दिल्ली में 3 मंदिरों पर रात में चला बुलडोजर एक्शन, रातभर ड्रामे के बाद भी सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत

दिल्ली में 3 मंदिरों पर रात में चला बुलडोजर एक्शन, रातभर ड्रामे के बाद भी सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के मयूर विहार-2 स्थित संजय झील पार्क में बने कालीबाड़ी मंदिर, अमरनाथ मंदिर और बदरीनाथ मंदिर को गिराने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने नोटिस जारी किया था। बुधवार रात अचानक हुई इस कार्रवाई को लेकर भारी बवाल मच गया। स्थानीय लोगों के जबरदस्त विरोध और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के हस्तक्षेप के बाद बुलडोजर एक्शन फिलहाल अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया।

रात में क्यों पहुंचे बुलडोजर?
DDA के हॉर्टिकल्चर विभाग ने मंदिरों को ग्रीन बेल्ट में बना बताकर हटाने का नोटिस जारी किया था। लेकिन स्थानीय निवासियों और पुजारियों ने इसे अन्यायपूर्ण बताया।

बुधवार रात करीब 7:30 बजे अचानक कुछ अधिकारियों ने मंदिरों पर नोटिस चस्पा कर दिया। स्थानीय लोग जब तक कुछ समझ पाते, प्रशासन ने अगले ही दिन सुबह 5 बजे भारी पुलिस बल और 12 से अधिक बुलडोजर के साथ ध्वस्तीकरण की तैयारी कर ली।

लेकिन हजारों की संख्या में लोगों ने मंदिरों को घेर लिया और विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते हंगामा बढ़ गया और मामला मुख्यमंत्री व उपराज्यपाल तक पहुंच गया।

मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल तक पहुंचा मामला
दिल्ली के मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और बीजेपी विधायक रवि नेगी ने इस मामले में हस्तक्षेप किया। मुख्यमंत्री ने उपराज्यपाल से बात कर कार्रवाई को फिलहाल रोकने के निर्देश दिए। इसके बाद DDA अधिकारियों को बुलडोजर रोकने के आदेश मिले।

क्या कहते हैं पुजारी और स्थानीय लोग?
1. कालीबाड़ी मंदिर
पुजारी का कहना है कि वह 10 साल से पूजा कर रहे हैं और मंदिर में कभी कोई विवाद नहीं हुआ। अचानक आए नोटिस से वे स्तब्ध हैं।

2. अमरनाथ मंदिर
यह मंदिर कश्मीरी पंडितों द्वारा बनाया गया था। पुजारी ने बताया कि यह 40 साल पुराना है और इसे गिराने का कोई कारण नहीं है।

3. बदरीनाथ मंदिर
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मंदिर में सालभर धार्मिक कार्यक्रम होते हैं, जिनकी प्रशासन से अनुमति भी ली जाती रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दी राहत, हाईकोर्ट जाने को कहा
मंदिरों को बचाने के लिए मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, लेकिन कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

वकील विष्णु शंकर जैन ने दलील दी कि 2009 से पहले बने धार्मिक स्थलों को नहीं हटाया जा सकता, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को दिल्ली हाईकोर्ट जाना चाहिए।

रात भर हुआ विरोध
डीडीए की तरफ से 3 मंदिरों को तोड़े जाने का नोटिस आने के बाद से ही निवासी इस फैसले से गुस्से में आ गए थे और इसके खिलाफ विरोध कर रहे थे. मंदिरों पर कोई एक्शन न हो इसीलिए पूरी रात मंदिरों में पूजा की जा रही थी. जहां पूरी रात विरोध हुआ, वहीं नोटिस जारी होने की अगली ही सुबह 5 बजे प्रशासन के एक दर्जन से ज्यादा बुलडोजर मंदिरों को गिराने के लिए पहुंच गए.

प्रशासन के बुलडोजर के साथ पहुंचने के बाद लोगों ने जमकर विरोध किया. हंगामा इस हद तक बढ़ गया कि संजय झील पार्क में मंदिरों पर बुलडोजर से होने वाली कार्रवाई फिलहाल अनिश्चितकालीन समय के लिए रोक दी गई है.

रातभर मंदिरों में पूजा, लोगों ने जमकर किया विरोध
मंदिरों पर बुलडोजर चलने की खबर मिलते ही लोग रातभर मंदिरों में पूजा-पाठ करने लगे। सुबह जब प्रशासन बुलडोजर लेकर पहुंचा, तो लोगों ने मंदिरों को घेर लिया और नारेबाजी शुरू कर दी।

स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन ने फिलहाल कार्रवाई को टाल दिया। लेकिन DDA ने संकेत दिए हैं कि आगे किसी भी समय कार्रवाई हो सकती है।

क्या आगे भी तोड़े जाएंगे मंदिर?
फिलहाल बुलडोजर कार्रवाई को टाल दिया गया है, लेकिन इसे पूरी तरह रद्द नहीं किया गया है। DDA का कहना है कि ग्रीन बेल्ट में बने सभी अवैध निर्माण हटाए जाएंगे।

अब सबकी नजर हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी है, जहां से मंदिरों के भविष्य का निर्णय होगा।

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