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मुंबई, 4 मार्च 2021

मुंबई की मशहूर कराची बेकरी ने हमेशा के लिए अपना शटर गिरा लिया है। पिछले दिनों बांद्रा की यह प्रतिष्ठित दुकान अपने नाम की वजह से विवादों में आ गई थी। लेकिन, अब इसने कहा है कि दुकान बंद करने का उस विवाद से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि कारोबार ठीक से नहीं चलने के चलते ऐसा किया जा रहा है। पाकिस्तानी शहर कराची के नाम पर होने के चलते मनसे की ओर से इसपर विवाद खड़ा किया गया था। यह बेकरी एक सिंधी ने स्थापित की थी, जो 1947 में देश के विभाजन के वक्त पाकिस्तान से जान बचाकर भारत आ गए थे।

बिजनेस घटने के चलते मशहूर कराची बेकरी बंद

पिछले साल नवंबर में कराची बेकरी का नाम तब देशभर में सुर्खियों में आया था, जब राज ठाकरे की पार्टी मनसे के उपाध्यक्ष हाजी सैफ शेख ने इसके नाम के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया था और उसके मालिक से इसका नाम बदलने को कहा था। उन्हें लगता था कि यह नाम ‘देश-विरोधी’ और ‘देशभक्ति की भावना के खिलाफ’ है। लेकिन, टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक कराची बेकरी के मैनेजर रामेश्वर वाघमारे ने कहा है कि दुकान एमएनएस कार्यकर्ताओं की धमकी की वजह से नहीं, बल्कि कारोबार घटने और ज्यादा किराए की वजह से बंद कर दी गई है। उन्होंने कहा, ‘हमने पुराना लीज एग्रीमेंट खत्म हो जाने के बाद दुकान बंद कर दिया है। हमारे मकान मालिक ज्यादा किराया मांग रहे थे, जिसे दे पाना हमारे लिए मुमकिन नहीं था।……….कोविड-19 लॉकडाउन के चलते पहले ही कारोबार ठप हो गया था। हमने पहले कुछ महीने के लिए बंद किया, लेकिन आखिरकार पूरी तरह से बंद करने का फैसला कर लिया। ‘

मनसे का दावा-हमने बंद करवाया

लेकिन, एमएनएस नेता शेख इसका क्रेडिट लेने की कोशिश में लगे हैं। बुधवार को उन्होंने ट्विटर पर लिखा- ‘कराची नाम के चलते कराची बेकरी पर एमएनएस के उपाध्यक्ष की अगुवाई में हुए भारी विरोध प्रदर्शन के चलते मुंबई की एकमात्र कराची बेकरी दुकान आखिरकार बंद हो गई है।’ क्या मुंबई में कोई नई दुकान खुलेगी या इस ब्रांड को खत्म हो जाने दिया जाएगा, इसपर इसके मैनेजर ने कहा कि इसका फैसला इसके मालिक ही करेंगे। उन्होंने कहा- ‘नाम बदले जाने का कोई कारण नहीं था। बेकरी का कारोबार सभी तरह के लाइसेंस के साथ पूरी तरह से कानूनी था और सरकारी एजेंसियों से उसकी मंजूरी मिली हुई थी। हमारा फैसला बिजनेस के मद्देनजर लिया गया है। अगर कोई इसकी क्रेडिट लेना चाहते हैं तो उन्हें लेने दीजिए।’