पटना। बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान भले ही न हुआ हो, लेकिन राज्य की सियासत में गर्मी अपने चरम पर पहुंच चुकी है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अभी से कमर कस ली है और एक खास रणनीति के तहत दिग्गज नेताओं को मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है। पार्टी सूत्रों की मानें तो इस बार चुनावी शतरंज में पुराने सूरमाओं पर दांव खेला जाएगा और साथ ही एनडीए के भीतर सीट शेयरिंग को लेकर भी जोरदार मंथन शुरू हो चुका है।
दिल्ली में हाल ही में हुई बिहार बीजेपी कोर ग्रुप की बैठक में तय हुआ कि कई केंद्रीय राजनीति के दिग्गजों को विधानसभा चुनाव में उतारा जाएगा। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव, अश्विनी चौबे, शाहनवाज हुसैन और आरके सिंह जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इसके अलावा पूर्व सांसद ओमप्रकाश यादव और राकेश सिन्हा को भी विधानसभा चुनाव लड़ाने की तैयारी है। पार्टी को उम्मीद है कि इन चेहरों से मतदाताओं को न केवल आकर्षित किया जा सकेगा बल्कि जमीनी संगठन को भी मज़बूती मिलेगी।
वरिष्ठ नेताओं को विधानसभा चुनाव में उतारने की तैयारी
पार्टी रणनीतिक रूप से यह कदम उठा रही है ताकि स्थानीय चुनावों में भी राष्ट्रीय स्तर के प्रभावशाली चेहरे प्रभाव डाल सकें। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इन नेताओं को अपने संभावित विधानसभा क्षेत्र चुनने और वहां से तैयारी शुरू करने का निर्देश दे दिया है। इससे साफ है कि बीजेपी इस बार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।
सीट शेयरिंग पर NDA में हलचल
बीजेपी के साथ-साथ एनडीए के अन्य घटक दल भी एक्टिव मोड में हैं। सीट बंटवारे को लेकर बीजेपी और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के बीच लगभग दो दर्जन सीटों की अदला-बदली की चर्चा है। यह भी बताया जा रहा है कि बीजेपी कुछ मौजूदा विधायकों के टिकट काट सकती है और वो सीटें जेडीयू व लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को दी जा सकती हैं।
सूत्रों की मानें तो जेडीयू 105 सीटों की मांग पर अड़ा है, जबकि बीजेपी 100 सीटों पर लड़ने को तैयार है। इसके अलावा उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को 7, जीतन राम मांझी की हिंदुस्तान आवामी मोर्चा (सेकुलर) को 8, और चिराग पासवान की पार्टी को 22-23 सीटें दी जा सकती हैं।
घोषणा जल्द, विपक्ष भी सतर्क
बीजेपी से जुड़े नेताओं का कहना है कि जल्द ही सीट शेयरिंग और उम्मीदवारों की घोषणा कर दी जाएगी। इससे पहले यह भी तय किया गया है कि कई हार चुके सांसदों को भी इस बार मौका दिया जाएगा। इससे पार्टी को उम्मीद है कि वह नए समीकरण बना सकेगी।
हालांकि अभी तक विपक्ष की ओर से पूरी रणनीति सामने नहीं आई है, लेकिन एनडीए में चल रही हलचल ने विपक्षी खेमे में भी हलचल बढ़ा दी है। महागठबंधन भी रणनीति पर मंथन कर रहा है और उम्मीद की जा रही है कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, वहां से भी तीखे और आक्रामक दांव देखने को मिलेंगे।
बिहार की राजनीति एक बार फिर चुनावी मोड में है। बीजेपी की यह रणनीति कि वह अपने राष्ट्रीय स्तर के नेताओं को भी स्थानीय चुनाव में उतारे, ना केवल पार्टी की आक्रामकता को दर्शाती है बल्कि यह भी संकेत देती है कि इस बार का चुनाव बेहद दिलचस्प और टक्कर वाला होने वाला है।




