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ED की छापेमारी के बाद कहां जाता है काला धन, क्या हैं इस पैसे को लेकर सरकार के नियम…जानिए पूरी कहानी

ED की छापेमारी के बाद कहां जाता है काला धन, क्या हैं इस पैसे को लेकर सरकार के नियम…जानिए पूरी कहानी

इस वक्त देश में दो हाई-प्रोफाइल मामला काफी सुर्खियों में है। पहला शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में पश्चिम बंगाल (West Bengal) के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) का केस और दूसरा महाराष्ट्र (Maharashtra) में शिवसेना प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) का मनी लॉन्ड्रिंग केस…दोनों ही नेता इस वक्त ईडी (Enforcement Directorate) की हिरासत में हैं। ईडी के हाथ भारी मात्रा में कैश हाथ लगे हैं। हर साल इस तरह के कई केस में ईडी की छापेमारी होती है और काला धन जब्त किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ईडी जो पैसा जब्त करती है, वह जाता कहां है? अगर नहीं, तो यहां मिलेगी पूरी जानकारी…

4 साल,  67,000 करोड़ की प्रॉपर्टी जब्त 
एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले चार साल में ईडी ने कई छोटी-बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इन कार्रवाई में 67,000 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी एनफोर्समेंट डिपार्टमेंट के  हाथ लगी है। यानी ईडी ने इतनी ज्यादा मात्रा में संपत्ति जब्त की है। जो भी कुछ ईडी के हाथ लगा है, उसमें कैश और दूसरी संपत्ति भी शामिल है।

कहां जाता है हजारों करोड़ काला धन
जांच एजेंसियां जो पैसे जब्त करती हैं, उसे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI), स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में केंद्र सरकार के अकाउंट में जमा करा देती हैं। कई केस ऐसे भी होते हैं, जिसका पैसा जांच एजेंसी अपने पास रख लेती है और केस की सुनवाई तक यह पैसा उन्हीं के पास रहता है। लेकिन अगर ईडी के हाथ प्रॉपर्टी लगी है तो  PMLA (Prevention of Money Laundering Act, 2002) के सेक्शन 5 (1) के तहत इस प्रॉपर्टी को अटैच कर दिया जाता है। कोर्ट में जब यह साबित हो जाता है तो इसे PMLA के सेक्शन 9 के तहत सरकार अपने कब्जे में ले लेती है। इस प्रॉपर्टी पर लिखा जाता है कि इस संपत्ति की खरीद, बिक्री या इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

कितने दिन प्रॉपर्टी अपने पास रख सकती है ED 
अब बात, उस प्रॉपर्टी की जो ED अपने पास रख सकती है। कभी-कभी केस की सुनवाई पूरी होने तक ईडी प्रॉपर्टी या कैश अपने पास रखती है लेकिन इसकी अवधि कितनी होती है। इसको लेकर पीएमएलए का नियम कहता है कि ईडी सिर्फ 180 दिन यानी 6 महीने तक ही प्रॉपर्टी को अपने पास रख सकती है। इसका मतलब यह हुआ कि अगर कोर्ट में आरोपी दोषी साबित हो जाता है तो प्रॉपर्टी सरकार की हो जाती है। लेकिन अगर वह दोषी साबित नहीं होता तो प्रॉपर्टी उसी की रहेगी। कई बार प्रॉपर्टी के मालिक पर कुछ फाइन लगाकर कोर्ट उसे प्रॉपर्टी लौटा देती है।

पंचनामा में क्या लिखती हैं जांच एजेंसी
जब जांच एजेंसी कहीं छापा मारती है। वहां से प्रॉपर्टी या पेपर डॉक्यूमेंट्स, कैश, गोल्ड, सिल्वर या कोई दूसरी कीमती चीज जब्त होती है तो उसका पंचनामा बनाया जाता है। पंचनामा में जिसकी प्रॉपर्टी जब्त की जा रही है, उसके सिग्नेचर भी लिए जाते हैं। इसके बाद प्रॉपर्टी को सीज कर दिया जाता है। इसे केस प्रॉपर्टी कहते हैं। पंचनामा में लिखा जाता है कि कितना कैश बरामद हुआ है। इसमें नोटों की कितनी गड्डियां हैं। कितनी नोट हैं। 200 या 500 या अन्य कितने नोट हैं। किसी नोट पर कोई निशान है या नहीं। इस पंचनामा रिपोर्ट को जांच एजेंसी अपने पास रखती है औऱ कोर्ट में इसे सबूत के तौर पर पेश किया जाता है।

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