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Srilanka Crisis के बीच जानिए राष्‍ट्रपति गोटाबाया ने किसके हाथों में सौंपी विदेश और वित्‍त्त मंत्री की कमान

Srilanka Crisis के बीच जानिए राष्‍ट्रपति गोटाबाया ने किसके हाथों में सौंपी विदेश और वित्‍त्त मंत्री की कमान

कोलंबो, श्रीलंका में जारी अव्यवस्था व लोगों के विरोध के बीच राष्ट्रपति गोटाबाया ने सोमवार को देश के लिए नया विदेश मंत्री और वित्त मंत्री चुन लिया है। उन्होंने श्रीलंका के नए विदेश मंत्री के तौर पर जी एल पेरिस और नए वित्त मंत्री पद पर अली साबरी का नाम लिया है।  श्रीलंका में शनिवार को 36 घंटे का लंबा कर्फ्यू लगाया गया था जो सोमवार सुबह हटा दिया गया लेकिन देश में अब भी इमरजेंसी के हालात हैं। इस क्रम में देशभर में इस्तीफे का दौर जारी है। कैबिनेट के बाद अब श्रीलंका के सेंट्रल बैंक के गर्वनर ने भी अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया।

अब तक के अपडेट्स- 

– श्रीलंका के नए विदेश मंत्री होंगे जी एल पेरिस और वित्त मंत्री अली साबरी, राष्ट्रपति गोटाबाया ने की घोषणा।

– श्रीलंकाई राष्ट्रपति गोटाबया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa) ने अपने भाई ओर वित्त मंत्री बासिल राजपक्षे को उनके पद से हटा दिया।

बता दें कि 26 सदस्यीय श्रीलंकाई कैबिनेट ने अपना इस्तीफा सौंप दिया लेकिन प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे का नाम इसमें शामिल नहीं है। श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के पुत्र और खेल व युवा मामलों के मंत्री नमल राजपक्षे (Namal Rajapaksa) ने भी अपने सभी पोर्टफोलियो से इस्तीफा दे दिया। नमल राजपक्षे ने अपने ट्वीट में कहा, ‘मैंने राष्ट्रपति के सचिव को इस बारे में सूचित कर दिया था।’  श्रीलंका अपने सबसे खराब आर्थिक संकट से जूझ रहा है और लोग राजधानी कोलंबो समेत विभिन्न शहरों में सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। दशकों बाद बदतर आर्थिक हालात को लेकर सरकार की नीतियों के खिलाफ देश के लोग विरोध जता रहे हैं।

कोरोना महामारी के कारण श्रीलंका की पर्यटन पर काफी असर हुआ और यहां की आर्थिक व्यवस्था चरमरा गई। फिलहाल श्रीलंका विदेशी फंड के किल्लत का सामना कर रहा है जिसके कारण यहां खाद्य सामग्रियों, ईंधन, बिजली व गैस की भारी कमी है। इस आर्थिक कमी से जूझने वाले श्रीलंकाई सरकार ने अपने मित्र देशों से सहायता मांगी है।

श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa) ने 1 अप्रैल को गैजेट नोटिफिकेशन जारी किया। इसके तहत देश में इमरजेंसी लागू कर दी गई। राष्ट्रपति ने इस फैसले के पीछे देश की जनता के सुरक्षा का हवाला दिया था।

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