Russia-Ukraine War: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध लगातार खतरनाक मोड़ लेता जा रहा है। दुनिया में पहले से कई संघर्ष चल रहे हैं और ऐसे में रूस-यूक्रेन युद्ध के बढ़ते दायरे ने तीसरे विश्व युद्ध की आशंका को लेकर बहस तेज कर दी है। वरिष्ठ पत्रकार राणा यशवंत ने रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल के.के. सिन्हा के साथ एक विशेष चर्चा में मॉस्को पर हुए बड़े ड्रोन हमले, रूस के पलटवार, नई मिसाइल तकनीक और यूरोप की युद्धकालीन तैयारियों समेत कई अहम पहलुओं पर बात की है। इस चर्चा में यह सवाल भी उठाया गया कि क्या रूस और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ता तनाव भविष्य में सीधे टकराव में बदल सकता है और अगर ऐसा हुआ तो इसका असर कितना व्यापक हो सकता है।
मॉस्को पर हजारों ड्रोन का दावा, रूस ने किया बड़ा पलटवार
विशेष चर्चा में दावा किया गया कि यूक्रेन ने रूस की राजधानी मॉस्को को निशाना बनाते हुए एक साथ एक हजार से अधिक ड्रोन दागे। रूस की वायु रक्षा प्रणाली ने बड़ी संख्या में ड्रोन को नष्ट किया, लेकिन चर्चा में यह भी दावा किया गया कि कुछ ड्रोन मॉस्को की महत्वपूर्ण रिफाइनरियों और दूसरे रणनीतिक ठिकानों तक पहुंचे। इसके बाद रूस की ओर से यूक्रेन के कई शहरों में बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई का जिक्र किया गया। खारकीव, जापोरिजिया और ओडेसा समेत करीब 10 प्रमुख शहरों को निशाना बनाए जाने की बात कही गई। चर्चा के अनुसार इन हमलों में शॉपिंग सेंटर, आवासीय इलाके और गोदामों को नुकसान पहुंचा। इसी घटनाक्रम को रूस और यूक्रेन के बीच बढ़ते तनाव की गंभीर तस्वीर के तौर पर पेश किया गया। चर्चा में यह भी कहा गया कि रूस ने पश्चिमी देशों और नाटो को लेकर सख्त चेतावनी दी है।
युद्ध का नया चेहरा: ड्रोन, हाइब्रिड वॉरफेयर और लंबी दूरी की मिसाइलें
मेजर जनरल के.के. सिन्हा के मुताबिक रूस-यूक्रेन युद्ध अब पारंपरिक युद्ध से आगे निकल चुका है। इसमें ड्रोन, आधुनिक मिसाइल, तकनीकी क्षमता और दूसरे गैर-पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल हो रहा है। इसे हाइब्रिड वॉरफेयर यानी मिश्रित युद्ध के तौर पर देखा जा रहा है। चर्चा में दावा किया गया कि पश्चिमी देशों और अमेरिका की मदद से यूक्रेन ने लंबी दूरी तक हमला करने वाली नई मिसाइल क्षमता विकसित की है। ‘फ्लेमिंगो’ और ‘फेल्सन’ जैसी मिसाइलों की मारक क्षमता करीब 3,000 किलोमीटर तक बताई गई। दूसरी तरफ रूस के पास भी अत्याधुनिक हाइपरसोनिक हथियार हैं। चर्चा में ‘ओरसनिक’ मिसाइल का जिक्र किया गया, जिसकी तेज रफ्तार और लंबी दूरी की क्षमता को यूरोप के लिए गंभीर रणनीतिक चुनौती के तौर पर बताया गया। अगर रूस और नाटो के बीच सीधा सैन्य टकराव होता है तो इस तरह के हथियार संघर्ष को बहुत तेजी से बड़े क्षेत्र तक फैला सकते हैं।
यूरोप में युद्ध की तैयारी क्यों? रूस पर प्रतिबंधों के बावजूद अर्थव्यवस्था मजबूत
रूस के बढ़ते आक्रामक रुख के बीच यूरोप के कई देशों की सुरक्षा तैयारियों का भी चर्चा में उल्लेख किया गया। फिनलैंड और स्वीडन की नागरिक और सैन्य तैयारियों के साथ-साथ एस्टोनिया, लातविया और पोलैंड में सीमा सुरक्षा, किलेबंदी और बंकरों से जुड़ी तैयारियों की बात कही गई। चर्चा में यूरोपीय नागरिकों को संभावित आपात स्थिति के लिए घर में भोजन, पानी, दवाइयां और नकदी जैसी जरूरी चीजें रखने की सलाह का भी उल्लेख किया गया। दूसरी तरफ रूस पर पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए 1,400 से ज्यादा आर्थिक प्रतिबंधों का भी जिक्र हुआ। चर्चा में दावा किया गया कि इन प्रतिबंधों के बावजूद रूसी अर्थव्यवस्था करीब 4 प्रतिशत की विकास दर से आगे बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार रूस ने युद्ध के दौरान अपनी अर्थव्यवस्था और औद्योगिक क्षमता को बड़े पैमाने पर रक्षा उत्पादन की ओर मोड़ा है। इससे उसे लंबे समय तक युद्ध जारी रखने की क्षमता मिल रही है।
क्या तीसरे विश्व युद्ध की उल्टी गिनती शुरू हो गई?
इस पूरी चर्चा का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रूस-यूक्रेन युद्ध अब तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ रहा है। रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ा है। यूक्रेन को पश्चिमी देशों से मिल रही सैन्य मदद और रूस की ओर से लगातार बढ़ाई जा रही सैन्य कार्रवाई ने स्थिति को और जटिल बनाया है। चर्चा में यह भी कहा गया कि रूस केवल यूक्रेन तक सीमित रणनीति नहीं देख रहा, बल्कि अपनी सैन्य और औद्योगिक क्षमता को मजबूत करने के साथ वैश्विक शक्ति संतुलन को भी प्रभावित करना चाहता है। ब्रिक्स देशों के साथ रूस के बढ़ते संबंधों और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में अमेरिकी वर्चस्व को चुनौती देने की संभावनाओं को भी इसी बड़े भू-राजनीतिक खेल से जोड़कर देखा गया।
हालांकि “तीसरे विश्व युद्ध का काउंटडाउन शुरू हो चुका है” को निश्चित तथ्य या भविष्यवाणी के तौर पर नहीं देखा जा सकता। फिलहाल यह बढ़ते सैन्य और भू-राजनीतिक तनाव से जुड़ी आशंका है। असली खतरा तब बढ़ेगा जब रूस और किसी नाटो सदस्य देश के बीच सीधा सैन्य टकराव पैदा हो। यानी रूस-यूक्रेन युद्ध अब केवल दो देशों की लड़ाई नहीं रह गया है। इसके साथ अमेरिका, यूरोप, नाटो, रूस और उभरती वैश्विक शक्तियों के हित जुड़े हुए हैं। आने वाले समय में यह संघर्ष किस दिशा में जाता है और क्या कूटनीति इसे सीमित कर पाती है, यही पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ा सवाल है।
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