UGC के नए नियमों पर बवाल: गोरखपुर के BJP MLC देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया ‘खलनायक’, बोले—नियम तानाशाही जैसे, पूरा मामला

UGC के नए नियमों पर बवाल: गोरखपुर के BJP MLC देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया ‘खलनायक’, बोले—नियम तानाशाही जैसे, पूरा मामला

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर देशभर में विवाद गहराता जा रहा है। अब इस विरोध में गोरखपुर से भारतीय जनता पार्टी के विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह भी खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने UGC के हालिया फैसलों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है और आयोग को ‘खलनायक’ तक बता दिया है।

देवेंद्र प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि UGC के नए नियम छात्रों के एक वर्ग को पहले से ही दोषी मानकर चलते हैं। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था लोकतांत्रिक नहीं, बल्कि अंग्रेजों के दौर के रौलट एक्ट जैसी है, जिसमें बिना सुने ही सजा तय कर दी जाती थी।

UGC अध्यक्ष और सचिव को लिखा पत्र

बीजेपी MLC ने बताया कि उन्होंने 22 जनवरी को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष और सचिव को एक पत्र लिखकर इस मुद्दे पर सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि UGC द्वारा बनाए गए नए नियमों में सामान्य वर्ग के छात्रों के अधिकारों और हितों की अनदेखी की गई है।

उन्होंने कहा कि आयोग का यह रवैया छात्रों के बीच भेदभाव को बढ़ावा देता है और सामाजिक संतुलन को नुकसान पहुंचा सकता है।

‘बिना पक्ष सुने आरोपी मान लिया गया’

देवेंद्र प्रताप सिंह का आरोप है कि UGC ने यह मान लिया है कि सामान्य वर्ग का छात्र स्वभाव से शोषक और उत्पीड़क है, जो पूरी तरह गलत और गैर-कानूनी धारणा है। उन्होंने कहा,
“हमें बिना बताए, बिना सुने ही आरोपी मान लिया गया है। पूरे सवर्ण समाज को शोषक मानने की मानसिकता ठीक नहीं है।”

2025 और 2026 के नियमों पर सवाल

उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में जारी UGC के गजट में यह प्रावधान था कि अगर कोई गलत शिकायत करता है, तो उस पर जुर्माना और दंडात्मक कार्रवाई होगी। उस समय यह नियम केवल एससी/एसटी वर्ग तक सीमित था।

लेकिन 2026 के नए गजट में दंड के इस प्रावधान को हटा दिया गया और एससी/एसटी के साथ ओबीसी वर्ग को भी इसमें शामिल कर दिया गया। देवेंद्र सिंह का कहना है कि इससे नियमों का दुरुपयोग होने की आशंका बढ़ गई है।

‘नए नियमों में न्याय मिलना संभव नहीं’

बीजेपी MLC ने दावा किया कि नए नियमों के तहत अगर कोई शिकायत दर्ज होती है, तो शिकायतकर्ता को कोई ठोस प्रमाण देने की जरूरत नहीं होगी। एक शिकायत के आधार पर ही विभागाध्यक्ष नोटिस जारी कर सकता है और छात्र को हॉस्टल, परीक्षा या यहां तक कि विश्वविद्यालय से बाहर किया जा सकता है।

उन्होंने कहा,
“जब शिकायत और सुनवाई दोनों एक ही सोच वाले लोगों के हाथ में होगी, तो न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है?”

‘जातीय तनाव और सामाजिक टकराव का खतरा’

देवेंद्र प्रताप सिंह ने चेतावनी दी कि इस तरह के नियम समाज में नफरत और जातीय संघर्ष को बढ़ावा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे नियम लागू रहे, तो देश में सामाजिक तनाव बढ़ेगा और हालात गंभीर हो सकते हैं।

उन्होंने खुद को पहला विधायक बताते हुए कहा कि उन्होंने सबसे पहले इस मुद्दे पर आवाज़ उठाई है और जनता से अपील की है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से इसका विरोध करें।

UGC की भूमिका पर सवाल

बीजेपी MLC ने कहा कि UGC का गठन देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए हुआ था, लेकिन आज स्थिति यह है कि दुनिया के टॉप-100 विश्वविद्यालयों में भारत का एक भी संस्थान शामिल नहीं है। ऐसे में आयोग को दंडात्मक नियम बनाने के बजाय शिक्षा की गुणवत्ता और शोध पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि- “जो नियम पहले से ही किसी को आरोपी मान ले, उसे स्वीकार करने का कोई सवाल ही नहीं उठता।”

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