क्या है UAPA कानून जिसके तहत कन्हैयालाल के हत्यारों को हो सकती है सजा-ए-मौत

Udaipur Brutal Murder: राजस्थान के उदयपुर में टेलर का काम करने वाले कन्हैयालाल साहू की दो आतंकियों ने बर्बर तरीके से हत्या कर दी। मंगलवार दोपहर कन्हैयालाल की दुकान में घुसे मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने धारदार हथियारों से उनका गला काट दिया था। तालिबानी अंदाज में की गई इस नृशंस हत्या के बाद इन पर अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट यानी UAPA के तहत एक्शन लिया जाएगा। बता दें कि UAPA के तहत दोषी पाए जाने पर मौत की सजा भी हो सकती है।

क्या है UAPA कानून?
संसद ने 1967 में गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (Unlawful Activities Prevention Act) बनाया था, जिसे UAPA कहते हैं। हालांकि 2004, 2008, 2012 और 2019 में इस कानून में बदलाव किए गए। 2019 के संशोधन में इस एक्ट में बेहद कड़े प्रावधान जोड़े गए हैं। 2019 में हुए संशोधन में सबसे अहम बात ये है कि इस कानून के तहत सरकार किसी संगठन या संस्था को ही नहीं बल्कि किसी व्यक्ति विशेष को भी आतंकवादी घोषित कर सकती है।

UAPA में किसी शख्स को आतंकी घोषित करने के 4 आधार :
बता दें कि गृह मंत्री अमित शाह ने 2019 में में संशोधित यूएपीए बिल पेश किया था। संसद से पास होने के बाद इसे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अगस्त, 2019 में इसे मंजूरी दी थी। इसमें किसी शख्स को आतंकवादी घोषित करने के लिए ये 4 आधार रखे गए हैं।

– जो शख्स आतंकी घटना को अंजाम देगा या इसमें सहयोग करेगा।
– जो व्यक्ति किसी आतंकी घटना की तैयारी कर रहा होगा।
– जो भी आदमी देश में आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले काम करेगा।
– जिस शख्स का किसी भी तरह के आतंकवाद से कनेक्शन पाया जाएगा।

NIA की पावर बढ़ाता है ये कानून :
– UAPA कानून के तहत  दर्ज केस में एंटीसिपेटरी बेल यानी अग्रिम जमानत नहीं मिल सकती।
– किसी भी भारतीय या विदेशी के खिलाफ इस कानून के तहत केस चलाया जा सकता है। इसके लिए क्राइम की जगह या नेचर से कोई लेना-देना नहीं है।
– यानी विदेश में भी क्राइम करने पर इस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। यहां तक कि भारत में रजिस्टर जहाज या विमान में हुए क्राइम के मामलों में भी UAPA लागू हो सकता है।
– UAPA कानून राष्ट्रीय इनवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) को इस बात का अधिकार देता है कि वो किसी भी तरह की आतंकी गतिविधि में शामिल संदिग्ध को आतंकी घोषित कर सके।

संदेह होने पर भी आतंकी घोषित करने का अधिकार :
UAPA कानून के तहत किसी शख्स पर संदेह होने पर भी पुलिस या जांच एजेंसी उसे आतंकवादी घोषित कर सकती है। अपने उपर से आतंकी का टैग हटवाने के​ लिए बाद में उसे सरकार द्वारा बनाई गई रिव्यू कमेटी के पास जाना पड़ेगा। बाद में वो शख्स कोर्ट में अपील कर सकता है।

 

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