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जानें क्यों जदयू अध्यक्ष ललन सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखा- बिहार के साथ न्याय कीजिए!

जानें क्यों जदयू अध्यक्ष ललन सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखा- बिहार के साथ न्याय कीजिए!

पटना. नीतीश कुमार बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग 2007 से ही उठाते रहे हैं. आमतौर पर चुनाव से पहले यह मांग और तेज हो जाती है. लेकिन, इस बार यह कुछ अलग सा दिख रहा है. दरअसल अभी न तो विधानसभा चुनाव हैं और न ही लोकसभा चुनाव. ऐसे में कुछ वक्त से इस मुद्दे पर शांत रहे नीतीश कुमार और जदयू नेताओं ने इसे फिर से बिहार की जरूरत बताई है. यही नहीं इस मुद्दे को लेकर भाजपा और जदयू नेताओं के बीच जुबानी जंग भी शुरू हो गई है. बुधवार को जदयू के  राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने भी पीएम मोदी से मांग करते हुए कहा है कि बिहार को इस लंबित मांग को जल्द स्वीकार करें.

जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने प्रधानमंत्री से बिहार को विशेष राज्य के दर्जे की मांग करते हुए ट्वीट किया है. उन्होंने पीएमओ और नरेन्द्र मोदी को टैग करते हुए लिखा,  वर्तमान स्थिति में अपने दम पर विकसित व संसाधनयुक्त राज्यों के साथ दौड़ लगाना बिहार के लिए असंभव सा है. इसीलिए हम सभी बिहारवासी आदरणीय @PMOIndia श्री @narendramodi जी से विनम्र आग्रह करते हैं कि आप विशेष राज्य के दर्जे की लंबित मांग को जल्द स्वीकार कर बिहार के साथ न्याय करें.

बता दें कि नीति आयोग की रिपोर्ट में बिहार विकास के कई मानकों में पिछड़ा हुआ है. ऐसे में अक्सर बिहार सरकार के विकास और विशेष राज्य के दर्जे पर बिहार एनडीए में अलग -अलग सुर सुनने को मिलते हैं. इसी क्रम में नीतीश कुमार कैबिनेट के मंत्रियों में जुबानी जंग भी तेज हो गई है. मंगलवार को यह तब सतह पर आ भी गई थी जब विशेष राज्य के दर्जे पर मंत्री विजेंद्र यादव (जदयू) और मंत्री जीवेश मिश्रा (भाजपा) के आमने सामने हो गए.

मंत्री जीवेश मिश्रा ने नीति आयोग के रिपोर्ट पर नीतीश कुमार के सवाल पर कहा कि15 साल में बेहतरीन काम हुआ है. हमलोगों ने खूब काम किया है. रिपोर्ट के बाद और काम करने में हमलोग लगेंगे. बिहार को विशेष राज्य के दर्जे पर मंत्री ने कहा बिहार विशेष काम करने वाला राज्य है, बिहार ने नई लकीर खींची है. 10 से अधिक मेडिकल 100 से अधिक ITI खुले हैंं.

मंत्री जीवेश मिश्रा ने कहा कि बिहार को विशेष राज्य के दर्जे की जरूरत नहीं है. हमलोग काम ही विशेष कर रहे हैं. वर्तमान भारत की सरकार समय-समय पर विशेष पैकेज देकर मदद कर रही है.  जीवेश मिश्रा ने जदयू के मंत्रियों के बयान पर कहा मंत्री किसी कोटे के नहीं होते हैं. उनके बयान को किसी दल विशेष से नहीं देखा जाना चाहिए. नीतीश कुमार हमारे नेता हैं. नीति आयोग की छोड़ कर नीति निर्धारण किया जाना चाहिए. किसी रिपोर्ट पर बहस करने की जरूरी नहीं है. रिपोर्ट को चुनौती में लेना चाहिए.

वहीं दूसरी तरफ बिहार को विशेष राज्य के दर्जे पर मंत्री विजेंद्र यादव ने कहा यह मांग बहुत पहले से है. नीति आयोग बता रहा है कि बिहार पिछड़ा राज्य है तो पिछड़े राज्य को ही विशेष राज्य दर्जा की मांग होती है. अगर हम सशक्त राज्य हो जाएंगे तब हमें कोई जरूरत नहीं होगी.

बता दें कि विजेंद्र सिंह ने चंद महीने पहले ही कहा था कि बिहार ने विशेष राज्य के दर्जे की मांग छोड़ दी है. केंद्र सरकार हमें विशेष पैकेज दे रही है. हालांकि बाद में जदयू नेताओं ने इस दावे को उनका खीझ भरा बयान बताया था क्योंकि नीति आयोग की रिपोर्ट में बिहार को बार-बार पिछड़ा राज्य कहा जाता है और केंद्र बिहार को विशेष राज्य का दर्जा भी नहीं दे रहा.

इसी मसले पर जब बिहार की डिप्टी सीएम  रेनु देवी ने दिसंबर महीने के पहले सप्ताह में कहा था कि विशेष राज्य का दर्जा मांगने का कोई अर्थ नहीं है और इस दावे को लेकर कोई विस्तृत जानकारी भी नहीं है.  नू देवी के इस बयान पर विगत 5 दिसंबर को नीतीश कुमार ने बिना नाम लिए ही अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी. नीतीश कुमार ने कहा था कि यदि राज्य में कोई स्पेशल स्टेटस की डिमांड का विरोध करता है तो संभव है कि उसे मुद्दे की जानकारी ही न हो.

 

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