बंगाल में SIR का TMC कर रही विरोध, फिर कटे नामों को लेकर बेफिक्र क्यों? जानिए पूरा मामला आसान भाषा में

बंगाल में SIR का TMC कर रही विरोध, फिर कटे नामों को लेकर बेफिक्र क्यों? जानिए पूरा मामला आसान भाषा में

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव आयोग ने राज्य में विशेष गहन संशोधन (SIR) की प्रक्रिया शुरू की है। इसके शुरुआती चरण में ही मतदाता सूची से 58 लाख से ज्यादा नाम हटा दिए गए हैं।
हालांकि सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस प्रक्रिया का खुलकर विरोध कर रही है, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के गढ़ भवानीपुर में 44 हजार नाम कटने के बावजूद पार्टी बेफिक्र नजर आ रही है। यही सवाल सबके मन में है—जब नुकसान नहीं, तो विरोध क्यों?


SIR में कितने नाम हटे और कहां-कहां?

चुनाव आयोग के मुताबिक, पूरे राज्य में 58,20,898 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। सबसे ज्यादा असर इन इलाकों में पड़ा—

  • दक्षिण 24 परगना: 8.18 लाख

  • उत्तर 24 परगना: 7.92 लाख

  • उत्तर कोलकाता: 3.90 लाख

  • दक्षिण कोलकाता: 2.16 लाख

  • हावड़ा: 4.47 लाख

  • हुगली: 3.19 लाख

भवानीपुर में अकेले 44 हजार से ज्यादा नाम हटाए गए, जिस पर राजनीतिक बहस तेज हो गई।


भवानीपुर को लेकर TMC का तर्क

TMC का कहना है कि भवानीपुर में कटे नाम असल में उन लोगों के हैं जो पहले भी वोट डालने नहीं आते थे। पार्टी ने 2021 के चुनाव और बाद के उपचुनाव के आंकड़े सामने रखे—

  • 2021 विधानसभा चुनाव में कुल मतदाता: 2.06 लाख
    वोट पड़े: 1.27 लाख
    अनुपस्थित रहे: 78,736

  • उपचुनाव में वोट पड़े: 1.17 लाख
    अनुपस्थित रहे: 88,000

TMC का दावा है कि जो 44 हजार नाम हटे, वे इन्हीं अनुपस्थित मतदाताओं में से थे, इसलिए पार्टी को इससे कोई नुकसान नहीं है।


‘हमें कोई चिंता नहीं’ — TMC का साफ संदेश

TMC के उपाध्यक्ष जय प्रकाश मजूमदार ने कहा कि
“भवानीपुर में 44 हजार नाम हटने से हमें कोई चिंता नहीं है। विधानसभा चुनाव और उपचुनाव—दोनों में बड़ी संख्या में लोग वोट डालने नहीं आए। हटाए गए नाम उन्हीं के हैं।”

उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी बेवजह हंगामा कर रही है।


फिर SIR का विरोध क्यों?

यही सबसे बड़ा सवाल है। अगर नुकसान नहीं, तो TMC SIR का विरोध क्यों कर रही है?
टीवी9 पर बात करते हुए विशेष पर्यवेक्षक सौरभ गुप्ता ने कहा कि—

  • चुनाव आयोग की प्रक्रिया निष्पक्ष है

  • पार्टियां अपने-अपने राजनीतिक फायदे के लिए बयानबाजी कर रही हैं

  • यह पूरा मामला राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है


बीजेपी को क्या दिख रहा है मौका?

बीजेपी को इस पूरी प्रक्रिया में राजनीतिक फायदा नजर आ रहा है। पार्टी का मानना है कि SIR के जरिए बड़ी संख्या में अवैध या फर्जी नाम हटेंगे।
बीजेपी नेता सामिक भट्टाचार्य ने दावा किया कि—

  • 13 करोड़ से ज्यादा लोगों की सुनवाई होगी

  • 1 करोड़ से अधिक अवैध नाम मतदाता सूची से हटेंगे

  • 2026 के चुनाव में बीजेपी को इसका सीधा फायदा मिलेगा


आगे क्या होगा?

एक तरफ TMC SIR का खुलकर विरोध कर रही है, तो दूसरी तरफ भवानीपुर में कटे हजारों नामों को लेकर वह खुद कह रही है कि इससे उसे कोई नुकसान नहीं होगा। वहीं BJP इसे 2026 के चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक मौका मान रही है। अब देखना होगा कि मतदाता सूची में किए जा रहे इस बदलाव का असली असर आने वाले विधानसभा चुनाव में किसे फायदा और किसे नुकसान पहुंचाता है।

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