Online bahis kullanıcılarının %54’ü haftada en az bir kez canlı bahis oynamaktadır; bu oran bahsegel giriş platformunda %63’tür.

Engellemelerden etkilenmemek için bettilt sık sık kontrol ediliyor.

Bahsegel güncel giriş bahsegel bettilt

OECD raporları, kullanıcıların %52’sinin “kayıp limiti” belirleyen platformları tercih ettiğini göstermektedir; paribahis bu özelliği destekler.

bahsegel giriş bettilt bahsegel bahsegel giriş bahsegel bahsegel giriş bahsegel bettiltguncel.com bettilturk-turk.click bettilt bettilt bahsegel bahsegel bettilt bahsegel giriş

बिहार: 1200 कैदियों का विद्रोह, दो दिन तक जेल पर कब्जा, कुंदन कृष्णन के गैलेंट्री मेडल के पीछे की कहानी

बिहार: 1200 कैदियों का विद्रोह, दो दिन तक जेल पर कब्जा, कुंदन कृष्णन के गैलेंट्री मेडल के पीछे की कहानी

बिहार के छपरा में साल 2002 में हुआ जेल ब्रेक कांड आज भी राज्य के सबसे सनसनीखेज और खतरनाक घटनाक्रमों में गिना जाता है। इस घटना में करीब 1200 कैदियों ने मंडल कारा (जेल) पर कब्जा कर लिया था, जो दो दिनों तक कैदियों के नियंत्रण में रहा। हिंसक झड़पों में चार कैदियों की मौत हुई थी और 28 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इसी साहसिक कार्रवाई के लिए छपरा के तत्कालीन एसपी कुंदन कृष्णन को वर्ष 2026 में गैलेंट्री अवार्ड से सम्मानित किया गया है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाने वाले आईपीएस कुंदन कृष्णन के साथ-साथ दारोगा अर्जुन लाल और सिपाही जितेंद्र सिंह को भी बहादुरी के लिए सम्मानित किया है। इस सम्मान के साथ ही करीब 24 साल पुरानी छपरा जेल ब्रेक कांड की कहानी एक बार फिर चर्चा में आ गई है।


कैसे शुरू हुआ छपरा जेल ब्रेक कांड

छपरा जेल ब्रेक कांड की शुरुआत 17 मार्च 2002 को हुई थी। उस समय मंडल कारा छपरा में बंद कुछ कैदियों को दूसरे जेलों में स्थानांतरित किए जाने का आदेश जारी हुआ था। इसी के विरोध में कैदियों ने विद्रोह कर दिया। धीरे-धीरे यह विद्रोह हिंसक रूप लेता चला गया और देखते ही देखते बड़ी संख्या में कैदी इसमें शामिल हो गए।

कैदियों ने जेल परिसर के भीतर ही हथियार और विस्फोटक इकट्ठा कर लिए। इसके बाद उन्होंने जेल प्रशासन और सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया और जेल पर पूरी तरह कब्जा कर लिया।


दो दिनों तक कैदियों के कब्जे में रही जेल

यह घटना किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी। 28 मार्च 2002 की सुबह से लेकर 30 मार्च 2002 तक मंडल कारा छपरा पूरी तरह उपद्रवी कैदियों के नियंत्रण में रहा। इस दौरान कैदियों ने न सिर्फ जेल परिसर, बल्कि उसके आसपास के इलाके में भी दहशत फैला दी।

कैदियों ने सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया, जेल की दीवारों और ढांचों को क्षतिग्रस्त किया और सुरक्षा बलों को अंदर घुसने से रोक दिया। जेल प्रशासन पूरी तरह असहाय नजर आ रहा था।


एसपी कुंदन कृष्णन के नेतृत्व में ऑपरेशन

घटना की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार ने जिला प्रशासन को सख्त कार्रवाई के आदेश दिए। 30 मार्च 2002 को छपरा के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक कुंदन कृष्णन ने ऑपरेशन का नेतृत्व संभाला। उनके साथ जिला पुलिस, सैन्य पुलिस और गृह रक्षक बल के जवान शामिल थे।

बताया जाता है कि जेल को कैदियों से मुक्त कराने के लिए 3 से 4 घंटे तक भीषण मुठभेड़ चली। इस दौरान पुलिस बल को भारी विरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन रणनीति और साहस के बल पर धीरे-धीरे स्थिति पर नियंत्रण पाया गया।


हथियार, गोलियां और बम—जेल बना रणक्षेत्र

ऑपरेशन के बाद जेल परिसर से 315 बोर और 12 बोर के 33 खाली खोखे, साथ ही बमों के अवशेष बरामद किए गए। कैदियों ने पुलिस पर जानलेवा हमला किया था, जिसके जवाब में पुलिस को आत्मरक्षा में गोलियां चलानी पड़ीं।

इस कार्रवाई में 28 पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें जिला पुलिस, सैन्य पुलिस और गृह रक्षक बल के जवान शामिल थे। हिंसा के दौरान चार कैदियों की मौत हुई, जबकि सात अन्य कैदी घायल हुए थे।


गैलेंट्री मेडल क्यों मिला कुंदन कृष्णन को

छपरा जेल ब्रेक कांड के दौरान दिखाए गए नेतृत्व, साहस और रणनीतिक निर्णयों के लिए आईपीएस कुंदन कृष्णन को वर्ष 2026 में गैलेंट्री अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार न केवल उनकी व्यक्तिगत बहादुरी, बल्कि उस पूरे ऑपरेशन में शामिल पुलिस बल के अदम्य साहस का प्रतीक है।

यह घटना आज भी बिहार पुलिस के इतिहास में एक ऐसी मिसाल के रूप में दर्ज है, जिसने यह दिखाया कि बेहद कठिन परिस्थितियों में भी कानून-व्यवस्था को बहाल किया जा सकता है।

Share post:

Popular

More like this
Related

योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला: उत्तर प्रदेश बनेगा ‘ग्लोबल मैनपावर हब’

सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र विकास...

प्रेमानंद महाराज के आश्रम पर सवाल: एक बेटे की मौत, दूसरा कहां है?

Premanand Maharaj Ashram Controversy: वृंदावन स्थित प्रेमानंद महाराज के...

ममता बनर्जी ने भी किया CJP का समर्थन, अभिजीत दिपके के साथ कौन-कौन से दल?

CJP Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे...