पंजाब सरकार ने 13 महीने से आंदोलन कर रहे किसानों को बॉर्डर से जबरन हटाया, जानिए कहां से शुरु और कहां तक चली ये लड़ाई

पंजाब सरकार ने 13 महीने से शंभू और खनौनी बॉर्डर पर धरना दे रहे किसानों को हटा दिया है। इस कार्रवाई को लेकर दिल्ली विधानसभा में नेता विपक्ष आतिशी का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी हमेशा किसानों के साथ खड़ी रही है, लेकिन पंजाब की अर्थव्यवस्था और जनता की परेशानियों को देखते हुए बॉर्डर को खोलना जरूरी था।

क्यों हटाए गए किसान?
पंजाब पुलिस ने बुधवार देर रात शंभू और खनौनी बॉर्डर से प्रदर्शनकारी किसानों को हटा दिया। इस दौरान किसान नेता सरवन सिंह पंधेर और जगजीत सिंह डल्लेवाल समेत करीब 200 किसानों को हिरासत में लिया गया। किसान मजदूर मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के नेतृत्व में किसान 13 फरवरी 2023 से बॉर्डर पर डेरा डाले हुए थे। वे एमएसपी की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी और अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।

आतिशी ने कहा कि किसान लंबे समय से बॉर्डर पर बैठे हुए थे, जिससे पंजाब की अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा था। हाईवे बंद होने से व्यापार और नौकरियों पर असर पड़ रहा था। पंजाब सरकार ने नशे के खिलाफ मुहिम छेड़ी हुई है और अगर रोजगार के रास्ते बंद होंगे, तो युवा नशे की ओर बढ़ेंगे। इसी कारण सरकार ने यह कदम उठाया।

किसान संगठनों का सरकार पर आरोप
किसान मजदूर मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) ने पंजाब सरकार पर केंद्र सरकार के साथ मिलकर आंदोलन को खत्म करने का आरोप लगाया है। किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के नेता सतनाम सिंह पन्नू ने कहा कि हम इस कार्रवाई की निंदा करते हैं और इसका जवाब दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि भगवंत मान सरकार और मोदी सरकार को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। किसान संगठनों ने ऐलान किया है कि वे हरियाणा और पंजाब में डिप्टी कमिश्नरों के दफ्तरों के बाहर धरना-प्रदर्शन करेंगे।

किसानों की अगली रणनीति
इस कार्रवाई के बाद किसान संगठनों में भारी रोष है। उन्होंने ऐलान किया है कि वे अपनी मांगों को लेकर अब और आक्रामक तरीके से आंदोलन करेंगे। पंजाब और हरियाणा में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।

अब देखने वाली बात होगी कि सरकार और किसान संगठनों के बीच क्या समाधान निकलता है और आने वाले दिनों में आंदोलन की दिशा क्या होगी।

लेकिन लड़ाई जारी
पंजाब सरकार ने 13 महीने से शंभू और खनौनी बॉर्डर पर डेरा डाले किसानों को हटा दिया है, लेकिन उनकी लड़ाई अभी भी खत्म नहीं हुई है। किसान अभी भी अमृतसर-दिल्ली हाईवे पर टोल प्लाजा बंद करके विरोध जता रहे हैं। सरकार और किसान नेताओं के बीच अब तक सात दौर की बातचीत हो चुकी है, और अगली वार्ता 4 मई को होगी।

कहां से कहां तक चली यह लड़ाई?
किसान एमएसपी की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी, पेंशन और अन्य मांगों को लेकर 13 फरवरी 2023 से शंभू बॉर्डर पर धरना दे रहे थे। सरकार ने हाईवे पर हो रहे व्यवधान को देखते हुए कार्रवाई की और किसानों के टेंट हटा दिए। बैरिकेड्स भी हटाए जा रहे हैं, ताकि बॉर्डर को आम जनता के लिए खोला जा सके। इस दौरान किसान नेता सरवन सिंह पंधेर और जगजीत सिंह डल्लेवाल समेत करीब 200 किसानों को हिरासत में लिया गया है।

हालांकि, किसान अब शंभू बॉर्डर से हटने के बाद अमृतसर-दिल्ली हाईवे पर टोल प्लाजा बंद करके विरोध कर रहे हैं। वे तब तक धरना जारी रखने की बात कह रहे हैं जब तक उनके नेताओं को रिहा नहीं किया जाता। वहीं, पंजाब सरकार का कहना है कि किसानों की मांगें केंद्र सरकार से जुड़ी हैं, इसलिए उन्हें दिल्ली में प्रदर्शन करना चाहिए, न कि पंजाब की सड़कों को जाम करना चाहिए।

कैसे शुरू हुई लड़ाई?
संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के नेतृत्व में किसान पिछले साल 13 फरवरी से पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू (शंभू-अंबाला) और खनौरी (संगरूर-जींद) सीमा पर डेरा डाले हुए थे। वे दिल्ली कूच करना चाहते थे, लेकिन सुरक्षा कारणों से उन्हें दिल्ली में प्रवेश नहीं दिया गया। इसके बाद किसान वहीं धरने पर बैठ गए।

किसानों की प्रमुख मांगें थीं:

एमएसपी की कानूनी गारंटी
कर्ज माफी
किसानों और कृषि मजदूरों के लिए पेंशन
बिजली दरों में बढ़ोतरी रोकना
किसानों के खिलाफ पुलिस मामलों को वापस लेना
लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों को न्याय
भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 को बहाल करना
2020-21 के किसान आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा

2020 से दोबारा आंदोलन तक का सफर
इससे पहले, 2020 में किसान दिल्ली के विभिन्न बॉर्डर्स पर कृषि कानूनों के खिलाफ धरने पर बैठे थे। सरकार को झुकना पड़ा और तीनों कृषि कानून वापस लेने पड़े। किसानों ने प्रदर्शन तब खत्म किया था जब सरकार ने उनकी अन्य मांगों पर भी विचार करने की सहमति जताई थी।

हालांकि, किसानों का कहना है कि सरकार ने 2020-21 के आंदोलन के दौरान किए गए वादों को पूरा नहीं किया। इसलिए वे फिर से बॉर्डर पर लौट आए। वे चाहते हैं कि सरकार नकली बीज, कीटनाशक और खाद बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई करे, ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत कार्य दिवसों की संख्या 200 की जाए, और भारत विश्व व्यापार संगठन (WTO) से हटे।

क्या होगा आगे?
सरकार और किसानों के बीच अगली वार्ता 4 मई को होगी। किसान संगठनों ने पंजाब और हरियाणा में बड़े प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। अब देखना होगा कि सरकार किसानों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और यह आंदोलन किस दिशा में जाता है।

Share post:

Popular

More like this
Related