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पूरे विश्व में केवल राजस्थान में ही निकलता है रावण का जुलूस: दहन की जगह श्मशान घाट पर होता है अंतिम संस्कार

पूरे विश्व में केवल राजस्थान में ही निकलता है रावण का जुलूस: दहन की जगह श्मशान घाट पर होता है अंतिम संस्कार

भीलवाड़ा. बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माने जाने वाले रावण का आज यानि बुधवार 5 अक्टूंबर विजय दशमी की शाम देशभर में रावण के पुतले के दहन का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम कहीं बड़े तो छोटे स्तर पर आयोजित किए जाएंगे। लेकिन पूरे विश्व में राजस्थान ही एक ऐसा प्रदेश है जहां रावण का दहन करने से पहले उसका जुलूस भी निकाला जाता है। और एक सामान्य व्यक्ति की तरह श्मशान घाट में रावण का अंतिम संस्कार किया जाता है। यहां के लोगों द्वारा श्मशान घाट में ही रावण का पुतला दहन किया जाता है। और बाकी कार्यक्रम भी वहीं आसपास आयोजित किए जाते है।

दहन के बजाए होता है अंतिम संस्कार 
हम बात कर रहे हैं भीलवाड़ा के बनेड़ा कस्बे की। दरअसल यहां पिछले 45 सालों से दशहरे के मौके पर रावण का जुलूस निकाला जाता है। जिसमें हजारों की संख्या में गांव के लोग शामिल होते हैं। और नाचते गाते श्मशान घाट तक पहुंचते हैं। की शुरुआत गांव के ही एक पंडित ने आज से करीब 45 साल पहले की थी। हालांकि यह कभी भी सामने नहीं आ पाया कि ऐसा किया क्यों जाता है। लेकिन इस आयोजन को देखने के लिए यहां हजारों की संख्या में भीलवाड़ा के साथ-साथ राजस्थान के दूसरे लोगों से भी लोग शामिल होने के लिए आते हैं।

अंतिम संस्कार के बाद लगता है मेला, होता है दंगल
ग्रामीणों के मुताबिक  शाम ढलने के बाद रावण दहन किया जाता है। इसके पहले दोपहर के समय गांव के ही एक चौक से रावण की जुलूस यात्रा शुरू होती है। जो अलग-अलग मार्गों से होकर शाम के समय श्मशान घाट पहुंचती है। वही श्मशान घाट में रावण दहन के बाद मेले का भी आयोजन होता है। जिसमें लोग लुत्फ उठाते हैं। इसके अलावा श्मशान घाट में ही दंगल का आयोजन किया जाता है।

बता दे कि राजस्थान के अलग अलग जिलों में रावण दहन करने की परंपराए है कहीं पहले इसकी सेना से युद्ध करने के बाद घंटों तक गोलियां दागने के बाद दहन किया जाता है तो कहीं जुलूस निकालकर श्मशान घाट में दहन होता है तो वहीं राजस्थान के जोधपुर के मांडेर में ही रावण का ससुराल होने से वहां के लोग उसका पुतला नहीं जलाते है।

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