कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने ऐसा क्‍यों कहा- अच्छा है, सब विधायक मेरी तरह हो जाएं

कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने ऐसा क्‍यों कहा- अच्छा है, सब विधायक मेरी तरह हो जाएं

देहरादून,  मंत्री पद से इस्तीफे की धमकी को लेकर चर्चा में आए कैबिनेट मंत्री डा हरक सिंह रावत ने कहा कि जब सब-कुछ अच्छा हो जाए तो कसैलापन खत्म हो जाता है। कोटद्वार मेडिकल कालेज का शासनादेश जारी हो रहा है। इसके साथ ही सारे गिले-शिकवे दूर हो गए हैं। दबाव की रणनीति के संबंध पूछने पर उन्होंने कहा, ‘अच्छा है, सब विधायक मेरी तरह हो जाएं। जनता का कल्याण हो जाएगा। सभी मेडिकल कालेज मांगे, जिसमें दम होगा वह लेगा।’ साथ ही जोड़ा कि खेल में टीमें तो कई खेलती हैं, मगर जीतती एक ही है।

कैबिनेट मंत्री हरक सिंह हाल में सचिवालय में हुई कैबिनेट की बैठक से यह कहते हुए निकल गए थे कि वे मंत्री पद से इस्तीफा दे रहे हैं। वे कोटद्वार मेडिकल कालेज का विषय कैबिनेट में न आने से नाराज थे। दो दिन तक यह मामला सुर्खियों में रहा। यद्यपि, शनिवार रात को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से हुई मुलाकात के बाद हरक सिंह मान गए थे। सोमवार को मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में कैबिनेट मंत्री हरक सिंह ने कहा कि कोटद्वार जिले की मांग को छोड़कर वह अपने सभी वायदे लगभग पूर्ण करा चुके हैं। फिर चाहे वह कोटद्वार मेडिकल कालेज हो अथवा पाखरो टाइगर सफारी, कार्बेट के नए गेट, कोल्हूचौड़ का ईको टूरिज्म के हिसाब से विकास।

उन्होंने कहा कि कोटद्वार में केंद्रीय विद्यालय के संबंध में केंद्रीय शिक्षा मंत्री से बात हो चुकी है। इसकी फाइल तैयार है, जिस पर केंद्रीय कैबिनेट की मुहर लगनी है। फिर यह केंद्रीय विद्यालय भी खुल जाएगा। कोटद्वार जिले को इसलिए उन्होंने ज्यादा महत्व नहीं दिया, क्योंकि इससे उतना फायदा नहीं जितना अन्य कार्यों से है।

मैं जनहित के लिए करता हूं दबाव की राजनीति

दबाव की राजनीति के संबंध में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा की गई टिप्पणी के बारे में पूछने पर हरक ने कहा कि हरीश रावत निजी हित को विशेष राजनीति करते हैं और मैं जनता के हित के लिए दबाव की राजनीति करता हूं। यदि इससे क्षेत्र और जनता का भला होता है, गलत क्या है।

कोटद्वार से चुनाव लड़ने का नहीं किया उल्लेख

कोटद्वार क्षेत्र से विधायक एवं कैबिनेट मंत्री हरक सिंह ने एक प्रश्न पर कहा कि वह पार्टी से पहले ही कह चुके हैं कि मुझे चुनाव मत लड़ाओ। यदि लड़ाना ही है तो सीट तय कर दो। उन्होंने कहा कि लैंसडौन, यमकेश्वर, केदारनाथ, डोईवाला कहीं से भी लड़ाएं, ये पार्टी को तय करना है। उन्होंने दावा कि उन्हें कहीं से भी चुनाव लड़ा दो, वे जीतकर दिखाएंगे। ये अहम नहीं, बल्कि इसके लिए उन्हें खुद के साथ ही जनता पर भरोसा है। यद्यपि, उन्होंने सीटों के विकल्प तो दिए, लेकिन इसमें कोटद्वार का उल्लेख नहीं किया। उन्होंने कहा कि ये गलतफहमी है कि वे हर बार सीट बदलकर जीते हैं।

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