नई दिल्ली, भारतीय जनता पार्टी (BJP) को फरवरी 2025 में नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने वाला है। मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही उन्हें मंत्री पद मिल चुका है। नड्डा की अध्यक्षता में पार्टी ने कई सफलताएं और असफलताएं देखीं, लेकिन क्या उनका कार्यकाल ‘आखिरी बॉल’ पर सिक्सर लगाने में सफल रहेगा?
दिल्ली चुनाव से हुई थी शुरुआत, दिल्ली चुनाव पर ही विदाई
जेपी नड्डा जब जनवरी 2020 में भाजपा अध्यक्ष बने, तब दिल्ली विधानसभा चुनाव उनके नेतृत्व में पहली बड़ी परीक्षा थी, जिसमें पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। अब जब उनका कार्यकाल खत्म हो रहा है, तब भी दिल्ली चुनाव हो रहे हैं। 8 फरवरी को आने वाले नतीजे तय करेंगे कि उनकी विदाई कितनी शानदार होगी।
लोकसभा में सीटें घटीं, लेकिन सत्ता बरकरार
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 303 से घटकर 240 सीटें मिलीं, लेकिन पार्टी ने लगातार तीसरी बार केंद्र में सरकार बनाई। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि नड्डा ने मोदी-शाह की जोड़ी के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखा, जिससे वे विवादों से बचे रहे।
उतार-चढ़ाव भरा कार्यकाल
सफलताएँ: यूपी, एमपी, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और त्रिपुरा में भाजपा की सरकार बनी।
असफलताएँ: झारखंड, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक भाजपा के हाथ से निकल गए।
बिहार में वापसी: नड्डा के कार्यकाल में भाजपा से अलग हुए नीतीश कुमार फिर से एनडीए में लौट आए।
महाराष्ट्र में सियासी खेल: शिवसेना टूट गई और भाजपा का गठबंधन सत्ता में आया।
भविष्य की ओर…
भाजपा में राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव पीएम मोदी, अमित शाह और संघ की सहमति से होगा। पार्टी में संगठनात्मक चुनाव पूरे होने के बाद नया अध्यक्ष तय होगा।




