नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के निष्कासित विधायकों को गुरुवार को दिल्ली विधानसभा में प्रवेश से रोक दिया गया, जिससे राजनीतिक विवाद और बढ़ गया। AAP नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तानाशाही का आरोप लगाया और इस फैसले को असंवैधानिक करार दिया। विधानसभा के बाहर पुलिस द्वारा बैरिकेडिंग कर दी गई, जिसके चलते 21 AAP विधायक विधानसभा में नहीं घुस पाए, जबकि अमानतुल्लाह खान को प्रवेश की अनुमति दी गई।
आतिशी ने बीजेपी पर बोला हमला
पूर्व मुख्यमंत्री और AAP नेता आतिशी ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “बीजेपी ने सरकार में आते ही तानाशाही की हदें पार कर दी हैं। दिल्ली विधानसभा के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि चुने हुए विधायकों को सदन में प्रवेश करने से रोका जाए। यह हमारे संवैधानिक अधिकारों का हनन है।”
आतिशी ने आरोप लगाया कि AAP विधायकों को इसलिए सस्पेंड किया गया क्योंकि उन्होंने विधानसभा में ‘जय भीम’ के नारे लगाए थे। उन्होंने कहा कि जब बीजेपी विधायक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में नारे लगाते हैं तो कोई कार्रवाई नहीं होती, लेकिन डॉ. भीमराव अंबेडकर के समर्थन में नारे लगाने पर AAP विधायकों को सजा दी गई।
विधानसभा में हंगामे के बाद हुआ निलंबन
25 फरवरी को दिल्ली विधानसभा में उस वक्त हंगामा मच गया जब उपराज्यपाल (LG) के अभिभाषण के दौरान AAP विधायकों ने नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने 21 AAP विधायकों को तीन दिन के लिए सस्पेंड कर दिया। यह निलंबन 28 फरवरी तक लागू रहेगा।
स्पीकर ने अपने फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखना जरूरी है और AAP विधायकों का व्यवहार असंवैधानिक था। हालांकि, AAP नेताओं का कहना है कि यह निलंबन लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और बीजेपी सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है।
अमानतुल्लाह को क्यों मिली एंट्री?
दिल्ली विधानसभा में प्रवेश से रोके गए 21 विधायकों में अमानतुल्लाह खान का नाम शामिल नहीं था। दरअसल, 25 फरवरी को जब LG का अभिभाषण हुआ था, उस दिन अमानतुल्लाह विधानसभा में मौजूद नहीं थे, इसलिए उनके खिलाफ निलंबन लागू नहीं हुआ। इसी वजह से उन्हें गुरुवार को सदन की कार्यवाही में शामिल होने दिया गया, जबकि बाकी विधायकों को प्रवेश नहीं दिया गया।
आप विधायकों का विरोध प्रदर्शन जारी
विधानसभा में प्रवेश न मिलने के बाद AAP विधायकों ने गेट के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान उनकी सुरक्षाकर्मियों और अधिकारियों से तीखी बहस भी हुई। AAP नेता संजीव झा ने कहा, “यह हमारे संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है। बीजेपी सरकार दिल्ली में लोकतंत्र की हत्या कर रही है।”
AAP नेताओं ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार अंबेडकर की विरासत को मिटाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी दफ्तरों से डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीरें हटाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीरें लगाई जा रही हैं, जो दलित समाज और संविधान निर्माता का अपमान है।
राजनीतिक विवाद गहराया
इस पूरे घटनाक्रम ने दिल्ली की राजनीति में हलचल मचा दी है। AAP ने इसे बीजेपी की “तानाशाही” करार दिया, जबकि बीजेपी का कहना है कि सदन की गरिमा बनाए रखना आवश्यक है। विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने लगे हैं, जिससे आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है।




