पश्चिम बंगाल के श्रीरामपुर में तृणमूल कांग्रेस की प्रस्तावित रैली से पहले राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि उन्हें रैली स्थल तक जाने से रोका जा रहा है और लगभग नजरबंद जैसी स्थिति बना दी गई है। दूसरी ओर, रैली में शामिल होने जा रहे टीएमसी विधायक कुणाल घोष की कार पर अंडे और पत्थर फेंके जाने का दावा किया गया है। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कुछ लोग कार को घेरकर नारे लगाते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में सवाल है कि श्रीरामपुर में आखिर पूरा विवाद क्या है, ममता बनर्जी ने क्या आरोप लगाए और हाई कोर्ट की अनुमति के बाद भी रैली से पहले स्थिति क्यों तनावपूर्ण हो गई?
श्रीरामपुर में आखिर क्या होने वाला है?
तृणमूल कांग्रेस की ओर से 26 सितंबर को श्रीरामपुर कोर्ट मैदान में जनसभा आयोजित की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, रैली शाम 4 बजे से 6 बजे तक प्रस्तावित है। पुलिस से अनुमति को लेकर विवाद के बाद मामला कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचा था, जिसके बाद अदालत ने कुछ शर्तों के साथ सभा आयोजित करने की अनुमति दी। रिपोर्ट के मुताबिक, सभा में अधिकतम 1,000 लोगों की मौजूदगी की शर्त रखी गई है। टीएमसी की ओर से कहा गया कि पार्टी अदालत के निर्देशों का पालन करेगी। पार्टी के हुगली जिला संयोजक और पूर्व विधायक असित मजूमदार ने भी कहा कि बारिश के बावजूद रैली की तैयारियां जारी हैं। ऐसे में कानूनी अनुमति मिलने के बाद अब विवाद का केंद्र रैली आयोजित करने से ज्यादा उससे पहले बने राजनीतिक और सुरक्षा माहौल पर है।
ममता बनर्जी ने क्यों लगाया नजरबंद करने का आरोप?
रैली में जाने से पहले ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि उन्हें घर से बाहर निकलने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि रैली स्थल तक जाने वाले रास्ते पर लोगों को रोक दिया गया है और वहां पर्याप्त पुलिस मौजूद नहीं थी। ममता ने आरोप लगाया कि टीएमसी कार्यकर्ताओं को भी रैली स्थल तक जाने से रोका जा रहा है। ममता बनर्जी ने कहा कि यह सभा अदालत से अनुमति मिलने के बाद आयोजित की जा रही है और इसके लिए टीएमसी ने कानूनी लड़ाई भी लड़ी है। उन्होंने दावा किया कि इसके बावजूद उनके समर्थकों को रास्ते में रोका जा रहा है। बीजेपी पर आरोप लगाते हुए उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को लेकर कड़ी भाषा का इस्तेमाल किया। हालांकि, ये आरोप ममता बनर्जी और टीएमसी की ओर से लगाए गए हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
कुणाल घोष की कार पर क्या हुआ?
इसी विवाद के बीच टीएमसी विधायक और नेता कुणाल घोष की कार पर कथित हमले की खबर सामने आई। टीएमसी की ओर से दावा किया गया कि जब कुणाल घोष श्रीरामपुर में ममता बनर्जी की रैली में शामिल होने जा रहे थे, तभी उनकी कार को कुछ लोगों ने घेर लिया। आरोप है कि कार पर अंडे और पत्थर फेंके गए। कुणाल घोष की ओर से शेयर किए गए वीडियो में कार के अंदर से घटनाक्रम रिकॉर्ड किया गया है। वीडियो में कुछ लोग कार के आसपास दिखाई दे रहे हैं और गो बैक के नारे लगाते हुए नजर आते हैं। टीएमसी के मुताबिक, कार का शीशा भी क्षतिग्रस्त हुआ। घटना को लेकर कुणाल घोष ने पुलिस में शिकायत करने की बात कही है। हालांकि, हमले के पीछे किसकी भूमिका थी, इसे लेकर लगाए गए राजनीतिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
बीजेपी पर क्यों लगाए जा रहे हैं आरोप?
कुणाल घोष की कार पर कथित हमले के बाद टीएमसी नेताओं ने इसके लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराने का आरोप लगाया। ममता बनर्जी ने भी आरोप लगाया कि बीजेपी समर्थित लोगों ने रैली स्थल की ओर जाने वाले रास्ते को रोक दिया है। टीएमसी नेताओं का कहना है कि उनके कार्यकर्ताओं को रास्ते में रोका गया और कुछ लोगों के साथ मारपीट भी हुई। दूसरी तरफ, किसी राजनीतिक दल पर हमले या रास्ता रोकने की जिम्मेदारी तय करने के लिए पुलिस जांच और उपलब्ध सबूत महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल खबरों में सामने आए आरोपों और वीडियो के आधार पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई है। इसलिए इस मामले में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।
हाई कोर्ट की अनुमति के बाद भी विवाद क्यों?
इस पूरे मामले की एक अहम कड़ी कलकत्ता हाई कोर्ट की अनुमति है। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस से अनुमति नहीं मिलने के बाद टीएमसी ने अदालत का रुख किया था। हाई कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ सभा आयोजित करने की अनुमति दी। इनमें सभा में लोगों की संख्या सीमित रखने और पुलिस सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी शर्तें शामिल थीं। यानी अदालत की अनुमति मिलने के बावजूद रैली से पहले रास्ते में कथित रोक-टोक और कुणाल घोष की कार पर हमले की घटना ने नया विवाद खड़ा कर दिया। अब प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि अदालत की तय शर्तों के तहत सभा शांतिपूर्ण तरीके से हो और किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति को रोका जा सके।
अब आगे क्या होगा?
श्रीरामपुर का यह विवाद अब सिर्फ एक राजनीतिक रैली तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ टीएमसी का आरोप है कि उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं को सभा में पहुंचने से रोका गया, वहीं दूसरी तरफ कुणाल घोष की कार पर कथित हमले ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। ममता बनर्जी ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि रैली के दौरान प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था किस तरह संभालता है और कुणाल घोष की कार पर हुए कथित हमले को लेकर क्या कार्रवाई होती है। साथ ही, जिन राजनीतिक आरोपों के आधार पर दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सवाल उठा रहे हैं, उनकी पुष्टि जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल श्रीरामपुर में होने वाली सभा से पहले राजनीतिक माहौल गरम है और सभी की नजर रैली के दौरान होने वाले घटनाक्रम पर बनी हुई है।




