अहमदाबाद: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी की विस्तारित कार्य समिति की बैठक में स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब पार्टी को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और महिलाओं का भरोसा फिर से जीतने के लिए ठोस रणनीति बनानी चाहिए। राहुल गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस के पास अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदायों का एक मजबूत आधार है, लेकिन ओबीसी और महिलाओं के बीच पार्टी की पकड़ को और मज़बूत करने की ज़रूरत है।
बैठक में मौजूद सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस ही एकमात्र ऐसी राजनीतिक ताकत है जो सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की क्षमता रखती है। उन्होंने कहा, “हमारा इतिहास समावेश का रहा है और हमारा भविष्य भी उसी रास्ते से जाएगा। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि हम उन वर्गों तक पहुंचें, जिनका विश्वास हमसे डगमगा गया है।”
राहुल ने खास तौर पर ओबीसी वर्गों की बात करते हुए कहा कि यह तबका लंबे समय से भारतीय राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता आया है, लेकिन हाल के वर्षों में कांग्रेस का प्रभाव इस वर्ग में कम होता गया है। उन्होंने नेताओं से आग्रह किया कि वे ज़मीनी स्तर पर जाकर ओबीसी समुदाय की समस्याओं को समझें, उनसे संवाद करें और उनके लिए ठोस नीतियों की पैरवी करें।
महिलाओं के संदर्भ में बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि देश की लगभग 50 प्रतिशत आबादी महिलाएं हैं, और जब तक यह बड़ा वर्ग कांग्रेस के साथ पूरी तरह नहीं जुड़ता, तब तक पार्टी की जनाधार बढ़ाने की कोशिश अधूरी रहेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण पर फोकस करना होगा, ताकि वे खुद को पार्टी की प्राथमिकता का हिस्सा महसूस करें।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि पार्टी को युवाओं के बीच भी अपना प्रभाव बढ़ाना होगा, लेकिन यह तभी संभव होगा जब पार्टी अपने मूल सिद्धांतों के साथ सामाजिक न्याय, आर्थिक समानता और धर्मनिरपेक्षता की बुनियाद पर एक बार फिर से सक्रिय होगी।
राहुल गांधी ने पार्टी के नेताओं को यह भी याद दिलाया कि कांग्रेस का संघर्ष महज सत्ता हासिल करने का नहीं, बल्कि एक न्यायपूर्ण और समावेशी भारत के निर्माण का है। उन्होंने कहा कि आने वाले चुनावों में सफलता उन्हीं राज्यों और इलाकों में मिल सकेगी, जहां पार्टी ने ओबीसी, महिलाओं और वंचित तबकों के साथ वास्तविक जुड़ाव बनाया होगा।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, बैठक में यह प्रस्ताव भी रखा गया कि हर राज्य इकाई एक विशेष कार्य योजना बनाएगी, जो ओबीसी और महिलाओं तक पहुंच बनाने के लिए ज़मीनी स्तर पर लागू की जाएगी। इसके तहत स्थानीय नेताओं को समुदाय विशेष के मुद्दों पर संवाद और समाधान आधारित कार्यक्रम चलाने की जिम्मेदारी दी जाएगी।
कुल मिलाकर, राहुल गांधी का यह संदेश साफ है कि कांग्रेस अब केवल परंपरागत जनाधार पर निर्भर नहीं रह सकती। उसे नए सामाजिक समीकरणों के साथ तालमेल बिठाना होगा, और यह तभी संभव होगा जब पार्टी खुद को जनता के करीब लेकर जाएगी, न कि केवल चुनावी मौसम में।
निष्कर्षतः, कांग्रेस की यह नई रणनीति पार्टी को जमीनी राजनीति में फिर से मजबूती दे सकती है, बशर्ते कि इसे केवल भाषणों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि कार्यान्वयन में भी उतनी ही गंभीरता दिखाई जाए।




