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उद्धव ठाकरे की गर्जना-अरे छोड़ो, इससे पहले कइयों ने कहा है कि ‘शिवसेना’ इस चुनाव के बाद नहीं रहेगी वगैरह!

उद्धव ठाकरे की गर्जना-अरे छोड़ो, इससे पहले कइयों ने कहा है कि ‘शिवसेना’ इस चुनाव के बाद नहीं रहेगी वगैरह!

मुंबई.उद्धव ठाकरे 27 जुलाई को 62 साल को गए। लेकिन इस बार उनके जन्मदिन माहौल एकदम बदला हुआ है। अपनी ही पार्टी के नेता एकनाथ शिंदे की बगावत के चलते सरकार गंवाने वाले उद्धव ठाकरे को अभी भी यकीन है कि उनसे कोई भी ‘शिवसेना’ नहीं छीन सकता। अपने बर्थ-डे से पहले ठाकरे ने शिवसेना के अखबार सामना को लंबा-चौड़ा इंटरव्यू दिया, जो दो पार्ट में छापा गया। इसके हर सवाल-जवाब में महाराष्ट्र की पॉलिटिक्स चलती रही। उन्होंने एकनाथ शिंदे को लेकर बेबाक तरीके से जवाब दिए। मारक प्रहार किए। यह और बात है कि शिवसेना के 39 और 10 निर्दलीय विधायकों के साथ बगावत करके महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने एकनाथ शिंदे ने ठाकरे को जन्मदिन की बधाई दी, लेकिन चुटकी भी ली। एकनाथ ने अपने tweet में उद्धव ठाकरे को पूर्व मुख्यमंत्री संबोधित किया, शिवसेना का मुखिया नहीं। पढ़िए उद्धव ठाकरे ने इंटरव्यू में क्या खास कहा…

हर पाप का घड़ा भरता है…
इंटरव्यू के दूसरे पार्ट में दु:खी मन से उद्धव ठाकरे ने कहा-‘जिन्हें मैंने अपना माना वे लोग ही छोड़कर चले गए, मतलब वे लोग कभी भी हमारे थे ही नहीं। उन्हें लेकर बुरा लगने की कोई वजह नहीं है।’ भाजपा को लेकर ठाकरे ने कहा कि आज भाजपा में बाहर से आए लोगों को सबकुछ मिल जाता है। मुख्यमंत्री पद से विरोधीपक्ष के नेता पद तक। ठाकरे ने अपनी सरकार के प्रयोग को सही ठहराते हुए कहा कि महाविकास आघाड़ी का प्रयोग गलत नहीं था। लोगों ने स्वागत ही किया था। ‘वर्षा’ छोड़कर जाते समय महाराष्ट्र में अनेकों के आंसू बहे। किस मुख्यमंत्री को ऐसा प्यार मिला है? उन आंसुओं का मोल मैं व्यर्थ नहीं जाने दूंगा।

ED की कार्रवाइयों पर कहा
उद्धव ठाकरे ने प्रवर्तन निदेशालय(ED) और सीबीआई की कार्रवाइयों को देश में लोकतंत्र के भविष्य, विपक्षियों को खत्म करने की साजिश बताते हुए कहा कि ‘दिल्लीवालों को शिवसेना बनाम शिवसेना का झगड़ा लगाकर महाराष्ट्र में मराठी माणुस के हाथ से ही मराठी माणुस का सिर फुड़वाना है!’ उद्धव ठाकरे ने कहा कि लोकतंत्र का अर्थ यह नहीं है कि हर बार जीत ही मिले। शिवसेना, कांग्रेस, भाजपा कोई भी पार्टी हो, उन्हें लगातार जीत हासिल नहीं होती। हार-जीत सभी की होती है। नए दलों का उदय होता रहता है। वे भी कुछ समय के लिए चमकते हैं, यही तो लोकतंत्र का असल अनुभव है।

ठाकरे ने तंज कंसते हुए कहा कि सब कुछ अपनी एड़ी के नीचे रखने की ये जो राक्षसी महत्वाकांक्षा पनपती है, तब उन्हें विपक्ष का डर सताने लगता है। मैं भी मुख्यमंत्री था। आज नहीं हूं, पर आपके सामने पहले की तरह ही बैठा हूं। क्या… फर्क  पड़ा क्या? सत्ता आती है और जाती है। फिर से वापस आती है। मेरे लिए कहें तो सत्ता हो या न हो, कोई फर्क नहीं पड़ता।ठाकरे ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देकर कहा-वाजपेयी जी ने एक बार कहा था, ‘सत्ता आती है, जाती है। लेकिन देश रहना चाहिए।’ देश रहने के लिए सभी पार्टियों ने मिलकर काम नहीं किया तो हम ही अपने देश के शत्रु कहलाएंगे, क्योंकि देश में आज भी कई समस्याएं मुंह बाये खड़ी हैं। रुपया निम्नांक तो महंगाई उच्चांक पर पहुंच गई है। बेरोजगारी है। ऐसे तमाम मुद्दों पर किसी का ध्यान नहीं है। सतही तौर पर लीपापोती की जा रही है।

