न्याय-पथ’ का संकल्प: संविधान, समानता और संघर्ष की राह पर कांग्रेस

अहमदाबाद में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में ‘न्याय-पथ’ प्रस्ताव पारित किया गया। यह प्रस्ताव न केवल देश के मौजूदा सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हालात पर कांग्रेस का नजरिया प्रस्तुत करता है, बल्कि भाजपा सरकार की नीतियों और कार्यशैली पर तीखा हमला भी करता है। प्रस्ताव में कांग्रेस ने न्याय, समानता और संविधान की रक्षा को अपने राजनीतिक संघर्ष का मूल आधार बताया है।

‘न्याय-पथ’ प्रस्ताव की शुरुआत महात्मा गांधी और सरदार पटेल के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए होती है। सरदार पटेल के कथन—“जब जनता एकजुट होती है, तो सबसे क्रूर शासन भी टिक नहीं पाता”—को उद्धृत करते हुए कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर महंगाई, बेरोजगारी, आर्थिक असमानता और संविधान विरोधी रवैये के लिए तीखा प्रहार किया।

प्रस्ताव में कांग्रेस ने अपने राष्ट्रवाद को जोड़ने वाला और भाजपा-आरएसएस के राष्ट्रवाद को तोड़ने वाला बताया। कांग्रेस ने दावा किया कि उसका राष्ट्रवाद भारत की विविधता को एकता में पिरोता है, जबकि भाजपा का राष्ट्रवाद इस विविधता को खत्म करना चाहता है।

कांग्रेस ने खुद को लोकतंत्र की प्रहरी और संविधान की रक्षक बताया। बाबा साहेब अंबेडकर का हवाला देते हुए कांग्रेस ने कहा कि भाजपा और उसके सहयोगी संगठनों ने हमेशा संविधान को कमजोर करने की कोशिश की है। 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा के ‘400 पार’ नारे को संविधान परिवर्तन की मंशा का प्रतीक बताया गया।

सामाजिक न्याय के मुद्दे पर कांग्रेस ने 1951 से अब तक किए गए अपने प्रयासों को रेखांकित किया और एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षण की कृत्रिम 50% सीमा हटाने का वादा किया। जातिगत जनगणना को जरूरी बताया और मोदी सरकार पर 2011 की सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना के आंकड़े दबाने का आरोप लगाया।

मजदूरों और किसानों के मुद्दे पर कांग्रेस ने भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया। उसने मनरेगा और श्रमिक कानूनों को कमजोर करने की निंदा की और किसानों को एमएसपी का कानूनी अधिकार देने का संकल्प लिया। कांग्रेस ने तीन कृषि कानूनों को ‘काले’ और ‘क्रूर’ बताते हुए अपने किसान समर्थक इतिहास को दोहराया।

विदेश नीति पर कांग्रेस ने भाजपा सरकार को ‘विवश नीति’ का पालन करने वाला बताया। चीन द्वारा भारतीय जमीन पर कब्जे से लेकर अमेरिका के टैरिफ हमलों तक, कांग्रेस ने सरकार की कूटनीतिक असफलताओं को उजागर किया।

धर्मनिरपेक्षता, महिला सशक्तिकरण और शिक्षा जैसे मुद्दों पर भी कांग्रेस ने स्पष्ट रुख लिया। उसने वादा किया कि वह वक्फ बोर्ड संशोधन और धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों के खिलाफ खड़ी रहेगी। महिला आरक्षण को जल्द लागू करने की मांग दोहराई और शिक्षा व्यवस्था की स्वायत्तता बहाल करने का संकल्प लिया।

अंत में, प्रस्ताव में संगठन को मजबूत करने और संघर्ष के लिए तैयार रहने की घोषणा की गई। कांग्रेस ने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे ‘न्याय के संकल्प’ को पूरा करने के लिए एकजुट होकर संघर्ष करें।

‘न्याय-पथ’ कांग्रेस के वैचारिक आधार, ऐतिहासिक भूमिका और वर्तमान चुनौतियों के खिलाफ उसके संघर्ष का घोषणापत्र बनकर उभरा है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि 2025 संगठन सशक्तिकरण का वर्ष होगा, और वह न्याय के रास्ते पर चलकर देश को एक नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

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