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सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी – ‘बिहार में बिना आपराधिक मामलों के मुखिया नहीं बन सकते!’

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी – ‘बिहार में बिना आपराधिक मामलों के मुखिया नहीं बन सकते!’

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के एक मुखिया (ग्राम प्रधान) की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए बेहद कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि अगर किसी पर कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है, तो वह बिहार में मुखिया बनने के योग्य नहीं समझा जाता। यह टिप्पणी जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने की, जिससे राज्य की ग्राम पंचायत राजनीति में अपराध के बढ़ते प्रभाव पर सवाल उठने लगे हैं।

क्या था मामला?
याचिकाकर्ता, जो बिहार के एक गांव के मुखिया हैं, ने अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी। उन पर गंभीर आपराधिक आरोप लगे थे, जिसमें मारपीट, धमकी और अवैध गतिविधियों में संलिप्तता शामिल थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्य कांत ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि उनके मुवक्किल पर पहले से कितने आपराधिक मामले दर्ज हैं। इस पर वकील ने कहा कि उनके खिलाफ मामले हैं, लेकिन यह सब राजनीतिक षड्यंत्र के तहत उन्हें फंसाने की कोशिश की गई है।

सुप्रीम कोर्ट की तीखी प्रतिक्रिया
वकील की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने व्यंग्यपूर्ण लहजे में कहा, “बिहार में एक मुखिया के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने चाहिए। अगर आपके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है, तो आप मुखिया बनने के लायक नहीं हैं।” यह टिप्पणी राज्य में पंचायत चुनावों में अपराधियों की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।

इसके बाद जब वकील ने कहा कि उनका मुवक्किल एक साधारण मुखिया है और उसे गलत तरीके से फंसाया गया है, तो जस्टिस सूर्य कांत ने तंज कसते हुए कहा, “आपने इन गुंडों को किराए पर लिया है। एक ने हेलमेट पहना हुआ है, दूसरा टोपी पहने बाइक पर है… उनमें से एक ने मोबाइल गिरा दिया, अब आप फंस गए हैं क्योंकि आपके खिलाफ पुख्ता सबूत मिल चुके हैं।”

‘गुंडे की तरह काम कर रहे हैं’ – अदालत की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता की गतिविधियां अपराधी जैसी हैं। “आप एक गुंडे की तरह काम कर रहे हैं और अब अदालत से बचने की कोशिश कर रहे हैं। कानून को अपने हाथ में लेने वालों को अदालत से कोई राहत नहीं मिलेगी।” इस टिप्पणी के साथ अदालत ने याचिकाकर्ता की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

बिहार की राजनीति पर बड़ा सवाल
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी ने बिहार में स्थानीय राजनीति और अपराध के गठजोड़ को उजागर कर दिया है। पंचायत स्तर पर चुनावों में बढ़ते अपराधीकरण को लेकर पहले भी कई रिपोर्टें आ चुकी हैं, लेकिन यह पहली बार है जब देश की शीर्ष अदालत ने इस मुद्दे पर इतनी कड़ी टिप्पणी की है।

इस मामले ने एक गंभीर बहस छेड़ दी है कि क्या बिहार में राजनीति और अपराध इतना घुल-मिल गए हैं कि बिना आपराधिक रिकॉर्ड के चुनाव जीतना संभव नहीं रहा? अदालत के इस बयान को एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है, जो बिहार की राजनीति में स्वच्छ छवि वाले उम्मीदवारों की आवश्यकता पर बल देता है।

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