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जंतर-मंतर पर CEC के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर दिल्ली में हाई अलर्ट, 11 मेट्रो स्टेशन बंद, जानें क्या है पूरा मामला

जंतर-मंतर पर CEC के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर दिल्ली में हाई अलर्ट, 11 मेट्रो स्टेशन बंद, जानें क्या है पूरा मामला

Jantar Mantar Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है और नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू किए गए हैं। जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में बैरिकेडिंग के साथ बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा दिल्ली मेट्रो ने सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर 11 स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट अस्थायी रूप से बंद कर दिए हैं। यह पूरा मामला चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उठाई जा रही आपत्तियों से जुड़ा है। दिल्ली के अलावा मुंबई के शिवाजी पार्क में भी CJP ने प्रदर्शन का ऐलान किया है। ऐसे में सवाल है कि जंतर-मंतर पर आज क्या स्थिति है, 11 मेट्रो स्टेशन क्यों बंद किए गए हैं, प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं दी गई और CJP समेत दूसरे संगठनों की CEC से क्या मांगें हैं? आइए पूरे मामले को आसान भाषा में समझते हैं।

जंतर-मंतर पर आज क्या स्थिति है?

2 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए नई दिल्ली और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई है। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है। पुलिस और प्रशासन की ओर से जंतर-मंतर की तरफ जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। प्रदर्शन का आह्वान चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR से जुड़े मुद्दों को लेकर किया गया है। AISA, राज्यसभा सांसद मनोज झा और सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण समेत कई लोगों और संगठनों ने प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। आयोजकों की प्रमुख मांगों में CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी शामिल है।

11 मेट्रो स्टेशन क्यों किए गए बंद?

जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था का असर दिल्ली मेट्रो पर भी पड़ा है। DMRC ने अगली सूचना तक 11 स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट बंद करने की घोषणा की है। इनमें जनपथ, पटेल चौक, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, राजीव चौक, सेवा तीर्थ, मंडी हाउस, लोक कल्याण मार्ग, INA, चावड़ी बाजार, रामकृष्ण आश्रम मार्ग और नई दिल्ली शामिल हैं। हालांकि कुछ प्रमुख स्टेशनों पर यात्रियों को इंटरचेंज की सुविधा उपलब्ध है। यानी यात्री इन स्टेशनों पर ट्रेन बदल सकते हैं, लेकिन वहां से बाहर निकलने या स्टेशन में प्रवेश करने की सुविधा बंद रखी गई है। यह व्यवस्था सुरक्षा और भीड़ के प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए की गई है।

दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं दी?

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी है। इसके बाद नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक व्यवस्था लागू की गई है। पुलिस का कहना है कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ये कदम उठाए गए हैं। जंतर-मंतर, संसद मार्ग, टॉल्स्टॉय मार्ग, कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक को लेकर भी विशेष व्यवस्था की गई है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने लोगों को प्रभावित इलाकों से बचने और यात्रा से पहले वैकल्पिक मार्गों की योजना बनाने की सलाह दी है।

CJP ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ क्यों शुरू किया आंदोलन?

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने 1 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि अगर CEC ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो 2 अक्टूबर से आंदोलन शुरू किया जाएगा। CJP ने आंदोलन की शुरुआत मुंबई के शिवाजी पार्क से करने का ऐलान किया था और इसे आगे देश के दूसरे हिस्सों तक ले जाने की बात कही थी। CJP की ओर से SIR, मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। पार्टी ने CEC के इस्तीफे को आंदोलन की प्रमुख मांगों में रखा है। हालांकि, प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए; चुनाव आयोग ने मतदाता सूची और SIR से जुड़े आरोपों को खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा है।

CJP की तीन प्रमुख मांगें क्या हैं?

अभिजीत दीपके की ओर से आंदोलन के पीछे तीन प्रमुख मांगें बताई गई हैं।

पहली मांग: CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जांच कराई जाए और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाए।

दूसरी मांग: SIR की प्रक्रिया को रोका जाए और 2025 की मतदाता सूची के आधार पर चुनाव कराए जाएं।

तीसरी मांग: चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनाया जाए।

इन मांगों के अलावा CJP की ओर से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को भी उठाया गया है।

आखिर SIR को लेकर विवाद क्या है?

SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। मौजूदा विवाद में प्रदर्शनकारी संगठन इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं और उनका आरोप है कि इसके कारण पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने SIR और मतदाता सूची से जुड़े आरोपों को खारिज करते हुए अपनी प्रक्रिया का बचाव किया है।

यही वजह है कि SIR अब इस पूरे विवाद का एक प्रमुख मुद्दा बन गया है। एक तरफ प्रदर्शनकारी संगठन चुनाव आयोग की जवाबदेही और मतदाता सूची की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं आयोग अपने स्तर पर इन आरोपों का जवाब दे रहा है। फिलहाल 2 अक्टूबर को दिल्ली का जंतर-मंतर और उसके आसपास का इलाका कड़ी सुरक्षा के घेरे में है। प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद संभावित भीड़ को देखते हुए पुलिस, ट्रैफिक और मेट्रो प्रशासन ने कई स्तरों पर सुरक्षा एवं यातायात संबंधी व्यवस्थाएं लागू की हैं। मुंबई में भी CJP की ओर से प्रदर्शन का कार्यक्रम रखा गया है।

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