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वॉशिंगटन, 29अप्रैल 2021

कोरोना वायरस वैक्सीन को लेकर अभी भी कई लोगों के मन में कई तरह के डर और शंकाएं हैं और इसी डर की वजह से भारत में 44 लाख वैक्सीन की डोज बर्बाद हो गई मगर लोग वैक्सीन लगाने पहुंचे ही नहीं। भारत में पहले चरण में 60 साल की उम्र से ज्यादा के लोगों को वैक्सीन लगना था और अब खुलासा हुआ है कि 65 साल या उससे ज्यादा उम्र वाले लोग अगर वैक्सीन की दोनों खुराक ले लेते हैं, तो उनका वैक्सीन नहीं लेने वाले की तुलना में कोरोना वायरस की वजह से अस्पताल में भर्ती होने की संभावना 94 प्रतिशत तक कम हो जाती है।

94% अस्पताल में भर्ती होने की संभावना कम

अमेरिका की सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन यानि सीडीसी ने अपनी रिपोर्ट में रिसर्च के आधार पर कहा है कि वैक्सीन ही कोरोना वायरस से बचने का फिलहाल एकमात्र उपाय है। सीडीसी ने 65 साल की उम्र से ज्यादा के लोगों पर वैक्सीन के बाद पड़ने वाले प्रभाव पर रिसर्च किया है, जिसके नतीजे काफी ज्यादा सकारात्मक हैं। सीडीसी मॉर्बिडिटी एंड मोर्टल वीकली रिपोर्ट यानि एमएमडब्ल्यूआर में कहा गया है कि वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बाद अस्पताल में भर्ती होने की संभावना काफी कम हो जाती है। वैक्सीन लगने के दो हफ्ते बाद ही वैक्सीन काम करना शुरू कर देता है और जिन लोगों ने वैक्सीन नहीं लिया है और अगर वो 65 साल की उम्र से ज्यादा के हैं, तो वैक्सीन लेने वालों की तुलना में उनका अस्पताल में भर्ती होने की संभावना 94 प्रतिशत ज्यादा है। सीडीसी ने फाइजर-बायोटेक और मॉडर्ना वैक्सीन पर रिसर्च किया है।

उत्साहवर्धक हैं रिसर्च के नतीजे

अमेरिका के सीडीसी के डायरेक्टर रोशेल वालेंस्की ने रिसर्च के बाद कहा है कि ‘रिसर्च के दौरान जो वैक्सीन के फायदे मिले हैं, वो काफी ज्यादा उत्साह बढ़ाने वाले हैं। खासकर 65 साल की उम्र से ज्यादा लोगों को कोरोना वायरस से काफी खतरा भी है और बात अमेरिका की करें तो अमेरिका में दो तिहाई से ज्यादा 65 साल की उम्र के लोगों को वैक्सीन दिया जा चुका है और ये रिसर्च काफी स्वागतयोग्य है।’ उन्होंने कहा कि अब धीरे धीरे वैक्सीन के नतीजे वास्तविक दुनिया से निकलकर सामने आ रहे हैं, जो इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि वैक्सीन इंसानों पर काफी ज्यादा प्रभावी साबित हो रहा है। खासकर वैक्सीन लगने के बाद लोग क्रिटिकल होने से बच रहे हैं और अगर कोई वायरस से संक्रमित भी हो रहा है तो उसे अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत नहीं आ रही है। अमेरिका के सीडीसी ने कहा है कि ‘अलग अलग अस्पतालों से कोरोना वायरस संक्रमितों का आंकड़ा लेकर इस रिपोर्ट को तैयार किया गया है। जिसमें पता चल रहा है कि वैक्सीन लेने के बाद अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत नहीं आ रही है।’

बेहद कारगर भारतीय वैक्सीन

अमेरिकी रिसर्च में पता चला है कि भारत में विकसित स्वदेशी कोवैक्सीन कोरोना वायरस के 617 वेरिएंट्स को निष्क्रिय करने में सफल साबित हुई है। मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान व्हाइट हाउस के मेडिकल एडवाइजर डॉ. एंथनी फाउची ने मंगलवार को भारतीय वैक्सीन कोवैक्सीन को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये बात कही है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ. एंथनी फाउची ने कहा कि ‘हम वैक्सीन्स को लेकर लगातार रिसर्च कर रहे हैं और हर दिन आने वाली डेटा पर स्टडी करते हैं और हालिया डेटा से ये पता चला है कि कोवैक्सीन कोरोना वायरस के 617 वेरिएंट्स को निष्क्रिय करने में कामयाब रही है। अभी जो भारत में मुश्किलें देख रहे हैं, उन मुश्किलों को दूर करने में कोवैक्सीन काफी अहम साबित हो सकता है।’

78% कारगर भारतीय वैक्सीन

वहीं, मंगलवार को जारी न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन इम्यून सिस्टम को सार्स सीओवी-2 कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बनाना सिखाता है और ये शरीर में काफी प्रभावी तरह से काम करता है। आपको बता दें कि भारत की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरॉलजी और आईसीएमआर के साथ मिलकर भारत बायोटेक ने कोवैक्सीन को बनाया है, जिसे भारत स्वदेशी वैक्सीन कहा गया है। भारत सरकार ने इस वैक्सीन को 3 जनवरी को इमरजेंसी इस्तेमाल की इजाजत दी थी। बाद में ट्रायल के दौरान पाया गया कि कोवैक्सीन कोरोना वायरस के खिलाफ 78 प्रतिशत तक कारगर है।