नई दिल्ली, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर दलित विरोधी मानसिकता रखने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के दो अहम पद पिछले एक साल से खाली पड़े हैं, लेकिन सरकार इसकी उपेक्षा कर रही है। राहुल गांधी ने इसे दलितों के संवैधानिक और सामाजिक अधिकारों पर सीधा हमला बताया है।
राहुल गांधी ने सरकार पर लगाए आरोप
राहुल गांधी ने कहा कि जब आयोग में पद ही खाली पड़े हैं, तो दलितों की आवाज़ कौन सुनेगा? उनकी शिकायतों पर कार्रवाई कौन करेगा? उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि जल्द से जल्द आयोग के सभी पद भरे जाएं ताकि यह निकाय दलितों के अधिकारों की रक्षा करने की अपनी ज़िम्मेदारी प्रभावी रूप से निभा सके।
कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा सरकार जानबूझकर इस संवैधानिक संस्था को कमजोर कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह दलितों को न्याय से वंचित करने और उनकी समस्याओं की अनदेखी करने की कोशिश है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का महत्व
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत गठित एक संवैधानिक निकाय है। इसका मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जातियों के अधिकारों की रक्षा करना और देश में सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।
इससे पहले यह आयोग अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST) दोनों के लिए काम करता था, लेकिन पारदर्शिता और ज़िम्मेदारी को बेहतर बनाने के लिए 2004 में इसे अलग कर दिया गया। अब यह आयोग विशेष रूप से अनुसूचित जातियों के अधिकारों की रक्षा और उनके विकास से जुड़े मामलों को देखता है।
भाजपा सरकार पर सवाल
राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा सरकार दलितों की उपेक्षा कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में महत्वपूर्ण पद ही खाली हैं, तो दलितों की समस्याओं का समाधान कैसे होगा?
उन्होंने कहा कि यह आयोग दलितों की सुरक्षा, उनके अधिकारों की रक्षा और उनके खिलाफ होने वाले अन्याय की निगरानी करता है। लेकिन अगर इसके अहम पद ही खाली रहेंगे, तो दलितों को न्याय कैसे मिलेगा?
दलित अधिकारों की रक्षा ज़रूरी
राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि संविधान ने दलितों को विशेष अधिकार दिए हैं, लेकिन भाजपा सरकार उन अधिकारों की रक्षा करने में नाकाम साबित हो रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार जल्द से जल्द राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के सभी खाली पदों को भरे, ताकि यह आयोग प्रभावी रूप से काम कर सके और दलितों को उनका हक मिल सके।
उन्होंने कहा कि सरकार को दलितों के अधिकारों को कमजोर करने के बजाय उन्हें सशक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। केवल चुनावी नारों से दलितों का भला नहीं होगा, बल्कि उनके अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस नीतियों और निष्पक्ष संस्थाओं की जरूरत है।




