द फ्रंट डेस्क: फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में हवा के बीच पैदा हुए एक बड़े संकट ने विमान में सवार 174 लोगों की जान खतरे में डाल दी थी। इस दौरान भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार खुद गंभीर रूप से घायल हो गए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। घायल होने के बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाबी हासिल की, जिसके बाद यात्रियों और क्रू को अंदर पहुंचकर हालात संभालने का मौका मिला। विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया। इस घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत कई प्रमुख लोगों ने उनकी बहादुरी की तारीफ की। आखिर कौन हैं कैप्टन स्मित मच्छार और क्यों दुनियाभर में उनकी बहादुरी को सलाम किया जा रहा है? आइए जानते हैं।
कौन हैं कैप्टन स्मित मच्छार?
कैप्टन स्मित मच्छार एक अनुभवी भारतीय कमर्शियल पायलट हैं, जिनका करीब डेढ़ दशक का एविएशन करियर रहा है। वह जून 2022 से फ्लाईदुबई के साथ कैप्टन के तौर पर जुड़े हैं और बोइंग 737 विमान उड़ाते हैं। इससे पहले उन्होंने करीब 11 साल तक स्पाइसजेट में काम किया था। इसी दौरान उन्होंने कमर्शियल पायलट के तौर पर लंबा अनुभव हासिल किया और सीनियर कमांडर तथा लाइन ट्रेनिंग कैप्टन जैसी जिम्मेदारियां निभाईं। रिपोर्टों के मुताबिक, मच्छार के पास 9,750 घंटे से ज्यादा का उड़ान अनुभव है। इसका बड़ा हिस्सा बोइंग 737 विमान उड़ाने से जुड़ा रहा है। इतने लंबे अनुभव के बाद वह फ्लाईदुबई में भी कमांडर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। हालांकि, जिस वजह से आज उनका नाम दुनियाभर में चर्चा में है, वह उनका लंबा एविएशन करियर भर नहीं है। फ्लाइट FZ1073 में हुए घटनाक्रम के दौरान उन्होंने जिस तरह गंभीर स्थिति का सामना किया, उसने उन्हें सुर्खियों में ला दिया।

टेक्सटाइल कारोबार से कॉकपिट तक कैसे पहुंचे?
स्मित मच्छार की पायलट बनने की कहानी भी काफी दिलचस्प है। उनका शुरुआती रुझान एविएशन की तरफ नहीं था। परिवार के टेक्सटाइल कारोबार से जुड़े होने के कारण उनका करियर भी इसी दिशा में जाने वाला था। लेकिन करीब 19 साल की उम्र में एक सेमिनार के दौरान उनकी दिलचस्पी एविएशन में पैदा हुई। विमान उड़ाने और पायलट बनने के क्षेत्र में उनकी रुचि बढ़ती गई और उन्होंने अपना करियर बदलने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने न्यूजीलैंड में पायलट की ट्रेनिंग ली। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्होंने कमर्शियल एविएशन में कदम रखा। भारत लौटने के बाद उन्होंने स्पाइसजेट के साथ अपना करियर आगे बढ़ाया। स्पाइसजेट में करीब 11 साल काम करने के दौरान उन्होंने बोइंग 737 उड़ाया और कमांडर के तौर पर अनुभव हासिल किया। इसके बाद जून 2022 में वह फ्लाईदुबई से जुड़ गए। इस तरह परिवार के कारोबार से शुरू हुआ उनका सफर आखिरकार उन्हें अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन के कॉकपिट तक ले गया।
फ्लाइट FZ1073 में आखिर क्या हुआ था?
अब सवाल यह है कि आखिर 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में ऐसा क्या हुआ, जिसने कैप्टन स्मित मच्छार को दुनिया की सुर्खियों में ला दिया? फ्लाइट FZ1073 दुबई से तेल अवीव के लिए रवाना हुई थी। विमान में 174 लोग सवार थे। उड़ान के दौरान अचानक कॉकपिट के अंदर हिंसक झड़प शुरू हो गई। रिपोर्टों के मुताबिक, को-पायलट ने कैप्टन स्मित मच्छार पर चाकू से हमला किया। इस हमले में मच्छार गंभीर रूप से घायल हो गए। इसी दौरान विमान ने तेजी से ऊंचाई खोनी शुरू कर दी। रिपोर्टों के अनुसार, विमान करीब 14,000 फीट नीचे आया और यह गिरावट 30 सेकंड से भी कम समय में हुई। यानी कुछ ही सेकंड में विमान के अंदर मौजूद लोगों के सामने एक बेहद गंभीर स्थिति पैदा हो गई थी। कॉकपिट में कैप्टन घायल थे, विमान तेजी से नीचे जा रहा था और स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखना चुनौती बन गया था। ऐसे समय में जो कुछ हुआ, उसने पूरी घटना की दिशा बदल दी।
घायल होने के बावजूद कैसे बची यात्रियों की जान?
