पटना. जदयू और आरजेडी की सरकार बनने के बाद पहली बार केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह दो दिनों के दौरे पर शुक्रवार को बिहार पहुंच रहे हैं। शाह अपने दौरे पर सीमांचल क्षेत्र में फोकस करेंगे। अमित शाह पार्टी के सांसद, विधायकों के साथ बैठक कर रणनीति तैयार करेंगे। बता दें कि शाह का दौरा इसलिए भी अहम है पीएफआई के खिलाफ गुरुवार को 11 राज्यों में एनआईए और ईडी की रेड पड़ी थी। अब इस मामले में नई रणनीति भी बन सकती है। वहीं, नीतीश कुमार के एनडीए से अलग होने के बाद भाजपा बिहार में काम करने की नई रणनीति पर भी जोर देगी।
कैसा है शाह का दो दिवसीय दौरा
शाह शुक्रवार को पूर्णिया के चुनापुर हवाई अड्डे पर उतरेंगे और फिर एक जनसभा को संबोधित करेंगे। पूर्णिया के जनसभा को संबोधित करने के बाद शाह हेलिकॉप्टर के जरिये किशनगंज पहुंचेंगे। किशनगंज में माता गुजरी विश्वविद्यालय में बिहार बीजेपी के पदाधिकारियों के साथ वह बैठक करेंगे। 24 सितंबर को अमित शाह अपने दौरे की शुरुआत किशनगंज के बूढ़ी काली मंदिर में दर्शन के साथ करेंगे। वो यहां कई बैठकों में शिरकत करेंगे।
क्यों अहम है दौरा
अमित शाह का यह दौरा कई मायनों में खास माना जा रहा है। शाह के इस दौरे से ठीक एक दिन पहले देश के 11 राज्यों में छापेमारी कर पीएफआई के 106 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पूर्णिया पश्चिम बंगाल की सीमा से सटा हुआ इलाका है। यहां रैली कर अमित शाह बिहार और बंगाल को एक साथ अलवागवाद और आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश देंगे।
लोकसभा चुनावों पर फोकस
साल 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में बिहार की 40 लोकसभा सीट में से 39 पर एनडीए ने जीत हासिल की थी। इन 39 सीट में से जेडीयू ने 16 सीटें जीती थी। सीएम नीतीश कुमार के एनडीए से अलग होने के बाद 16 सीटों का नुकसान हुआ है ऐसे में अब चिराग पासवान और लोजपा(पारस गुट) को जोड़ लेने पर एनडीए के पास कुल 23 सीट है। बीजेपी का मिशन है कि 2024 के लोकसभी चुनाव में बिहार की 35 सीटें जीतना है ऐसे में अमित शाह 2024 के चुनाव को लेकर तैयारी शुरू करेंगे।




