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2027 के लिए बीजेपी का जातीय संतुलन: 70 जिलाध्यक्षों की सूची जारी, कोर वोट बैंक पर फोकस

2027 के लिए बीजेपी का जातीय संतुलन: 70 जिलाध्यक्षों की सूची जारी, कोर वोट बैंक पर फोकस

उत्तर प्रदेश में आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने 70 जिलाध्यक्षों की सूची जारी कर दी है। इस सूची में 45 नए चेहरे शामिल किए गए हैं, जबकि 25 मौजूदा जिलाध्यक्षों को दोबारा मौका दिया गया है। बीजेपी ने इस नियुक्ति के जरिए सोशल इंजीनियरिंग का संतुलन बनाने की कोशिश की है, जिसमें सवर्ण और ओबीसी को खास तवज्जो दी गई है, जबकि महिलाओं और दलितों की भागीदारी अपेक्षाकृत कम रही है।

जातीय समीकरण पर फोकस
बीजेपी ने अपने कोर वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने के लिए सवर्ण जातियों को सबसे अधिक प्रतिनिधित्व दिया है। 70 में से 39 जिलाध्यक्ष सवर्ण समुदाय से बनाए गए हैं। इसके अलावा 25 जिलाध्यक्ष ओबीसी और 6 जिलाध्यक्ष दलित समाज से चुने गए हैं। हालांकि, मुस्लिम समुदाय से किसी को भी जिलाध्यक्ष नहीं बनाया गया है।

ब्राह्मण-ठाकुर-बनिया-कायस्थ को प्राथमिकता
बीजेपी ने अपने पारंपरिक वोट बैंक को साधने के लिए सवर्णों में भी ब्राह्मण समुदाय को सबसे ज्यादा तरजीह दी है।

20 ब्राह्मण जिलाध्यक्ष बनाए गए हैं, जिनमें बरेली से सोमपाल शर्मा, गोरखपुर से जनार्दन द्विवेदी, अमेठी से सुधांशु शुक्ला, उन्नाव से अनुराग अवस्थी और लखनऊ महानगर से आनंद द्विवेदी प्रमुख हैं।
10 ठाकुर जिलाध्यक्षों में बिजनौर से भूपेंद्र सिंह चौहान, नोएडा से महेश चौहान और हरदोई से अजीत सिंह बब्बन शामिल हैं।
4 बनिया जिलाध्यक्ष बनाए गए हैं, जिनमें गाजियाबाद से मयंक गोयल, मेरठ से विवेक रस्तोगी प्रमुख हैं।
3 कायस्थ जिलाध्यक्षों में प्रतापगढ़ से आशीष श्रीवास्तव और गोरखपुर महानगर से देवेश श्रीवास्तव शामिल हैं।
2 भूमिहार जिलाध्यक्ष कुशीनगर और गाजीपुर से बनाए गए हैं।
ओबीसी को मिला 35.71% प्रतिनिधित्व
बीजेपी ने ओबीसी समुदाय को भी ध्यान में रखते हुए 25 जिलाध्यक्ष इस वर्ग से बनाए हैं।

कुर्मी समाज से 5 – रामपुर में हरीश गंगवार, झांसी में प्रदीप पटेल, श्रावस्ती में मिश्री लाल वर्मा।
मौर्य-कुशवाहा-सैनी समाज से 4 – लखनऊ में विजय मौर्य, महोबा में मोहनलाल कुशवाह।
लोध समाज से 2 – मैनपुरी में ममता राजपूत, बांदा में कल्लू राजपूत।
अन्य ओबीसी जातियों से 4 जिलाध्यक्ष बनाए गए हैं।
हालांकि, यादव समुदाय को सिर्फ 1 जिलाध्यक्ष (मथुरा से राजू यादव) मिला है, जबकि यह ओबीसी की सबसे बड़ी आबादी है।

दलित और महिलाओं को कम भागीदारी
बीजेपी ने 6 दलित जिलाध्यक्ष नियुक्त किए हैं, जिसमें पासी समाज से 3, धोबी, कोरी और कठेरिया समाज से 1-1 व्यक्ति शामिल हैं।

कानपुर ग्रामीण से उपेंद्रनाथ पासवान, रायबरेली से बुद्धीलाल पासी दलित जिलाध्यक्षों में शामिल हैं।
महिलाओं को सिर्फ 5 जिलाध्यक्षी पद मिले हैं, जो कुल नियुक्तियों का केवल 7.14% है।
बीजेपी ने 2027 के चुनाव से पहले महिला और दलित समुदाय को अधिक भागीदारी देने का दावा किया था, लेकिन अब तक यह संख्या उम्मीद से कम रही है।

मुस्लिम समुदाय को जगह नहीं
बीजेपी ने किसी भी मुस्लिम को जिलाध्यक्ष नियुक्त नहीं किया है, जिससे यह स्पष्ट संकेत जाता है कि पार्टी हिंदू वोट बैंक पर फोकस कर रही है। पार्टी की यह रणनीति हिंदू ध्रुवीकरण को और मजबूत करने की मानी जा रही है।

2027 के लिए समीकरण तैयार
बीजेपी ने अपनी सोशल इंजीनियरिंग के जरिए 2027 विधानसभा चुनाव और 2026 के पंचायत चुनाव को साधने की कोशिश की है।

सवर्ण (55%) और ओबीसी (35.71%) के बड़े प्रतिनिधित्व से बीजेपी ने सपा के ओबीसी-पसमांदा समीकरण को टक्कर देने की रणनीति बनाई है।
महिलाओं और दलितों को कम हिस्सेदारी देकर भी अपने कोर वोट बैंक पर फोकस बनाए रखा है।
किसी मुस्लिम को जिलाध्यक्ष न बनाकर हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण की नीति को आगे बढ़ाया गया है।
बीजेपी के प्रदेश चुनाव अधिकारी महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा कि शेष 28 जिलाध्यक्षों की सूची में दलित और महिलाओं को अधिक भागीदारी दी जाएगी। अब देखने वाली बात होगी कि क्या बीजेपी आने वाले दिनों में अपने समीकरण में कोई बड़ा बदलाव करेगी या यही रणनीति 2027 तक जारी रहेगी।

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