Online bahis kullanıcılarının %54’ü haftada en az bir kez canlı bahis oynamaktadır; bu oran bahsegel giriş platformunda %63’tür.

Engellemelerden etkilenmemek için bettilt sık sık kontrol ediliyor.

Bahsegel güncel giriş bahsegel bettilt

OECD raporları, kullanıcıların %52’sinin “kayıp limiti” belirleyen platformları tercih ettiğini göstermektedir; paribahis bu özelliği destekler.

bahsegel giriş bettilt bahsegel bahsegel giriş bahsegel bahsegel giriş bahsegel

कौन कराता है बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव, क्या चुनाव आयोग की होती है कोई भूमिका?

कौन कराता है बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव, क्या चुनाव आयोग की होती है कोई भूमिका?

भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को लेकर नोटिफिकेशन जारी कर दी है। तय कार्यक्रम के अनुसार 19 जनवरी को नामांकन की प्रक्रिया होगी, जबकि 20 जनवरी को नए अध्यक्ष के नाम की आधिकारिक घोषणा की जाएगी। इसी दिन नए अध्यक्ष पार्टी मुख्यालय में औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण करेंगे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा, राजनाथ सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि बीजेपी में राष्ट्रीय अध्यक्ष कैसे चुना जाता है।

क्या चुनाव आयोग की इसमें कोई भूमिका होती है?

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया पूरी तरह पार्टी के आंतरिक संविधान के तहत होती है। इसमें भारत का चुनाव आयोग की कोई सीधी भूमिका नहीं होती। यह एक संगठनात्मक चुनाव है, जिसे पार्टी स्वयं कराती है। चुनाव आयोग आम चुनावों और संवैधानिक पदों से जुड़े मामलों तक सीमित रहता है; दलों के अंदरूनी चुनाव उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आते।

कौन बन सकता है बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष?

पार्टी संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के लिए व्यक्ति का:

  • कम से कम 15 वर्ष तक पार्टी का प्राथमिक सदस्य होना अनिवार्य है,

  • चार कार्यकाल तक सक्रिय सदस्य रहना आवश्यक है।

सक्रिय सदस्य वही माना जाता है जो न्यूनतम तीन साल से संगठनात्मक गतिविधियों में लगातार शामिल रहा हो। कुछ परिस्थितियों में अपवाद देखे गए हैं, लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्तर पर नियम सामान्यतः काफी सख्त माने जाते हैं।

नीचे से ऊपर तक होती है चुनाव की प्रक्रिया

बीजेपी में संगठनात्मक चुनाव सबसे निचले स्तर से शुरू होते हैं। पहले प्राथमिक समितियों का गठन और चुनाव होता है, फिर मंडल, जिला और प्रदेश स्तर पर संगठन तैयार किया जाता है।
प्रदेश स्तर पर बना निर्वाचन मंडल प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव करता है। इस मंडल में उस राज्य की विधानसभा सीटों के बराबर सदस्य होते हैं, साथ ही महिलाओं और आरक्षित वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाता है।

राष्ट्रीय परिषद क्या होती है?

प्रदेश अध्यक्षों के चुनाव के साथ ही राष्ट्रीय परिषद का गठन होता है। राष्ट्रीय परिषद ही बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव करती है।
इसमें देश की लोकसभा सीटों के बराबर सदस्य शामिल होते हैं। यदि किसी स्तर पर महिला या आरक्षित वर्ग का प्रतिनिधित्व कम पड़ता है, तो समायोजन किया जाता है। कम से कम 50% राज्यों में संगठनात्मक चुनाव पूरे होने के बाद ही राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होती है।

नामांकन से लेकर सहमति तक की प्रक्रिया

राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के उम्मीदवार के नाम का प्रस्ताव कम से कम पांच राज्यों की राष्ट्रीय परिषद इकाइयों से आना जरूरी होता है। इसके साथ उम्मीदवार की लिखित सहमति भी ली जाती है। परंपरागत रूप से बीजेपी में सर्वसम्मति बनाने की कोशिश होती है, ताकि चुनाव निर्विरोध और औपचारिक रहे।

आरएसएस की भूमिका कितनी होती है?

बीजेपी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वैचारिक राजनीतिक इकाई माना जाता है। हालांकि पार्टी के संविधान में आरएसएस की औपचारिक भूमिका का उल्लेख नहीं है, लेकिन व्यवहार में संघ की राय को काफी अहम माना जाता है।
प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक बड़े फैसलों में बीजेपी नेतृत्व और आरएसएस के बीच विचार-विमर्श होता है। पार्टी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री परंपरागत रूप से आरएसएस से ही आते हैं, जिससे दोनों संगठनों के बीच समन्वय बना रहता है।

Share post:

Popular

More like this
Related

योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला: उत्तर प्रदेश बनेगा ‘ग्लोबल मैनपावर हब’

सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र विकास...

प्रेमानंद महाराज के आश्रम पर सवाल: एक बेटे की मौत, दूसरा कहां है?

Premanand Maharaj Ashram Controversy: वृंदावन स्थित प्रेमानंद महाराज के...

ममता बनर्जी ने भी किया CJP का समर्थन, अभिजीत दिपके के साथ कौन-कौन से दल?

CJP Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे...