दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) को मिली करारी हार के बाद अरविंद केजरीवाल ने संगठन में बड़े बदलाव किए हैं। पार्टी ने दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष सहित कई राज्यों में नए प्रभारी नियुक्त किए हैं। इस फेरबदल के पीछे AAP की राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति मजबूत करने और आगामी चुनावों की तैयारी की रणनीति मानी जा रही है। दिल्ली की सत्ता से बाहर होने के बाद AAP को अपनी पकड़ बनाए रखने की बड़ी चुनौती है।
दिल्ली में सौरभ भारद्वाज को मिली कमान
दिल्ली में AAP के प्रदेश अध्यक्ष का पद गोपाल राय से लेकर सौरभ भारद्वाज को सौंप दिया गया है। ग्रेटर कैलाश से तीन बार विधायक रहे भारद्वाज, इस बार बीजेपी की शिखा राय से चुनाव हार गए थे। तेज-तर्रार नेता माने जाने वाले भारद्वाज को यह जिम्मेदारी हिंदुत्व की राजनीति को काउंटर करने और आक्रामक चुनावी रणनीति के तहत दी गई है। वे ब्राह्मण समुदाय से आते हैं और दिल्ली में इस समुदाय की अच्छी-खासी आबादी है, जिसे साधने की कोशिश मानी जा रही है।
चार राज्यों में नए प्रभारी नियुक्त
AAP ने दिल्ली के अलावा चार राज्यों में भी बदलाव किए हैं। गुजरात, गोवा, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में नए प्रभारी और सह-प्रभारी की नियुक्तियां की गई हैं।
गुजरात: गोपाल राय को प्रभारी और दुर्गेश पाठक को सह-प्रभारी बनाया गया है। 2022 में AAP ने यहां 5 सीटें जीती थीं और 13% वोट मिले थे। 2027 चुनाव के मद्देनजर यह नियुक्ति की गई है।
गोवा: पंकज गुप्ता को प्रभारी बनाया गया है, जबकि दीपक सिंगला, आभाष चंदेला और अंकुश नारंग सह-प्रभारी होंगे।
पंजाब: मनीष सिसोदिया को प्रभारी और सत्येंद्र जैन को सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है। पंजाब में AAP की सरकार है, और 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं।
जम्मू-कश्मीर: मेहराज मलिक को अध्यक्ष बनाया गया है।
मिशन 2027 पर फोकस
AAP के इन बदलावों को 2027 विधानसभा चुनावों की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी ने पंजाब, गुजरात और गोवा में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। पंजाब में सत्ता बचाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि वहां कांग्रेस अपनी रणनीति बना रही है।
राष्ट्रीय स्तर पर सियासी पकड़ बनाए रखने की चुनौती
दिल्ली की सत्ता से बाहर होने के बाद AAP के राष्ट्रीय पार्टी के दर्जे पर खतरा मंडराने लगा है। AAP को यह दर्जा दिल्ली, पंजाब, गोवा और गुजरात में जीत के बाद मिला था। अब पार्टी के सामने इन राज्यों में खुद को बनाए रखने की चुनौती है।
AAP का कोई स्थायी विचारधारा आधारित आधार नहीं है। यह पार्टी भ्रष्टाचार और सुशासन के मुद्दों पर बनी थी, लेकिन सत्ता में रहने के दौरान ही यह अपनी पकड़ मजबूत कर पाई। अब बिना सत्ता के पार्टी के कार्यकर्ताओं को संगठित रखना मुश्किल होगा। इसलिए केजरीवाल ने अपने वरिष्ठ नेताओं को राज्यों में सक्रिय करने का फैसला लिया है।
केजरीवाल का अगला कदम
दिल्ली की हार से सबक लेते हुए AAP अब पूरी तरह चुनावी मोड में आ चुकी है। पार्टी के कार्यकर्ताओं को दोबारा सक्रिय करने और राष्ट्रीय स्तर पर खुद को मजबूत करने के लिए केजरीवाल आगे और बड़े फैसले ले सकते हैं। मिशन 2027 को देखते हुए अगले कुछ महीनों में पार्टी की रणनीति और स्पष्ट होगी।




