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बंगाल फतह की तैयारी, बीजेपी और टीएमसी आमने-सामने,जानें बीजेपी कहां करेगी TMC पर चोट, ममता किसे बनाएगी ढाल

बंगाल फतह की तैयारी, बीजेपी और टीएमसी आमने-सामने,जानें बीजेपी कहां करेगी TMC पर चोट, ममता किसे बनाएगी ढाल

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव भले ही अभी करीब एक साल दूर हों, लेकिन सियासी हलचल तेज हो चुकी है। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चुनावी तैयारी शुरू कर दी है। घुसपैठ, मतदाता सूची, बंगाली पहचान, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे इस बार चुनाव की दिशा तय करते दिख रहे हैं।

हाल ही में बंगाल दौरे पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य सरकार पर बांग्लादेशी घुसपैठ, भ्रष्टाचार और कट-कमीशन के आरोप लगाए। इसके साथ ही साफ हो गया कि चुनावी बहस दो विरोधी नारों के आसपास घूमेगी—टीएमसी का कहना है “कोई बांग्लादेश नहीं जाएगा”, जबकि बीजेपी का दावा है “बंगाल को बांग्लादेश नहीं बनने देंगे।”

2021 के चुनाव के बाद बंगाल की राजनीति में कई नए सवाल उभरे हैं। मतदाता सूची का विशेष गहन संशोधन (SIR) और प्रवासियों से जुड़ा मुद्दा अब बड़े राजनीतिक हथियार बन गए हैं। इन्हीं मुद्दों के सहारे दोनों दल 2026 के चुनाव की रणनीति गढ़ रहे हैं।

TMC की रणनीति: किन मुद्दों पर खेलेगी ममता की टीम

टीएमसी SIR का जोरदार विरोध कर रही है। पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची से एक करोड़ से ज्यादा नाम हटाए जा रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है। साथ ही चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

टीएमसी एक बार फिर बंगाली भाषा, संस्कृति और पहचान को चुनावी मुद्दा बनाएगी। पार्टी का कहना है कि बीजेपी शासित राज्यों में बंगाली भाषी मजदूरों के साथ भेदभाव हो रहा है और वह बंगालियों के सम्मान की लड़ाई लड़ेगी।

मुस्लिम वोटों को लेकर भी टीएमसी बीजेपी पर हमला तेज करेगी। AIMIM और बीजेपी के कथित रिश्तों का जिक्र कर यह संदेश देने की कोशिश होगी कि बीजेपी मुस्लिम वोटों को बांटने की राजनीति कर रही है।

घुसपैठ के आरोपों पर टीएमसी पलटवार करेगी। पार्टी का कहना है कि यह बीजेपी का गढ़ा हुआ नैरेटिव है और सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है, राज्य की नहीं।

चुनाव में सरकार की योजनाएं और कामकाज भी प्रमुख मुद्दा होंगे। ममता बनर्जी की सरकार अपने 14 साल के काम को सामने रखेगी और ‘उन्नयनेर पांचाली’ को रिपोर्ट कार्ड की तरह पेश करेगी।

इसके अलावा, रवींद्रनाथ टैगोर, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय और राजा राममोहन रॉय जैसे बंगाली महापुरुषों को लेकर कथित अपमान के आरोप भी टीएमसी जोर-शोर से उठाएगी। मतुआ समुदाय में SIR से वोट कटने की आशंका को लेकर पार्टी सीधे संवाद करेगी और केंद्र पर फंड रोकने का मुद्दा भी लगातार सामने रखेगी।

BJP की तैयारी: TMC पर कहां करेगी वार

बीजेपी चुनाव में अवैध घुसपैठ को सबसे बड़ा मुद्दा बनाएगी और दावा करेगी कि सत्ता में आने पर इसे सख्ती से रोका जाएगा। बिहार में हालिया सफलता के बाद पार्टी ‘मिशन बंगाल’ पर पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है और संगठन को मजबूत करने पर जोर रहेगा।

महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था भी बीजेपी के प्रमुख मुद्दे होंगे। पार्टी बंगाल की स्थिति को “महाजंगलराज” बताकर सरकार को घेरेगी। साथ ही शिक्षक भर्ती, कोयला और रेत घोटाले जैसे मामलों को उठाकर भ्रष्टाचार को बड़ा हथियार बनाया जाएगा।

बीजेपी हिंदू मतदाताओं को एकजुट करने की कोशिश करेगी और साथ ही टीएमसी के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति पर भी काम करेगी।

सियासी लड़ाई का असली इम्तिहान बाकी

बंगाल की राजनीति अब दो साफ ध्रुवों में बंटी नजर आ रही है। एक तरफ टीएमसी पहचान, भावनात्मक मुद्दों और कल्याणकारी योजनाओं के सहारे सत्ता बचाने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ बीजेपी घुसपैठ, भ्रष्टाचार और सख्त शासन के वादों के साथ मैदान में उतरने को तैयार है। चुनाव जैसे-जैसे करीब आएगा, सियासी बयानबाजी और तेज होगी और आखिर में फैसला मतदाताओं के हाथ में होगा।

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