द फ्रंट डेस्क: “सामने औरत नहीं, जिले का कप्तान बैठा है।” यह बात उस दौर की है, जब एक महिला पुलिस अधिकारी के सामने शिकायत लेकर पहुंची महिला के मन में झिझक थी। लेकिन बातचीत आगे बढ़ी तो उसे महसूस हुआ कि सामने सिर्फ एक महिला अधिकारी नहीं, बल्कि पूरे जिले की जिम्मेदारी संभालने वाला पुलिस कप्तान बैठा है। यही बदलाव लक्ष्मी सिंह की पुलिसिंग की पहचान बना जहां वर्दी का मतलब सिर्फ कार्रवाई नहीं, बल्कि भरोसा पैदा करना भी है। नवंबर 2022 में गौतमबुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर की जिम्मेदारी संभालने वाली लक्ष्मी सिंह उत्तर प्रदेश की पहली महिला पुलिस कमिश्नर बनीं। नोएडा जैसे तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्र में उनके सामने संगठित अपराध, आर्थिक अपराध, साइबर फ्रॉड और नशे के नेटवर्क जैसी कई चुनौतियां थीं। ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं था कि पुलिस कितनी कार्रवाई करती है, बल्कि यह भी था कि उनके आने के बाद पुलिसिंग के तरीके में क्या बदला? यही इस कहानी का असली Change Maker एंगल है। लक्ष्मी सिंह के कार्यकाल को सिर्फ एनकाउंटर, गिरफ्तारी या अपराध के आंकड़ों से समझना अधूरा होगा। उनकी कार्यशैली में अपराध के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ संवाद, आर्थिक नेटवर्क पर प्रहार, साइबर अपराध के पीड़ितों तक पैसा वापस पहुंचाना और पीड़ित-केंद्रित पुलिसिंग जैसे पहलू भी दिखाई देते हैं।
गांव से लेकर बड़े अपराध नेटवर्क तक, भरोसा बना पुलिसिंग का आधार
लक्ष्मी सिंह की कार्यशैली की एक खास बात यह रही कि वह समस्याओं को केवल पुलिस मुख्यालय के नजरिए से देखने के बजाय जमीन पर जाकर समझने पर जोर देती रहीं। चित्रकूट के एक गांव में पानी की समस्या को लेकर लोगों से संवाद इसका उदाहरण है। गांव में भरोसा कायम होने के बाद पुलिस को ऐसी जानकारी मिली, जिसने स्थानीय स्तर पर समस्या को समझने में मदद की। इसी तरह फर्रुखाबाद में डकैत सागर मल्ला के खिलाफ कार्रवाई के दौरान करीब 80 किलोमीटर का सफर, बैलगाड़ियों से आगे बढ़ना और रातभर चलाया गया ऑपरेशन बताता है कि पुलिसिंग उनके लिए सिर्फ दफ्तर से निर्देश देने तक सीमित नहीं रही। 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान भी उन्होंने गांवों में जाकर खाप नेताओं, मौलवियों और प्रधानों से संवाद किया था। उस समय उन्होंने ‘मिल्क डिप्लोमेसी’ जैसे स्थानीय संवाद के तरीके का इस्तेमाल कर तनाव कम करने की कोशिश की। यानी कानून-व्यवस्था में संवाद को भी पुलिस कार्रवाई का हिस्सा बनाया गया।
आंकड़ों में दिखी गिरावट, लेकिन बदलाव की तस्वीर इससे भी बड़ी
अप्रैल 2025 में प्रकाशित पुलिस आंकड़ों पर आधारित तुलना में 2022 और 2024 के बीच गौतमबुद्ध नगर में कई दर्ज अपराध श्रेणियों में कमी दिखाई गई।
| दर्ज अपराध | 2022 | 2024 | बदलाव |
|---|---|---|---|
| हत्या | 53 | 49 | 7.5% कमी |
| बलात्कार | 29 | 16 | 44.8% कमी |
| यौन उत्पीड़न | 107 | 56 | 47.7% कमी |
| घर में सेंधमारी | 144 | 54 | 62.5% कमी |
| लूट | 39 | 11 | 71.8% कमी |
इन आंकड़ों में सबसे बड़ी गिरावट लूट और सेंधमारी जैसी श्रेणियों में दिखाई देती है, जबकि हत्या के मामलों में कमी अपेक्षाकृत सीमित है। हालांकि यहां एक जरूरी सावधानी भी है। ये दर्ज मामलों के आंकड़े हैं। केवल दो वर्षों के आंकड़ों की तुलना से यह साबित नहीं किया जा सकता कि बदलाव का पूरा कारण किसी एक पुलिस अधिकारी की नीतियां थीं। अपराध के आंकड़ों पर जनसंख्या, शिकायत दर्ज होने की प्रवृत्ति, पुलिस की कार्रवाई, सामाजिक परिस्थितियों और न्यायिक प्रक्रिया जैसे कई कारकों का प्रभाव पड़ता है। फिर भी यह तुलना इस अवधि में कई प्रमुख अपराध श्रेणियों में दर्ज मामलों में बदलाव को सामने रखती है।
अपराधियों पर सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, आर्थिक चोट
