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उपेंद्र कुशवाहा के लिए बेटे को मंत्री बनाना क्यों था जरूरी, बोले- ‘विधायक-सांसदों की पलटी ने पार्टी को तोड़ा…’

उपेंद्र कुशवाहा के लिए बेटे को मंत्री बनाना क्यों था जरूरी, बोले- ‘विधायक-सांसदों की पलटी ने पार्टी को तोड़ा…’

बिहार में बनी नई सरकार में जब उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाया गया, तो इस पर कई तरह के सवाल उठने लगे. सोशल मीडिया पर भी परिवारवाद को लेकर चर्चा तेज हो गई है. अब खुद कुशवाहा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पूरा मामला समझाया है.

‘पलटी मारने वाली राजनीति ने RLM को बहुत चोट पहुंचाई’

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि उनकी पार्टी को सबसे बड़ा नुकसान विधायकों और सांसदों की लगातार पलटियों से हुआ है. उन्होंने याद दिलाया कि 2014 लोकसभा चुनाव में RLM के तीन सांसद जीतकर आए थे, लेकिन बाद में दो सांसद दल बदलकर दूसरी पार्टी में चले गए. इसका पार्टी की ताकत पर सीधा असर पड़ा.

इसी तरह 2015 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी के दो विधायक जीते थे, पर वे भी कुछ समय बाद दूसरी पार्टियों में शामिल हो गए. कुशवाहा के मुताबिक, इन घटनाओं ने संगठन को कमजोर किया और कार्यकर्ताओं का आत्मविश्वास गिरा दिया।

‘अब दोबारा ऐसा न हो, इसलिए स्थिरता बेहद जरूरी’

कुशवाहा का कहना है कि बार-बार होने वाली टूट से बचने के लिए पार्टी को मजबूत नेतृत्व और भरोसेमंद लोगों की जरूरत है. उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि हालात फिर दोहराए जाएं—जहां चुनाव जीतने के बाद लोग किसी और दल में चले जाएं. ऐसी स्थिति से पार्टी का ढांचा बिखर जाता है और विश्वास खत्म हो जाता है।

इसी कारण उन्होंने इशारों-इशारों में बताया कि सत्ता में किसी विश्वसनीय व्यक्ति की मौजूदगी से पार्टी की पकड़ मजबूत रहती है और संगठन स्थिर रहता है।

‘दीपक क्षमता के आधार पर मंत्री बने हैं’

कुशवाहा ने यह भी साफ किया कि  को मंत्री बनाने का फैसला सिर्फ राजनीतिक मजबूरी नहीं था. उन्होंने कहा कि दीपक में जिम्मेदारी निभाने की क्षमता और समझ है, इसलिए उन्हें यह मौका दिया गया. उन्होंने दावा किया कि यह फैसला परिवारवाद नहीं, बल्कि उनकी योग्यता और पार्टी की जरूरतों को देखते हुए लिया गया है।

कुशवाहा के इस बयान से साफ है कि वे बिहार की राजनीति में उठ रहे परिवारवाद के सवालों के बीच अपनी रणनीति स्पष्ट करना चाहते हैं. उनका कहना है कि पार्टी को सुरक्षित और मजबूत रखने के लिए यह कदम सोचा-समझा है।

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