हमले में घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित मच्छार ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाबी हासिल की। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि इसके बाद यात्रियों और क्रू के सदस्यों को कॉकपिट तक पहुंचने का मौका मिला।
कॉकपिट में पहुंचने के बाद कुछ यात्रियों ने हमलावर को काबू करने में मदद की। इस दौरान घायल कैप्टन की सहायता भी की गई। विमान की स्थिति को संभालने के लिए फ्लाइट में मौजूद दो ऑफ-ड्यूटी फ्लाईदुबई पायलट भी आगे आए। इसके बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक की ओर मोड़ा गया और वहां सुरक्षित लैंड कराया गया। इस पूरी घटना को सिर्फ एक व्यक्ति की कार्रवाई के तौर पर देखना सही नहीं होगा। कैप्टन स्मित मच्छार की भूमिका महत्वपूर्ण थी, लेकिन यात्रियों, क्रू और ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने भी संकट के दौरान अपनी-अपनी भूमिका निभाई। इसी सामूहिक प्रयास के बाद विमान को सुरक्षित जमीन पर उतारा जा सका।
PM मोदी ने स्मित मच्छार को क्यों बताया ‘हीरो’?
घटना सामने आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की तारीफ की। प्रधानमंत्री ने उन्हें ‘हीरो’ बताते हुए कहा कि गंभीर खतरे और चोट के बावजूद उन्होंने दूसरों की जान बचाने के लिए असाधारण साहस दिखाया। पीएम मोदी की प्रतिक्रिया के बाद भारत में भी स्मित मच्छार की कहानी तेजी से चर्चा में आई। प्रधानमंत्री ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। मच्छार की बहादुरी को लेकर प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि घटना में वह खुद घायल हुए थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने ऐसी स्थिति में कार्रवाई की, जिससे यात्रियों और क्रू को आगे बढ़कर हालात संभालने का मौका मिला।
नेतन्याहू ने क्यों कहा ‘ट्रू हीरो’?
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की खुलकर तारीफ की। उन्होंने भारतीय पायलट को ‘ट्रू हीरो’ बताया। नेतन्याहू के मुताबिक, गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मच्छार ने हमलावर का विरोध किया और कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाब रहे। इसके बाद यात्रियों और क्रू को कॉकपिट में पहुंचने तथा हमलावर को काबू करने का मौका मिला। नेतन्याहू ने इस घटना का जिक्र करते हुए मच्छार के साहस को सलाम किया और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। फ्लाइट में बड़ी संख्या में इजराइली यात्री होने की वजह से इजराइल में भी इस घटना को लेकर खास चर्चा हुई।
डोनाल्ड ट्रंप ने भी की तारीफ
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी फ्लाइट में हुए घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी और कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की तारीफ की। ट्रंप ने मच्छार को हीरो बताया और इस बात का जिक्र किया कि उन्होंने गंभीर चोट के बावजूद जिस तरह स्थिति का सामना किया, वह उल्लेखनीय था। उन्होंने इस घटना को लेकर इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से हुई बातचीत का भी उल्लेख किया। हालांकि, घटना के पीछे को-पायलट की वास्तविक मंशा क्या थी, इसे लेकर जांच जारी है। इसलिए हमले के मकसद को लेकर सामने आ रहे दावों को जांच पूरी होने से पहले अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता।
यात्रियों ने भी दिखाई हिम्मत
FZ1073 की कहानी में यात्रियों की भूमिका भी बेहद अहम रही। कॉकपिट का दरवाजा खुलने के बाद कुछ यात्रियों ने अंदर पहुंचकर हमलावर को काबू करने में मदद की। इजराइली यात्री यानिव हायुन का नाम भी इस घटनाक्रम में सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने कॉकपिट में पहुंचकर स्थिति संभालने में मदद की। यानी विमान के अंदर मौजूद लोगों के सामने अचानक ऐसा संकट आया, जिसमें उन्हें बिना किसी पूर्व तैयारी के प्रतिक्रिया देनी पड़ी। घायल पायलट की मदद करने से लेकर संदिग्ध को काबू करने तक यात्रियों और क्रू ने स्थिति संभालने में योगदान दिया।
स्पाइसजेट ने भी जताया गर्व
स्मित मच्छार के पूर्व नियोक्ता स्पाइसजेट ने भी उनकी बहादुरी की तारीफ की। मच्छार ने इस एयरलाइन में 11 साल से ज्यादा समय तक काम किया था। स्पाइसजेट में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कमांडर और लाइन ट्रेनिंग कैप्टन जैसी जिम्मेदारियां निभाईं। इसी एयरलाइन में उन्होंने बोइंग 737 विमान उड़ाने का लंबा अनुभव हासिल किया। फ्लाइट FZ1073 की घटना के बाद स्पाइसजेट ने अपने पूर्व कर्मचारी के साहस पर गर्व जताया और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। इससे यह भी सामने आया कि जिस पायलट की चर्चा आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही है, उसने अपने करियर का एक बड़ा हिस्सा भारतीय एयरलाइन में बिताया है।
क्यों दुनिया कर रही है स्मित मच्छार की तारीफ?
