुड़ी चुनौतियां पाकिस्तान और उसके आसपास के क्षेत्र में एक-दूसरे से टकराती दिखाई देती हैं।

सबसे बड़ा सवाल- पाकिस्तान इस चक्र से बाहर कैसे निकलेगा?

यही इस पूरी कहानी का सबसे अहम सवाल है। पाकिस्तान के सामने एक तरफ TTP और BLA जैसे संगठनों की हिंसा है। दूसरी तरफ अफगानिस्तान से लगी सीमा है। इसके साथ ड्रग्स और हथियारों की तस्करी के रूट हैं। और भारत के साथ लंबे समय से चला आ रहा आतंकवाद और सुरक्षा का विवाद अलग चुनौती है। 2025 के आंकड़ों में पाकिस्तान का आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित देश बनना बताता है कि समस्या अब केवल किसी एक इलाके तक सीमित नहीं है।

पाकिस्तान की कहानी को सिर्फ “आतंक का अड्डा” कह देना आसान है, लेकिन पूरी तस्वीर इससे कहीं ज्यादा बड़ी है। एक तरफ मुंबई 26/11 जैसे हमलों में पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन का नाम सामने आता है। दूसरी तरफ पाकिस्तान खुद TTP और BLA जैसे संगठनों की हिंसा झेल रहा है। पश्चिम में अफगानिस्तान की सीमा है, जहां से आतंकवाद और ड्रग्स के नेटवर्क की चुनौती जुड़ती है। दक्षिण में मकरान तट और हिंद महासागर हैं, जहां से अवैध तस्करी के रास्ते आगे बढ़ सकते हैं। यानी पाकिस्तान की असली कहानी सिर्फ एक देश की कहानी नहीं, बल्कि आतंकवाद, सीमा, ड्रग्स, हथियार और संगठित अपराध के उस पूरे नेटवर्क की कहानी है जिसका असर भारत समेत पूरे दक्षिण एशिया पर पड़ता है।

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