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गुवाहाटी, 2 मई 2021

असम विधानसभा चुनाव 2021 परिणाम में भाजपा सत्‍ता में वापसी करती नजर आ रही है। राज्य की 126 सीटों पर हुए चुनावों की वोटों की गिनती में अब तक के रूझानों में बीजेपी आगे चल रही है, वहीं कांग्रेस गठबंधन बहुत पीछ चल रहा है। अब तक के रूझान में साफ दिख रहा है कांग्रेस को यहां गठबंधन का फायदा नहीं हुआ है। आइए जानते है आखिर वो कौन सी वजह रहीं जिसकी वजह से असम में बीजेपी को जनता का प्‍यार मिला और वहां एक बार फिर कमल का फूल खिला।

प्रदेश में जातीय राजनीति से इतर भाजपा ने बुनियादी ढाँचे पर दिया ध्‍यान

असम में भारतीय जनता पार्टी के बड़े पैमाने पर बुनियादी ढाँचे पर ध्‍यान दिया और बड़ा परिवर्तन करके और जातीय राजनीति से दूर रहकर राज्य के बदले हुए रवैये ने सत्तारूढ़ पार्टी को राज्य में निर्णायक बढ़त हासिल करने में मदद की है। बड़े पैमाने पर पुलों, सड़कों, अस्पतालों और शिक्षा संस्थानों सहित इन्‍फ्रास्‍टकचर परिवर्तन, भाजपा की इस जीत की प्रमुख वजह और राज्य में दिखाई देने वाले परिवर्तन का हिस्सा हैं।

भाजपा की असम में बदली छवि

भाजपा के लिए, असम कभी भी एक पारंपरिक आधार नहीं रहा है और भाजपा ने 2016 में राज्य में अपनी सफलता के बाद से उसने न केवल राज्य पर अपनी पकड़ मजबूत की है, बल्कि अपने मुख्य राजनीतिक नेरेटिव को बदलने में भी कामयाब रही है। हालाँकि ये भाजपा का मौन परिवर्तन है और भाजपा के लिए व्यापक तौर पर राष्ट्रीय ढांचे की ओर जातीय पहचान से दूर जाना कठिन था लेकिन उसने असम में अपनी ये छवि को बदल दिया है।

एनआरसी लागू करने से भाजपा को नहीं हुआ कोई नुकसान

बता दें भाजपा ने सबसे पहले असम में ही एनआरसी लागू किया जिसका जमकर विरोध हुआ लेकिन इन परिणामों से साफ है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम को लेकर ये प्रतीत नहीं होता कि भाजपा की संभावनाओं पर इससे कोई खराब असर पड़ा है। इससे साफ है कि असम में बाग्‍लादेशियों की घुसपैठ से असम की त्रस्‍त जनता भी भाजपा के फैसले से खुश हुई और भाजपा की झोली में वोट डालकर उसे जीत दिलवाई।

असम में कौन बनेगा मुख्‍यमंत्री

हालांकि असम के फाइनल परिणाम में भाजपा जीत जाती है तो आने वाले समय में भाजपा के लिए मुश्किल सीएम की कुर्सी को लेकर होगा। ये देखना रोचक होगा कि भाजपा सर्बानंद सोनोवाल और हिमंत बिस्वा सरमा के बीच मुख्यमंत्री के सवाल को कैसे हल करती है। क्‍योंकि सर्बानंद सोनोवाल जैसा चेहरा होते हुए भी पार्टी ने उन्हें सीएम के तौर पर चुनावों में पेश नहीं किया है। मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की सीएम पद की दावेदारी इसलिए मजबूत है क्योंकि उनके प्रतिनिधित्‍व में हुए 5 साल के काम पर पार्टी ने फिर से सत्ता में वापसी की है। सौम्‍य व्‍यवहार के बलबूते उन्‍होंने बिना विवाद के पांच साल सरकार चलाने में सफलता हासिल की। वहीं हिमंत बिस्वा सरमा पिछले कुछ वर्षों में पार्टी का बहुत बड़ी चेहरा बनकर उभरे हैं। कोविड माहामारी में उन्‍होंने जो काम किया उससे भाजपा की छवि और बेहतर हुई है।

भाजपा का गठबंधन

वहीं एआईयूडीएफ (ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट) और एजीपी (असोम गण परिषद) जैसे क्षेत्रीय दलों के लिए, जिन्होंने क्रमशः कांग्रेस और भाजपा के साथ गठबंधन किया, यह चुनाव एक राज्य में उनकी प्रासंगिकता का पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण है। चुनाव आयोग के अनुसार, AIUDF नौ सीटों पर आगे चल रही है जबकि 10 में एजीपी।

कांग्रेस की हार की वजह

वहीं कांग्रेस को मिली हार के कारण पर गौर करें तो कांग्रेस के लिए, जो राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में अपनी पहचान खो रही है, जिसके कारण अनुभवी तरुण गोगोई को भारी नुकसान हुआ है। कांग्रेस की हार के लिए राष्‍ट्रीय नेतृत्‍व में स्पष्ट चेहरा न होना, कोई सुसंगत नेतृत्व और एक अभियान जो केवल चुनाव के बाद के चरणों में हुआ, कांग्रेस इस दौड़ में कभी भी सबसे आगे नहीं रही।

असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने किया ये ट्वीट

असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने ट्वीट करते हुए लिखा अभी तक वोटों की काउंटिंग चल रही है। यह स्पष्ट हुआ है कि असम में फिर से भाजपा की सरकार बनेगी। जनता ने मजबूत कदम उठाया है। जनता के सहयोग की वजह से यह सब संभव हो रहा है।