द फ्रंट डेस्क: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष का विरोध अब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं दिख रहा है। पश्चिम बंगाल के श्रीरामपुर में रैली के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीधे कहा कि ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना होगा और जब तक ऐसा नहीं होता, विरोध-प्रदर्शन जारी रहेगा। ममता के इस बयान के साथ ही विपक्षी दलों के बीच इस मुद्दे पर हलचल भी तेज हो गई है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्षी दल ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पर भी चर्चा कर रहे हैं। ममता बनर्जी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और CPI(M) महासचिव एमए बेबी समेत विपक्षी नेताओं से बातचीत की है। अब 30 सितंबर को दिल्ली में INDIA गठबंधन की बैठक प्रस्तावित है, जिसमें चुनाव आयोग, SIR और ज्ञानेश कुमार को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा हो सकती है। ऐसे में सवाल है कि क्या ज्ञानेश कुमार की कुर्सी पर वाकई संकट बढ़ रहा है और विपक्ष का अगला प्लान क्या है?
SIR को लेकर ममता ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए?
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल में SIR की प्रक्रिया के जरिए वैध मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। उनका दावा है कि इससे बीजेपी को राजनीतिक फायदा पहुंच सकता है। ममता ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए विपक्षी दलों से इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की। हालांकि, ये आरोप ममता बनर्जी और अन्य विपक्षी दलों की ओर से लगाए गए हैं। चुनाव आयोग अपने फैसलों को कानूनी और वैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया निर्णय बताता है। इसलिए SIR को लेकर विपक्ष के आरोप और चुनाव आयोग के पक्ष को अलग-अलग समझना जरूरी है। यही SIR विवाद अब ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के अभियान का सबसे बड़ा मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है।
‘इस्तीफा देना होगा…’, ममता ने ज्ञानेश कुमार को लेकर क्या कहा?
श्रीरामपुर की रैली में ममता बनर्जी ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त पद से नहीं हटते, तब तक विरोध जारी रहेगा। ममता का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी समय विपक्षी दल चुनाव आयोग और SIR को लेकर संयुक्त रणनीति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस, CPI(M), CPI और CPI(ML)-Liberation समेत कुछ विपक्षी दलों ने भी चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। यानी मामला अब सिर्फ ममता बनर्जी बनाम चुनाव आयोग तक सीमित नहीं रह गया है। विपक्ष के कई दल इस मुद्दे पर एक साथ दिखाई देने लगे हैं।
30 सितंबर की बैठक में क्या बड़ा फैसला हो सकता है?
ममता बनर्जी ने बताया है कि 30 सितंबर को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में INDIA गठबंधन की बैठक हो सकती है। इस बैठक में चुनाव आयोग और SIR को लेकर विपक्ष की आगे की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। ममता ने राहुल गांधी से बातचीत की है। इसके अलावा उन्होंने CPI(M) महासचिव एमए बेबी से भी संपर्क किया है। इसका संकेत यही है कि विपक्ष इस मुद्दे पर अलग-अलग बयान देने के बजाय साझा रणनीति बनाने की कोशिश कर रहा है। बैठक में SIR, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आगे उठाए जाने वाले कदमों पर चर्चा हो सकती है।
क्या ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की तैयारी हो रही है?
विपक्षी दल ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने की तैयारी पर भी चर्चा कर रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, उनके खिलाफ महाभियोग नोटिस की तैयारी की जा रही है। यहां यह समझना जरूरी है कि महाभियोग की तैयारी का मतलब यह नहीं है कि ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने का फैसला हो चुका है। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया संविधान में तय है और इसके लिए संसद की निर्धारित प्रक्रिया से गुजरना होता है। फिलहाल विपक्षी दलों की कोशिश इस मुद्दे पर संख्या और राजनीतिक समर्थन जुटाने की दिखाई दे रही है। 30 सितंबर की बैठक में इस रणनीति को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है।
विपक्ष में ममता से राहुल तक एकजुटता क्यों दिख रही है?
इस विवाद में सबसे दिलचस्प बात यह है कि पश्चिम बंगाल में एक-दूसरे के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे TMC और वाम दल भी चुनाव आयोग के मुद्दे पर बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं। ममता बनर्जी लगातार विपक्षी दलों से एकजुट होकर लड़ने की अपील कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मुद्दा किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि जनता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा है। राहुल गांधी से बातचीत और INDIA गठबंधन की प्रस्तावित बैठक के बाद विपक्ष के बीच समन्वय बढ़ने के संकेत जरूर मिले हैं। हालांकि, बैठक के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सभी दल ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किस स्तर तक एक साथ आगे बढ़ते हैं।
क्या अब ज्ञानेश कुमार की कुर्सी पर सच में संकट है?
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने का फैसला हो चुका है। लेकिन इतना जरूर है कि उनके खिलाफ विपक्ष का अभियान कई स्तरों पर आगे बढ़ रहा है। सड़क पर विरोध, SIR को लेकर सवाल, इस्तीफे की मांग और संसद में संभावित कार्रवाई की तैयारी। ममता बनर्जी का ‘इस्तीफा देना होगा’ वाला बयान इस अभियान को और राजनीतिक धार देता है। वहीं 30 सितंबर की INDIA गठबंधन की बैठक यह तय करने में अहम हो सकती है कि विपक्ष आगे सिर्फ विरोध करेगा या ज्ञानेश कुमार को हटाने की संसदीय प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाएगा। इसलिए फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि विपक्ष की यह लामबंदी कितनी दूर तक जाती है और क्या संसद में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव वास्तव में आगे बढ़ पाता है।




