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जम्मू-कश्मीर में आर्म्स लाइसेंस घोटाला: कई IAS अधिकारियों पर मुकदमे का प्रस्ताव लौटा, अगली सुनवाई 20 मार्च को, जानें क्या है मामला

जम्मू-कश्मीर में आर्म्स लाइसेंस घोटाला: कई IAS अधिकारियों पर मुकदमे का प्रस्ताव लौटा, अगली सुनवाई 20 मार्च को, जानें क्या है मामला

गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर के तीन IAS अधिकारियों—यशा मुद्गल, शाहिद इकबाल चौधरी और नीरज कुमार—के खिलाफ शस्त्र लाइसेंस घोटाला मामले में मुकदमा चलाने के प्रस्ताव को लौटा दिया है। मंत्रालय ने आवश्यक दस्तावेजों की कमी का हवाला देते हुए जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव से एक सप्ताह के भीतर पुनः प्रस्ताव जमा करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में अगली सुनवाई 20 मार्च को होगी।

क्या है शस्त्र लाइसेंस घोटाला?
CBI की रिपोर्ट के अनुसार, 2012 से 2016 के बीच जम्मू-कश्मीर में जिलाधिकारियों द्वारा कथित रूप से आर्थिक लाभ के लिए 2.74 लाख से अधिक अवैध शस्त्र लाइसेंस जारी किए गए। इसमें जम्मू संभाग के 10 जिलों में लगभग 1.53 लाख और कश्मीर संभाग के 12 जिलों में 1.21 लाख लाइसेंस दिए गए थे। इन लाइसेंसों को बिना पात्रता की जांच किए जारी किया गया, जिससे गैर-योग्य व्यक्तियों को भी हथियार रखने की अनुमति मिली।

CBI ने इस मामले में आठ IAS अधिकारियों सहित कई अन्य सरकारी अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति मांगी थी। इनमें जम्मू-कश्मीर के राजस्व सचिव कुमार राजीव रंजन का नाम भी शामिल था, जो उस समय जम्मू के डिप्टी कमिश्नर थे।

जांच और अदालत की नाराजगी
21 मार्च 2024 को CBI ने 15 आरोपियों के खिलाफ दो चार्जशीट दायर की थी।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने नौकरशाहों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति देने में हो रही देरी और “पिक एंड चूज” नीति पर चिंता जताई थी।
जनवरी 2024 में उच्च न्यायालय ने सरकार को इस घोटाले में पांच IAS अधिकारियों सहित अन्य की संलिप्तता पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए।

किन अधिकारियों पर है आरोप?
IAS और JKAS अधिकारियों की सूची में शामिल नाम:

यशा मुद्गल (2007 बैच) – वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में आयुक्त सचिव (पर्यटन)।
शाहिद इकबाल चौधरी (2009 बैच) – वर्तमान में ग्रामीण विकास और स्थानीय स्वशासन विभाग के सचिव।
नीरज कुमार (2010 बैच) – वर्तमान में जम्मू-कश्मीर ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट में प्रशासकीय सचिव।
अन्य अधिकारी: प्रसन्ना रामास्वामी जी, एम. राजू, फिदा हुसैन, जितेंद्र कुमार सिंह, फकीर चंद भगत, हेमंत कुमार शर्मा और शब्बीर अहमद बट।

आगे क्या होगा?
गृह मंत्रालय द्वारा मांगे गए दस्तावेज जमा करने के बाद अदालत में सुनवाई होगी। 20 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई में तय होगा कि इन अधिकारियों पर मुकदमा चलेगा या नहीं। CBI इस मामले की गहन जांच कर रही है, और अदालत के निर्देश के अनुसार अभियोजन प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।


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