द फ्रंट डेस्क : उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव का कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही बीजेपी में संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। 16 अक्टूबर को होने वाले चुनाव में मौजूदा विधानसभा संख्याबल के आधार पर बीजेपी और उसके सहयोगियों की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, लेकिन उम्मीदवारों के चयन को लेकर पार्टी के भीतर मंथन जारी है। मीडिया रिपोर्टों में स्मृति ईरानी, हरिश द्विवेदी, बीएल वर्मा, हरदीप सिंह पुरी, बृजलाल, सीमा द्विवेदी, गीता शाक्य, नीरज शेखर और अरुण सिंह जैसे नामों की चर्चा है। हालांकि, इनमें से किसी नाम को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। अंतिम तस्वीर पार्टी की सूची जारी होने के बाद ही साफ होगी।
पहले समझिए- यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव क्यों हो रहा है?
उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव होने जा रहा है। इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल नवंबर 2026 में पूरा हो रहा है। निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक, 29 सितंबर को चुनाव की अधिसूचना जारी होगी और 16 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा। इसी दिन मतगणना भी होगी। इन 10 सीटों में बीजेपी के आठ सदस्यों, समाजवादी पार्टी के एक सदस्य और बहुजन समाज पार्टी के एक सदस्य का कार्यकाल पूरा हो रहा है। बीजेपी से अरुण सिंह, गीता शाक्य, नीरज शेखर, बृजलाल, बीएल वर्मा, सीमा द्विवेदी, दिनेश शर्मा और हरदीप सिंह पुरी की सीटें शामिल हैं। दिनेश शर्मा के अंडमान और निकोबार के उपराज्यपाल बनाए जाने के बाद उनकी राज्यसभा सीट पहले ही रिक्त हो चुकी है। यानी इस चुनाव में बीजेपी के सामने सिर्फ खाली होने वाली सीटों को भरने का सवाल नहीं है, बल्कि यह भी तय करना है कि मौजूदा सांसदों में से किन चेहरों को दोबारा मौका दिया जाए और किन सीटों पर नए नेताओं को संसद भेजा जाए।
बीजेपी के सामने कितनी सीटों का गणित है?
राज्यसभा चुनाव सीधे जनता के वोट से नहीं होता। राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित विधायक राज्यसभा सदस्यों का चुनाव करते हैं। इसलिए किसी पार्टी के पास विधानसभा में जितना संख्याबल होता है, उसी के आधार पर उसकी राज्यसभा सीटों की स्थिति तय होती है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है। उसके साथ अपना दल (सोनेलाल), आरएलडी, निषाद पार्टी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी समेत सहयोगी दल भी हैं। मौजूदा विधानसभा संख्याबल के आधार पर बीजेपी गठबंधन के खाते में अधिक सीटें जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अंतिम चुनावी गणित उम्मीदवारों की संख्या और मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों पर भी निर्भर करेगा। अगर 10 सीटों के लिए 10 से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में आते हैं तो चुनाव की प्रक्रिया और दिलचस्प हो सकती है। इसलिए अभी सीटों की संभावित संख्या को अंतिम नतीजे के तौर पर देखना सही नहीं होगा।
स्मृति ईरानी से हरिश द्विवेदी तक, किन नामों की चर्चा?
