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नई दिल्ली, 2फरवरी 2021

नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर 69 दिनों से किसानों का आंदोलन बदस्तूर जारी है। किसान अपनी मांगों को लेकर भयंकर ठंड में भी डटे हुए हैं। जहां एक तरफ पूरा विपक्ष किसानों के साथ खड़ा है, तो वहीं अब कभी एनडीए में रही शिवसेना ने भी मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आज शिवसेना के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे, जहां उन्होंने भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत से मुलाकात की। इस दौरान रावत के साथ शिवसेना सांसद अरविंद सावंत भी मौजूद थे।

संजय राउत ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार किसानों के आंदोलन का समर्थन करती है। बता दें कि इससे पहले खुद उन्होंने ट्वीट करके यहां पहुंचने की जानकारी साझा की थी। वहीं महाराष्ट्र सीएम उद्धव ठाकरे ने पहले ही किसानों के समर्थन का ऐलान कर दिया था। ये कोई पहला मौका नहीं है, जब शिवसेना ने मोदी सरकार का विरोध किया। शिवसेना एनडीए से अलग होने के बाद से लगातार मोदी सरकार की नीतिओं की आलोचना करती रहती है। इससे पहले संजय राउत ने मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था कि मोदी सरकार को जिद पर नहीं अड़े रहना चाहिए। कुछ अदृश्य ताकतें हैं, जो चाहती हैं कि इस आंदोलन का समाधान ना हो। वहीं महाराष्ट्र के किसान आंदोलन पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि अभी कोविड-19 का खतरा टला नहीं है।

एनसीपी ने भी दिया खुला समर्थन

आपको बता दें कि इससे पहले एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने भी कृषि कानूनों पर सवाल उठाए थे। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा था कि ये कानून किसानों पर आने वाला एक बड़ा संकट है। इससे मंडी प्रणाली पूरी तरह से खत्म हो जाएगी, जिसका खामियाजा सिर्फ और सिर्फ किसानों को उठाना पड़ेगा। पवार के मुताबिक कानून न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बहुत बुरा असर डालेंगे और मंडी सिस्टम को कमजोर कर देंगे। इसके बाद पवार के आरोपों का जवाब देते हुए कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने भी कई ट्वीट किए और उनसे किसानों के सामने सही तथ्य रखने की अपील की थी।