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बिहार के गांवों में बही बदलाव की बयार, 11 चरण के पंचायत चुनाव में 80 फीसद मुखिया हारे

बिहार के गांवों में बही बदलाव की बयार, 11 चरण के पंचायत चुनाव में 80 फीसद मुखिया हारे

पटना:  बिहार के गांवों में इस बार बदलाव की आंधी बह रही है। 11 चरणों में पंचायत चुनाव संपन्न हो गया है। जिलों से मिले अब तक के अपडेट आंकड़े बताते हैं कि सर्वाधिक चर्चित पद मुखिया का रहा और इस पद पर लगभग 80 फीसद नए चेहरे जीतकर आए हैं। सिर्फ 20 फीसद मुखिया अपनी सीट बचा पाए। अंतिम चरण यानी 11 वें चरण की मतगणना मंगलवार देर रात तक जारी रही और फाइनल नतीजे आने के बाद इस आकड़े में बदलाव की गुंजाइश है, लेकिन पुराने लोगों को नकार देने का ट्रेंड जारी है। प्रदेश के जिलों से 6,307 पंचायतों के नतीजे मिले। इनमें 5,016 नए मुखिया चुनकर आए, जबकि 1,266 पुराने चेहरे बचे। यानी इनमें 79.53 प्रतिशत नए चेहरे हैं, जबकि 20.07 प्रतिशत पुराने। और भी बदलाव दिखे।

पुराने चेहरों को ठुकराने के उदाहरण के तौर पर देखें, तो मधुबनी की 388 पंचायतों के नतीजे मिले। इनमें सिर्फ 84 सीटों पर पुराने मुखिया जीत पाए। 304 सीटों पर तख्तापलट हो गया। मुजफ्फरपुर की 350 पंचायतों के नतीजों का विश्लेषण करें, तो पता चलता है कि वहां सिर्फ 60 पुराने मुखिया जीत पाए। 290 पंचायतों की जनता ने नए चेहरे पर भरोसा किया। कटिहार के मतदाताओं ने कुछ अधिक पुराने चेहरों पर भरोसा किया। वहां की 233 पंचायतों के नतीजे मिले, जिनमें 89 वैसे चेहरे जीत हासिल करने में सफल रहे, जिन्होंने पिछली बार भी जीत हासिल की थी। जहानाबाद की 88 पंचायतों में से सिर्फ 10 पंचायतों में पिछली बार निर्वाचित रहे मुखिया अपनी सीट बचा पाए।

पंचायतों में दिखेंगी स्मार्ट और सबल महिलाएं 

आरक्षित सीटों पर महिलाओं ने जीत हासिल की, तो उनमें बड़ी संख्या युवा और तेजतर्रार दिखीं। अपने दम पर चुनाव लड़ने और जीतने के बाद अपने दम पर पंचायतों की दशा सुधारने वाली महिलाओं की संख्या भी इस बार बढ़ी है। महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था किए जाने के बाद मुखिया पति और प्रमुख पति जैसे शब्द गांवों में प्रसिद्ध हो गए थे। सरकार की कड़ाई और नारी सशक्तीकरण के प्रयासों की बदौलत इस बार के चुनाव में वैसी महिलाएं जीतकर आई हैं, जो बदलाव का वाहक बनेंगी। विश्वविद्यालय और कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर चुनाव के मैदान में उतरे युवा भी बड़ी संख्या में जीते हैैं।

पैसा और शराब बांटने पर भी नहीं मिलता है वोट 

बिहार में 11 चरण का पंचायत चुनाव संपन्न हो गया है। इस बार चुनाव के दौरान शराब और पैसा बांटने की शिकायतें आईं। जहरीली शराब से मरने वालों के मामले में ऐसी ही पार्टी की सूचनाएं मिलीं, जो प्रत्याशियों की ओर से आयोजित थीं। पंचायत चुनाव पर नजर रखने वाले जानकारों ने माना कि इसका खास असर नतीजों पर नहीं दिखा। अगर 10 प्रत्याशी थे, तो सबने मतदाताओं को लुभाया। पुराने मुखिया ने सर्वाधिक प्रलोभन दिए, लेकिन तख्तापलट हो गया। यानी मतदाता प्रलोभन में नहीं फंसे।

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