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यूपी: गैंगस्टर रवि काना की रिहाई पर बड़ा एक्शन, बांदा जेल अधीक्षक विक्रम सिंह यादव निलंबित, पूरा मामला

यूपी: गैंगस्टर रवि काना की रिहाई पर बड़ा एक्शन, बांदा जेल अधीक्षक विक्रम सिंह यादव निलंबित, पूरा मामला

उत्तर प्रदेश के बांदा में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब गौतमबुद्ध नगर का कुख्यात स्क्रैप माफिया रविंद्र नागर उर्फ रवि काना बिना जमानत और बिना बरी हुए जेल से बाहर आ गया। शनिवार देर रात गैंगस्टर रवि काना की रिहाई की खबर सामने आते ही सवाल उठने लगे कि आखिर कानूनी आधार क्या था, जिस पर उसे जेल से छोड़ा गया।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि न तो किसी अदालत ने उसे जमानत दी थी और न ही वह किसी केस में बरी हुआ था। सोशल मीडिया पर जब यह मुद्दा जोर पकड़ने लगा, तो प्रदेश सरकार को तत्काल हस्तक्षेप करना पड़ा।


सरकार का त्वरित एक्शन, जेलर सस्पेंड

मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने बांदा जेल के जेलर केपी यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इसके साथ ही जेल अधीक्षक विक्रम सिंह यादव के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।

रवि काना के खिलाफ नोएडा के सेक्टर-63 थाने में कई संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। साल 2024 में नोएडा पुलिस ने उसे विदेश से गिरफ्तार कर पहले नोएडा जेल भेजा था, बाद में उसे बांदा जेल स्थानांतरित किया गया।


बी-वारंट के बावजूद कैसे हुई रिहाई?

जानकारी के मुताबिक, 29 जनवरी 2026 को गौतमबुद्ध नगर CJM कोर्ट ने रवि काना के खिलाफ बी-वारंट जारी किया था। आदेश के अनुसार उसे नोएडा की अदालत में पेश किया जाना था।

जेल प्रशासन का दावा है कि कोर्ट के आदेश पर गैंगस्टर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया। लेकिन इसी सुनवाई के कुछ समय बाद, शाम करीब 6:39 बजे, रवि काना को बांदा जेल से रिहा कर दिया गया।

इसके बाद बड़ा खुलासा यह हुआ कि कोर्ट का वारंट जेल प्रशासन को लगभग 7:45 बजे प्राप्त हुआ, यानी रिहाई के बाद।


कोर्ट का सख्त रुख, मांगा स्पष्टीकरण

इस गंभीर अनियमितता को लेकर सीजेएम संजीव कुमार त्रिपाठी ने कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने जेल अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा—

“जब आरोपी दूसरे मामले में जेल में बंद था, तो बिना किसी वैध आदेश के उसे किस आधार पर और किन परिस्थितियों में रिहा किया गया?”

कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि आरोपी को हिरासत से फरार मानकर FIR क्यों न दर्ज की जाए।


फिलहाल फरार है गैंगस्टर

रिहाई के बाद से गैंगस्टर रवि काना फरार बताया जा रहा है। अदालत के निर्देश के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस उसकी तलाश में जुट गई है। इस बीच कारागार विभाग के महानिदेशक पीसी मीणा ने पूरे मामले की जांच डीआईजी जेल प्रयागराज को सौंप दी है।

प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर जेलर केपी यादव को सस्पेंड किया गया, जबकि जेल अधीक्षक विक्रम सिंह यादव के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।


रिहाई की खबर से मचा प्रशासनिक हड़कंप

गैंगस्टर एक्ट में निरुद्ध रवि काना की रिहाई की खबर सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। CJM कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।


बिना जमानत और बिना बरी हुए गैंगस्टर की रिहाई ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ सरकार ने त्वरित कार्रवाई की है, वहीं दूसरी ओर कोर्ट ने भी कड़ा रुख अपनाया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में यह रिहाई प्रशासनिक गलती साबित होती है या जानबूझकर की गई गंभीर चूक।

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