दिमाग में अग्नि है, इसलिए वीर बाहर निकल गए
ठाकरे ने ‘अग्निवीर’ योजना को लेकर कहा कि उनके दिमाग में ‘अग्नि’ है। इसलिए वे ‘वीर’ बाहर निकल गए। सड़कों पर उतरे। उनका कहना है, हमें आप टेंपररी बेसिस पर रख रहे हैं। हमारे युवा सड़क पर उतर आए हैं। जीवन, संसार यह स्थायी होता है। टेंपररी बेस पर हमें रोजगार दे रहे हो तो आगे क्या होगा, ऐसा उनका सवाल है।

बदनाम लोग उनकी पार्टी में जाते हैं, तो मुंह पर पट्टी क्यों बंध जाती है?
दूसरी पार्टियों के नेताओं की भाजपा में एंट्री पर उद्धव ठाकरे ने कहा-जब बदनाम लोग उनकी पार्टी में जाते हैं, तब उनके मुंह पर पट्टी बंध जाती है, ऐसा क्यों होता है? कारण आपको याद ही होगा, नितिन गडकरी बोले ही थे कि हमारे पास ‘वॉशिंग मशीन’ है। लोगों को लेकर हम पुण्यवान बनाते हैं, उनके पास जो लोग, किन्हीं आरोपों की वजह से गए, उनका आगे क्या हुआ, यह भी देखना चाहिए। फिलहाल, नित नए लोगों को परेशान किया जा रहा है। यह सशक्त राजकर्ताओं के लक्षण नहीं हैं… यह खौफ है।

सबके पाप का घड़ा भरता ही है
शिवसेना के जिन लोगों के बारे में कहा जा रहा था कि वे एक महीने तक, 24 घंटों में जेल में जाएंगे, फांसी पर लटकेंगे, वही लोग उनके पास गए हैं…हैं न। अब वे पवित्र हो गए होंगे। आप पर भी ऐसे आरोप लग रहे हैं। आपको भी वे गिरफ्तार करेंगे, ऐसा माहौल बनाया जा रहा है। सिर्फ एजेंसियों का दुरुपयोग। दूसरा क्या? इसलिए बालासाहेब कहते थे, कर्म से मरनेवाले को धर्म से मत मारो। आखिर सभी के पाप का घड़ा भरता ही है।

उद्धव ठाकरे ने इमरजेंसी का जिक्र किया
आपातकाल के दौरान जनता पार्टी की स्थापना हुई थी। आप कहते हैं न, जनता क्या करती है? तो उस समय हम छोटे थे। 75-77 के दौर की बात है। जनता पार्टी के पास प्रत्येक मतदान केंद्र पर पोलिंग एजेंट तक नहीं थे, फिर भी लोगों ने भर-भरकर वोट दिए। लेकिन बाद में आपस में ही लड़-भिड़कर अपनी सरकार खुद ही गिरा दी। इसलिए एक इच्छाशक्ति होनी चाहिए। हमारे देश में इस वक्त लोकतंत्र को खत्म कर तानाशाही ही आ गई है, ऐसा मैं नहीं कहूंगा परंतु जिस दिशा में कदम बढ़ रहे हैं उसे देखते हुए कई लोगों का मानना है कि ये कदम, ये लक्षण कुछ ठीक नहीं हैं। ठाकरे ने खुद में इस इच्छाशक्ति की बात स्वीकारते हुए कहा कि-हां, निश्चित ही है। परंतु सवाल अकेले का नहीं है। इसके लिए देश के सभी राज्यों को एक साथ आना होगा। एक बार संषर्घ शुरू हुआ तो देश जाग ही जाएगा।

भाजपा से गठबंधन अलग होने पर
उद्धव ठाकरे ने कहा कि 25-30 वर्षों तक हम उनके साथ ही थे। फिर भी उन्होंने 2014 में गठबंधन तोड़ दिया। वजह कुछ भी नहीं थी। तब भी हमने हिंदुत्व नहीं छोड़ा था और आज भी नहीं छोड़ा है। उस समय भी भाजपा ने शिवसेना के साथ युति(गठबंधन) आखिरी क्षणों में तोड़ी थी। मैं ढाई वर्ष के लिए शिवसेना के लिए मुख्यमंत्री पद क्यों मांग रहा था? वो मुख्यमंत्री पद मेरे लिए नहीं था। तो उस वक्त दिया नहीं। इस बार भी ढाई वर्ष मुख्यमंत्री पद क्यों मांगा था, क्योंकि मैंने उस दौरान माननीय शिवसेनाप्रमुख को वचन दिया था कि शिवसेना का मुख्यमंत्री बनाकर दिखाऊंगा। वैसे देखें तो मेरा वो वचन आज भी अधूरा ही कहा जाएगा। क्योंकि मैं मुख्यमंत्री बनूंगा, ऐसा नहीं कहा था। मुख्यमंत्री का पद मुझे एक चुनौती के तौर पर स्वीकारना पड़ा। क्योंकि सभी बातें तय होने के बाद भाजपा की ओर से उन्हें नकार दिया गया। इसलिए मुझे वह करना पड़ा।

