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Gyanvapi Verdict: क्या है प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट जिसकी ज्ञानवापी केस में हो रही चर्चा

Gyanvapi Verdict: क्या है प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट जिसकी ज्ञानवापी केस में हो रही चर्चा

Places of Worship Act: वाराणसी के ज्ञानवापी-शृंगार गौरी केस में स्थानीय अदालत ने सोमवार 12 सितंबर को अपना फैसला सुनाया। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि श्रृंगार गौरी में पूजा अर्चना की मांग को लेकर हिंदू पक्ष द्वारा दायर याचिका सुनने लायक है। इसके साथ ही अदालत ने मुस्लिम पक्ष की उस याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें उनकी दलील थी कि ज्ञानवापी पर 1991 का प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट लागू होता है। आखिर क्या है प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट और क्यों हो रही इसकी चर्चा, आइए जानते हैं। 

क्या है प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट?
‘द प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट’ (The Places of Worship Act) 11 जुलाई 1991 को लागू किया गया था। इसके तहत देश में 15 अगस्त, 1947 के बाद किसी भी धार्मिक और पूजा स्थल को किसी दूसरे धर्म के उपासना स्‍थल में नहीं बदला जा सकता। यानी उसका रिलीजियस नेचर नहीं बदला जा सकता। अगर कोई ऐसा करता है तो उसे जेल भेजा जा सकता है। कुल मिलाकर, इस एक्ट में कहा गया है कि आजादी के वक्त जो धार्मिक स्थल जिस स्थिति में था, वैसा ही रहेगा। 

काशी-मथुरा में कैसे काम करेगा ये एक्ट?
‘द प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 की धारा 4 (1) में कहा गया है कि कोई भी धार्मिक स्थल 15 अगस्त, 1947 को जिस स्थिति में था और जिस समुदाय का था, वो भविष्य में भी वैसा और उसी समुदाय का रहेगा। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का ये भी कहना है कि इस कानून के सेक्शन 4 का सब-सेक्शन 3 कहता है कि जो प्राचीन और ऐतिहासिक जगहें 100 साल से ज्यादा पुरानी हैं, उन पर ये कानून लागू नहीं होगा। 

आखिर कौन लाया ये एक्ट : 
‘द प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट’ 1991 में कांग्रेस की नरसिम्हा राव सरकार लेकर आई थी। तब बीजेपी ने इस कानून का पुरजोर विरोध भी किया था। हालांकि, विरोध के बाद भी ये एक्ट पास हो गया। बता दें कि एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय ने इस एक्ट को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि ये कानून देश के बाकी समुदायों हिंदू, जैन, सिख और बौद्धों के संवैधानिक अधिकार छीनता है। उपाध्याय के मुताबिक, ये कानून जिन धार्मिक स्थलों को विदेशी आक्रांतओं ने अतीत में तोड़ा है, ये उन्हें वापस पाने के सारे रास्ते बंद कर देता है। 

क्या है ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी विवाद?
5 अगस्त, 2021 को कुछ महिलाओं ने वाराणसी की लोकल कोर्ट में एक याचिका लगाई थी, जिसमें उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में स्थित श्रृंगार गौरी मंदिर समेत कई विग्रहों में पूजा करने की अनुमति देने और सर्वे कराने की मांग की थी। इसी याचिका पर कोर्ट ने यहां सर्वे करने की अनुमति दी थी। सर्वे के बाद हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि मस्जिद के तहखाने में शिवलिंग मौजूद है, जबकि मुस्लिम पक्ष ने इसे फव्वारा बताया था। बता दें कि इस केस में 24 अगस्त को हिंदू और मुस्लिम पक्ष की बहस पूरी हो गई थी। इसके बाद वाराणसी के जिला जज एके विश्वेश ने 12 सितंबर तक के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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