स्मित मच्छार की बहादुरी की चर्चा की सबसे बड़ी वजह वह वक्त है, जब वह खुद गंभीर रूप से घायल थे और विमान तेजी से ऊंचाई खो रहा था। ऐसे समय में उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाबी हासिल की। इसके बाद यात्रियों और क्रू के सदस्यों को कॉकपिट में पहुंचने का मौका मिला। हमलावर को काबू करने की कोशिश हुई और विमान को सुरक्षित जगह पर उतारने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके अलावा फ्लाइट में मौजूद दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने भी विमान को सुरक्षित लैंड कराने में मदद की। आखिरकार विमान सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतरा। यही पूरी घटनाक्रम की वह कड़ी है, जिसकी वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत कई प्रमुख लोगों ने स्मित मच्छार की बहादुरी की तारीफ की। हालांकि, इस पूरी घटना में यात्रियों, क्रू और दूसरे पायलटों की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विमान को सुरक्षित उतारने में कई लोगों ने मिलकर योगदान दिया।
स्मित मच्छार की हालत कैसी है?
फ्लाइट की सुरक्षित लैंडिंग के बाद कैप्टन स्मित मच्छार को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। हमले में उन्हें गंभीर चोटें आई थीं और तबुक में उनका इलाज किया गया। बाद में उनकी हालत स्थिर बताई गई। उनकी चोटों को देखते हुए घटना के बाद उनका इलाज और मेडिकल निगरानी की गई। वहीं, हमले में शामिल को-पायलट को सऊदी अधिकारियों ने गिरफ्तार किया। रिपोर्टों के मुताबिक, वह ओमान का नागरिक है। घटना के पीछे उसकी मंशा क्या थी और कॉकपिट में हिंसा की शुरुआत किन परिस्थितियों में हुई, इसे लेकर जांच जारी है। इसलिए घटना के मकसद से जुड़े किसी भी दावे को जांच पूरी होने से पहले अंतिम निष्कर्ष के तौर पर देखना ठीक नहीं होगा।
अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?
फ्लाईदुबई की FZ1073 में हुई घटना ने विमान सुरक्षा और कॉकपिट की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर कॉकपिट के अंदर ऐसी हिंसक स्थिति कैसे बनी? को-पायलट ने कैप्टन पर हमला क्यों किया? विमान ने इतनी तेजी से ऊंचाई क्यों खोई? और इस पूरे घटनाक्रम के पीछे वास्तविक मकसद क्या था? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। फिलहाल जो बात सामने है, वह यह है कि फ्लाइट में सवार लोग सुरक्षित रहे और विमान को सऊदी अरब के तबुक में उतारा गया। इस पूरे घटनाक्रम में कैप्टन स्मित मच्छार, यात्रियों, क्रू और ऑफ-ड्यूटी पायलटों की भूमिका सामने आई है। लेकिन गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोलने में स्मित मच्छार की कामयाबी इस घटना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बनी। यही वजह है कि एक भारतीय पायलट की बहादुरी की चर्चा अब भारत से लेकर इजराइल और अमेरिका तक हो रही है।




