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क्या है वक्फ बोर्ड? आखिर कैसे बना सेना और रेलवे के बाद देश में सबसे ज्यादा जमीन का मालिक

क्या है वक्फ बोर्ड? आखिर कैसे बना सेना और रेलवे के बाद देश में सबसे ज्यादा जमीन का मालिक

What is Waqf Board: वक्फ बोर्ड इन दिनों काफी सुर्खियों में है। दरअसल, तमिलनाडु के एक हिंदू बहुल गांव की पूरी जमीन को ही वक्फ बोर्ड ने अपनी संपत्ति घोषित कर दिया है। इसमें हिंदुओं की सैकड़ों एकड़ जमीन के अलावा 1500 साल पुराना मंदिर भी शामिल है। ये सब हो पा रहा है वक्फ बोर्ड को मिले असीमित अधिकार से, जिसे 1995 के वक्फ एक्ट में कांग्रेस सरकार ने दिया है। आखिर क्या है वक्फ बोर्ड, कैसे काम करता है और उसके पास कौन-कौन सी असीमित शक्तियां हैं। आइए जानते हैं। 

क्या है ‘वक्फ’?
‘वक्फ’ शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के शब्द वकुफा से हुई है। इस्लाम में वक्फ उस संपत्ति को कहते हैं, जो अल्लाह के नाम पर दान कर दी जाती है। एक बार संपत्ति वक्फ हो गई तो फिर उसे मालिक वापस नहीं ले सकता है। ये दान पैसे, जमीन या संपत्ति का हो सकता है। इस्लाम में किसी इंसान का धर्म के लिए किया गया किसी भी तरह का दान वक्फ कहलाता है। 

क्या है वक्फ बोर्ड?
जब कोई मुस्लिम अपनी संपत्ति दान कर देता है तो उसकी देखरेख का जिम्मा वक्फ बोर्ड के पास होता है। वक्फ बोर्ड के पास दान दी गई किसी भी संपत्ति पर कब्जा रखने या उसे किसी और को देने का अधिकार होता है। वक्फ का काम देखने वालों को मुतवल्ली कहा जाता है। इसके अलावा अगर किसी संपत्ति को लंबे समय तक मजहब के काम में इस्तेमाल किया जा रहा हो, तो उसे भी वक्फ माना जा सकता है।

क्यों आया चर्चा में?
हाल ही में तमिलनाडु के त्रिची जिले के एक हिंदू बहुल गांव तिरुचेंथुरई को वक्फ बोर्ड ने अपनी मिल्कियत घोषित कर दिया है। बोर्ड ने कहा कि इस गांव की पूरी जमीन वक्फ की है, जबकि उस गांव में सिर्फ 22 मुस्लिम परिवार हैं, जबकि हिंदू आबादी 95 प्रतिशत है। आश्चर्य की बात ये है कि गांव के 1500 साल पुराने मंदिर को भी वक्फ की संपत्ति घोषित कर दिया गया है, जबकि इस्लाम को आए हुए ही अभी 1400 साल हुए हैं। तमिलनाडु का ये मामला वक्फ बोर्ड को मिली ताकत और उसके दुरुपयोग का सबसे बड़ा उदाहरण है।

सेना और रेलवे के बाद सबसे ज्यादा जमीन वक्फ की : 
वक्फ बोर्ड के पास भारतीय सेना और रेलवे के बाद सबसे ज्यादा जमीन है। वक्फ बोर्ड देश का तीसरा सबसे बड़ा भूमि मालिक है। देश के सभी वक्फ बोर्डों के पास कुल मिलाकर 8 लाख 54 हजार 509 संपत्तियां हैं, जो 8 लाख एकड़ से ज्यादा जमीन पर फैली हुई हैं। वहीं, सेना के पास करीब 18 लाख एकड़ जमीन पर संपत्तियां हैं, जबकि रेलवे की चल-अचल संपत्तियां करीब 12 लाख एकड़ में हैं। बता दें कि देश में एक सेंट्रल वक्फ बोर्ड और 32 स्टेट बोर्ड हैं।

13 साल में कैसे दोगुनी हुई वक्फ की संपत्ति?
2009 में वक्फ बोर्ड की संपत्तियां 4 लाख एकड़ जमीन पर थीं, जबकि अब यह 8 लाख एकड़ में फैली हैं। कहने का मतलब है कि 13 सालों में वक्फ बोर्ड की संपत्तियां दोगुनी से भी ज्यादा हो गई हैं। अब सोचने वाली बात है कि देश की कीमती जमीन का हिस्सा आखिर कैसे इतनी तेजी के साथ वक्फ बोर्ड का हो रहा है।

जमीनों पर कैसे कब्जा करता है वक्फ बोर्ड?
दरअसल, वक्फ बोर्ड देशभर में जहां भी कब्रिस्तान की घेरेबंदी करवाता है, उसके आसपास की जमीन को भी अपनी संपत्ति घोषित कर देता है। इसी तरह हर कहीं अवैध मजारें और नई-नई मस्जिदें बढ़ती जा रही हैं। वक्फ बोर्ड धीरे से इन मजारों और आसपास की जमीनों पर कब्जा कर लेता है। 

कब हुआ वक्फ बोर्ड का गठन?
1954 में वक्फ बोर्ड का गठन हुआ और इसी के साथ भारत के इस्लामीकरण का एजेंडा शुरू हुआ। 1995 में पीवी नरसिम्हा राव की कांग्रेस सरकार ने वक्फ एक्ट 1954 में संशोधन किया और नए-नए प्रावधान जोड़कर वक्फ बोर्ड को बेहद ताकतवर बना दिया। दुनिया के किसी भी इस्लामी देश में वक्फ बोर्ड नाम की कोई संस्था नहीं है। यह सिर्फ भारत जैसे देश में है, जो इस्लामिक नहीं बल्कि एक सेकुलर देश है। 

क्या कहता है 1995 का वक्फ एक्ट? 
1995 के वक्फ एक्ट के मुताबिक, अगर वक्फ बोर्ड को लगता है कि कोई जमीन वक्फ की प्रॉपर्टी है तो ये साबित करने की जिम्मेदारी उसकी नहीं, बल्कि जमीन के असली मालिक की होगी। अगर वक्फ बोर्ड किसी जमीन को अपनी संपत्ति घोषित कर दे तो उस जमीन के मालिक को सारे सबूत दिखाने होंगे कि ये जमीन वक्फ की नहीं, बल्कि उसकी है। साबित करना होगा कि वो बताए कि कैसे उसकी जमीन वक्फ की नहीं है। 

क्यों वक्फ बोर्ड के खिलाफ कोर्ट नहीं जा सकते आप? 
अगर वक्फ बोर्ड ने आपकी संपत्ति को वक्फ की संपत्ति बता दिया तो आप उसके खिलाफ कोर्ट नहीं जा सकते। आपको वक्फ बोर्ड से ही गुहार लगानी होगी। वक्फ बोर्ड का फैसला आपके खिलाफ आया, तब भी आप कोर्ट नहीं बल्कि वक्फ ट्रिब्यूनल में जा सकते हैं। वक्फ एक्ट के सेक्शन 85 के मुताबिक, ट्रिब्यूनल के फैसले को हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती नहीं दी जा सकती है।

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