संभावित उम्मीदवारों को लेकर बीजेपी के भीतर कई नामों पर चर्चा की खबरें सामने आ रही हैं। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का नाम भी शामिल है। स्मृति ईरानी अमेठी से लोकसभा सांसद रह चुकी हैं और बीजेपी संगठन में राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी संभाल रही हैं। यूपी से उन्हें राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा है, लेकिन इसे लेकर पार्टी की ओर से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसके अलावा हरिश द्विवेदी का नाम भी संभावित चेहरों में बताया जा रहा है। वह बीजेपी संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं और यूपी की राजनीति में पार्टी के प्रमुख ब्राह्मण चेहरों में शामिल रहे हैं। संगठन में उनकी सक्रियता को देखते हुए उनके नाम पर भी चर्चा होने की खबर है। वहीं बीएल वर्मा और हरदीप सिंह पुरी के नाम भी संभावित सूची में बताए जा रहे हैं। दोनों केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं और मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल पूरा होने वाले सदस्यों में शामिल हैं। ऐसे में पार्टी इन दोनों को दोबारा मौका देती है या नए चेहरों को आगे करती है, इस पर भी नजर रहेगी।
बृजलाल, सीमा द्विवेदी और गीता शाक्य के नाम भी चर्चा में
संभावित नामों की सूची में बृजलाल का नाम भी शामिल है। उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी रहे बृजलाल राज्यसभा सांसद के तौर पर भी काम कर चुके हैं। बीजेपी में उन्हें दलित समाज से आने वाले प्रमुख नेताओं में गिना जाता है। ऐसे में सामाजिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से उनका नाम भी चर्चा में है। सीमा द्विवेदी भी बीजेपी के संभावित चेहरों में बताई जा रही हैं। वह उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं और जौनपुर क्षेत्र से विधायक रह चुकी हैं। इसी तरह गीता शाक्य बीजेपी संगठन में पिछड़ा वर्ग से जुड़ी जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं। वह भी मौजूदा राज्यसभा सांसदों में शामिल हैं, जिनका कार्यकाल पूरा हो रहा है। इन नेताओं को दोबारा राज्यसभा भेजा जाएगा या पार्टी नए चेहरों को मौका देगी, यह अभी तय नहीं है। पार्टी के अंतिम फैसले में संगठनात्मक जिम्मेदारी, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और राजनीतिक समीकरण जैसे पहलुओं पर चर्चा हो सकती है।
नीरज शेखर और अरुण सिंह पर भी नजर
संभावित नामों की चर्चा में नीरज शेखर और अरुण सिंह भी शामिल हैं। नीरज शेखर पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे हैं और बीजेपी के राज्यसभा सांसद के तौर पर कार्य कर चुके हैं। उनका मौजूदा कार्यकाल भी पूरा होने जा रहा है। ऐसे में उनके नाम पर भी पार्टी के फैसले का इंतजार रहेगा। वहीं अरुण सिंह बीजेपी के संगठन में लंबे समय तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं और राज्यसभा सांसद भी रहे हैं। उनका कार्यकाल भी खत्म होने वाला है। ऐसे में पार्टी के सामने यह फैसला होगा कि उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजा जाए या किसी दूसरे संगठनात्मक चेहरे को मौका दिया जाए। यही वजह है कि बीजेपी के भीतर पुराने और नए चेहरों को लेकर चर्चा चल रही है। पार्टी के लिए यह चुनाव संसद में प्रतिनिधित्व के साथ-साथ संगठन में सक्रिय नेताओं को राजनीतिक जिम्मेदारी देने का भी अवसर हो सकता है।
पुराने चेहरे या नए नाम, BJP के सामने क्या है चुनौती?
राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में केवल जीतने की संभावना ही मुद्दा नहीं होती, बल्कि पार्टी के राजनीतिक और संगठनात्मक समीकरण भी महत्वपूर्ण होते हैं। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य से आने वाली राज्यसभा सीटों पर उम्मीदवार तय करते समय क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और अलग-अलग सामाजिक समूहों के प्रतिनिधित्व पर भी विचार किया जा सकता है। बीजेपी के कई मौजूदा राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल एक साथ पूरा हो रहा है। ऐसे में पार्टी के सामने एक विकल्प अनुभवी नेताओं को दोबारा मौका देने का है, जबकि दूसरा विकल्प संगठन में सक्रिय नेताओं या नए चेहरों को संसद भेजने का हो सकता है। इसी वजह से स्मृति ईरानी, हरिश द्विवेदी समेत कई नामों को लेकर अटकलें चल रही हैं। हालांकि, किसी भी नाम को पार्टी का तय उम्मीदवार मानना अभी जल्दबाजी होगी। अंतिम फैसला बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा और आधिकारिक सूची जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किसे मौका मिला।
फिलहाल यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव को लेकर बीजेपी में संभावित उम्मीदवारों पर चर्चा तेज है। स्मृति ईरानी, हरिश द्विवेदी, बीएल वर्मा, हरदीप सिंह पुरी, बृजलाल, सीमा द्विवेदी, गीता शाक्य, नीरज शेखर और अरुण सिंह समेत कई नाम चर्चा में हैं। लेकिन अंतिम उम्मीदवार कौन होंगे, इसका फैसला पार्टी की आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होगा।