संगठित अपराध के खिलाफ रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव अपराधियों के आर्थिक नेटवर्क को निशाना बनाना रहा। जनवरी 2023 से 15 मार्च 2025 के बीच गैंगस्टर एक्ट के तहत 152 मामले दर्ज किए गए और 803 गिरफ्तारियां हुईं। करीब 60 मामलों में लगभग 330 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की गईं। इसका मकसद सिर्फ अपराधियों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि अपराध से जुड़े आर्थिक ढांचे पर भी चोट करना था। हालांकि गिरफ्तारी या संपत्ति कुर्की को दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।
15 हजार करोड़ के कथित फर्जीवाड़े ने खोली आर्थिक अपराध की परत
जून 2023 में पैन के कथित दुरुपयोग से जुड़ी एक शिकायत की जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया। जांच में करीब 2,660 कथित फर्जी कंपनियों का पता चला और शुरुआती अनुमान में पांच वर्षों में 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक के कथित वित्तीय फर्जीवाड़े की बात सामने आई। यह मामला दिखाता है कि आधुनिक पुलिसिंग में अपराध सिर्फ सड़क पर होने वाली वारदात तक सीमित नहीं है। कंपनियों, दस्तावेजों, टैक्स लेनदेन और वित्तीय नेटवर्क की जांच भी पुलिसिंग का अहम हिस्सा बन चुकी है।
साइबर अपराध में कार्रवाई का मतलब सिर्फ गिरफ्तारी नहीं
साइबर अपराध के मामले में भी पुलिसिंग का एक अलग पहलू सामने आया। 1 जनवरी 2023 से 27 मार्च 2026 के बीच साइबर अपराध से जुड़े 1,692 आरोपियों की गिरफ्तारी, 139.5 करोड़ रुपये फ्रीज और 68.3 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस किए जाने की जानकारी सामने आई। यहां बदलाव सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी में नहीं, बल्कि पीड़ित को उसका पैसा वापस दिलाने की दिशा में भी दिखाई देता है। बैंकिंग सिस्टम, तकनीकी एजेंसियों और दूसरे राज्यों की एजेंसियों के साथ समन्वय साइबर अपराध से निपटने की इस प्रक्रिया का हिस्सा रहा।
‘अपराजिता’ से पुलिसिंग में आया पीड़ित-केंद्रित पहलू
लक्ष्मी सिंह की पुलिसिंग में एक और महत्वपूर्ण पहलू महिला और बाल पीड़ितों को लेकर दिखाई देता है। ‘अपराजिता’ पहल के पीछे एक बच्ची के साथ यौन अपराध का मामला था। एफआईआर और चार्जशीट के बाद भी जब सवाल उठा कि पीड़ित बच्ची के जीवन में आगे क्या होगा, तो पुलिस की भूमिका को सिर्फ कानूनी कार्रवाई से आगे ले जाने की कोशिश की गई। काउंसलिंग, कानूनी मदद और शिक्षा जैसे पहलुओं को जोड़ने का प्रयास इसी सोच का हिस्सा था कि पुलिस कार्रवाई का अंतिम उद्देश्य सिर्फ केस दर्ज करना या आरोपी को पकड़ना नहीं, बल्कि पीड़ित को दोबारा सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद करना भी होना चाहिए।
लक्ष्मी सिंह के आने से आखिर बदला क्या?
लक्ष्मी सिंह की कहानी को सिर्फ एक महिला IPS अधिकारी की सफलता की कहानी के तौर पर देखना इस बदलाव को छोटा कर देगा। असली बदलाव पुलिसिंग के तरीके में दिखाई देता है। अपराधी के खिलाफ कार्रवाई के साथ उसके आर्थिक नेटवर्क पर प्रहार, साइबर अपराध में पीड़ित तक पैसा वापस पहुंचाने की कोशिश, जमीनी स्तर पर संवाद और पीड़ित-केंद्रित पहल। 2000 बैच की यूपी कैडर IPS अधिकारी लक्ष्मी सिंह ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक और समाजशास्त्र में एमए किया है। उन्हें 2016 में पुलिस मेडल, 2020 और 2021 में डीजी कमेंडेशन डिस्क, 2022 में डीजी कमेंडेशन डिस्क प्लेटिनम और 2023 में उत्कृष्ट सेवा पदक मिला। 2025 में उन्हें ADG पद पर पदोन्नत किया गया।
लेकिन Change Maker की कसौटी पर उनकी सबसे महत्वपूर्ण पहचान पदक या पद नहीं, बल्कि यह सवाल है कि पुलिस को सिर्फ ताकत की संस्था मानने के बजाय उसे भरोसे, तकनीक, संवाद और जवाबदेही से जोड़ने की कोशिश कितनी दिखाई देती है। नोएडा में उनकी भूमिका को इसी बदलाव की प्रक्रिया के रूप में पढ़ा जा सकता है।


