द फ्रंट डेस्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से भारत ने दुनिया के सामने अपनी प्राथमिकताएं और चिंताएं साफ तौर पर रखीं। विदेश मंत्री एस। जयशंकर ने अपने संबोधन में यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में जारी तनाव, अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा, आतंकवाद और ग्लोबल साउथ की चुनौतियों जैसे मुद्दों को उठाया। इसके साथ ही उन्होंने भारत की विकास यात्रा और दूसरे देशों के साथ उसकी विकास साझेदारी को भी दुनिया के सामने रखा। जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र के हर सदस्य देश को खुद से यह पूछना चाहिए कि वह शांति, स्थिरता और विकास के लिए क्या योगदान दे सकता है। उनके भाषण में एक तरफ दुनिया में बढ़ते संघर्षों को लेकर चिंता दिखाई दी, तो दूसरी तरफ भारत की ग्रोथ स्टोरी, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक स्तर पर मदद पहुंचाने की भूमिका को भी प्रमुखता मिली। तो आखिर जयशंकर के भाषण में कौन-कौन से बड़े मुद्दे उठे? आतंकवाद पर भारत ने क्या संदेश दिया, यूक्रेन और पश्चिम एशिया को लेकर क्या कहा गया और दुनिया के सामने भारत की विकास कहानी क्यों रखी गई? समझिए पूरे भाषण की बड़ी बातें।
यूक्रेन और पश्चिम एशिया पर भारत ने क्या कहा?
जयशंकर ने दुनिया में जारी संघर्षों को लेकर कहा कि युद्ध और टकराव अब वैश्विक चिंता का बड़ा कारण बन चुके हैं। इसका असर केवल उन देशों पर नहीं पड़ता जहां लड़ाई चल रही है, बल्कि संघर्ष से दूर रहने वाले देशों को भी इसकी आर्थिक और मानवीय कीमत चुकानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि शांति बनाए रखने में विफलता सुरक्षा को कमजोर करने के साथ-साथ विकास और आर्थिक प्रगति को भी प्रभावित करती है। यूक्रेन में जारी संघर्ष का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि भारत शांति स्थापित करने की कोशिशों का समर्थन करता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संदेश का भी उल्लेख किया कि अंतहीन युद्ध की जगह अब युद्ध का अंत होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने भोजन और ऊर्जा की आपूर्ति तथा समुद्री यात्रियों की सुरक्षा को महत्वपूर्ण बताया। पश्चिम एशिया की स्थिति पर जयशंकर ने कहा कि क्षेत्र में तनाव और हिंसा चिंता का विषय है। उन्होंने फिलिस्तीनी लोगों के लिए भारत की मानवीय सहायता का जिक्र करते हुए स्थायी शांति के लिए दो-राष्ट्र समाधान की जरूरत बताई।
अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर हमले की चिंता क्यों बढ़ी?
जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि कमर्शियल जहाजों और नाविकों को निशाना बनाया जाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। किसी समुद्री मार्ग पर संघर्ष या तनाव बढ़ने का असर सिर्फ उस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और सप्लाई चेन पर भी पड़ सकता है। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की। जयशंकर ने कहा कि आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ऊर्जा और व्यापार का निर्बाध प्रवाह बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने खाद की कमी और अनाज की आवाजाही में रुकावट को भी चिंता का विषय बताया। उनके मुताबिक ऐसी परिस्थितियां वैश्विक खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ सतत विकास लक्ष्यों यानी SDGs की प्रगति को भी प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने ग्लोबल साउथ के देशों के सामने बाजार तक पहुंच, तकनीक और संसाधनों से जुड़ी चुनौतियों का भी जिक्र किया।
आतंकवाद पर जयशंकर का कड़ा संदेश, पाकिस्तान का नाम लिए बिना क्या कहा?
आतंकवाद के मुद्दे पर जयशंकर ने भारत का रुख बेहद स्पष्ट शब्दों में रखा। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को बढ़ावा देना और फिर उसके परिणामों से बचने की उम्मीद करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करने की बात कही और कहा कि आतंकवाद को समर्थन देने वाली सरकारों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। विदेश मंत्री ने भारत की जीरो-टॉलरेंस नीति दोहराते हुए आतंकवाद के आर्थिक पहलुओं पर भी कार्रवाई की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के वित्तीय नेटवर्क को उजागर करना और उसका मुकाबला करना जरूरी है। जयशंकर ने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि आतंकवाद को लगातार बढ़ावा देने वाले एक देश ने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया और ऐसे तर्क दिए जिनका कोई आधार नहीं है। उनके इस बयान को पाकिस्तान के संदर्भ में देखा गया।
भारत की ग्रोथ स्टोरी से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तक, क्या बताया?
जयशंकर ने अपने भाषण में भारत की विकास यात्रा को भी दुनिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि भारत का समावेशी विकास और सर्वांगीण प्रगति दुनिया की करीब एक-छठी आबादी के लिए बेहतर भविष्य की उम्मीद पैदा कर रही है। स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, पीने का पानी, बिजली, सड़क और आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं को उन्होंने विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का भी उल्लेख किया और कहा कि यह बेहतर गवर्नेंस के साथ सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। स्टार्टअप, इनोवेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भारत की प्रगति का जिक्र करते हुए जयशंकर ने बताया कि 78 देशों में करीब 600 बड़े भारतीय विकास प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इन परियोजनाओं का दायरा इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और कृषि से लेकर IT और क्षमता निर्माण तक फैला हुआ है।
जलवायु से आपदा राहत तक, दुनिया की मदद में भारत की क्या भूमिका?
जयशंकर ने भारत की वैश्विक भूमिका को केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं बताया। उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा, स्वच्छ पानी, टिकाऊ खेती और जलवायु कार्रवाई से जुड़ी भारत की पहलों का जिक्र किया। इंटरनेशनल सोलर अलायंस, डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए गठबंधन और ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस जैसी पहलों को उन्होंने भारत की अंतरराष्ट्रीय साझेदारी का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि भारत संकट के समय दूसरे देशों की मदद के लिए भी आगे आता रहा है। संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों, महामारी और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भारत ने मेडिकल सप्लाई और दूसरी जरूरी सहायता पहुंचाई है। नेपाल में बाढ़ और वेनेज़ुएला में आए भूकंप का जिक्र करते हुए जयशंकर ने भारत की ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ भूमिका बताई। उन्होंने लिंब फिटमेंट कैंप का भी उल्लेख किया, जिनके जरिए जरूरतमंद लोगों को कृत्रिम अंग उपलब्ध कराने में मदद की गई। भोजन, दवा, ऊर्जा और खाद जैसी जरूरतों के मामले में भी भारत ने वैश्विक सहयोग की अपनी भूमिका को सामने रखा। कुल मिलाकर जयशंकर का भाषण दुनिया में जारी संघर्षों और आतंकवाद पर भारत की चिंताओं के साथ-साथ उसकी विकास यात्रा और वैश्विक साझेदारी को सामने रखने वाला रहा। भारत ने एक तरफ युद्ध और आतंकवाद के खिलाफ अपनी बात रखी, तो दूसरी तरफ विकासशील देशों की चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पर भी जोर दिया।