बागियों पर बरसे उद्धव ठाकरे
प्रॉब्लम क्या है आपकी? इसीलिए क्या तुमने जिन बालासाहेब की तस्वीर लगाई, उन बालासाहेब के पुत्र को गद्दी से उतार दिया? क्यों, तो कहते हैं हिंदुत्व वगैरह…, कांग्रेस-राष्ट्रवादी नहीं चाहिए। ठीक है, पर आज के मुख्यमंत्री की भरी सभा की भी नौटंकी देखो। ठाकरे ने शरद पवार को लेकर भाजपा की आपत्ति पर कहा- पहले जब हम भाजपा के साथ सत्ता में थे, तो ये लोग कहते थे कि भाजपा तकलीफ दे रही है। भाजपा नहीं चाहिए, कहनेवाले ये वही लोग हैं। गांव-गांव में भाजपा शिवसेना को काम करने नहीं देती है। ऐसा यही लोग कहते थे। वर्ष 2019 में भाजपा का झूठ चरम पर पहुंच गया। तय की गई बातें नकारी गईं, इसलिए हमने महाविकास आघाड़ी को जन्म दिया। तो अब कहते हैं कांग्रेस-राष्ट्रवादी वाले तकलीफ दे रहे हैं। आखिर निश्चित आपको चाहिए तो क्या?

ठाकरे ने एकनाथ शिंदे पर तंज कंसते हुए कहा कि भाजपा उन्हें कभी आगे बढ़ाएगी। नहीं तो बाद में वे अपनी तुलना नरेंद्र भाई से करेंगे और प्रधानमंत्री पद की मांग करेंगे। आखिर लालसा, ऐसी घृणित होती ही है न! यह लत है। उद्धव ठाकरे ने कहा-मेरे मन में पाप नहीं था। मैं आपको बुला रहा था। मेरे सामने आकर बैठो, बोलो। चलो मान भी लो, राष्ट्रवादी आपको तकलीफ दे रही थी। तो मैंने उन्हें कुछ इस तरह कहा कि जिन विधायकों को वर्ष 2014 में भाजपा ने दगा दिया, फिर भी भाजपा के साथ ही जाएंगे? पर गए हम भाजपा के साथ। वर्ष 2019 में भी हमें दिए गए शब्दों का पालन नहीं हुआ। शिवसेना के उम्मीदवारों को हराने के लिए, इन्हीं विधायकों के विरुद्ध भाजपा ने अपने बागियों को खड़ा किया था। मतलब भाजपा को तब भी और आज भी शिवसेना को खत्म करना है। उन्हीं के साथ ये गए हैं।

आप एकदम से प्रताड़ित करने लगे हैं
एक तो बिना वजह के शिवसैनिकों के पीछे ईडी-पीडी लगा रखी है। उनका उत्पीड़न शुरू है, जो हिंदुत्व के लिए उस समय दंगों में लड़े थे वे शिवसैनिक, जिनमें अनिल परब हों या हिंदुत्व के पक्ष को मजबूती से रखनेवाले आप हों। उन्हें आप एकदम से प्रताड़ित करने लगे हैं।

देवेंद्र फडणवीस के साथ ऐसा क्यों?‌
देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने पर उद्धव ठाकरे ने सवाल किया-भाजपा ने ऐसा बर्ताव क्यों किया, यह मेरी भी समझ से परे है, पर ठीक है। वह उनकी पार्टी का अंदरूनी मामला है। उनके सिर पर बाहर के लोगों को बिठाया गया। उस समय ऊपरी सदन में विरोधी पक्ष नेता के तौर पर बाहर का व्यक्ति। अब मुख्यमंत्री पद पर… अन्य पदों पर भी बाहर के ही, फिर भी वे निष्ठापूर्वक काम कर रहे हैं।

दुखी मन से वर्षा छोड़ने पर
उद्धव ठाकरे ने कहा ‘वर्षा’ से ‘मातोश्री’ के बीच रास्ते भर महिलाएं, युवा, बुजुर्ग सड़कों के दोनों किनारों पर खड़े होकर अभिवादन कर रहे थे। मैं ऐसा मानता हूं कि उस घटनाक्रम ने एक अलग ही तरीके से मेरे जीवन को सार्थक बना दिया। आज तक कई मुख्यमंत्री आए और गए। मैं भी था और अब मैं भी चला गया। आज वो हैं। कभी उन्हें भी तो जाना ही पड़ेगा। मुझे लगता है कि यह आशीर्वाद और यह कमाई मेरे जीवन की बहुत बड़ी उपलब्धि है।

बागी गुट बेनकाब हो गया
विधानसभा अध्यक्ष पद के चुनाव में बागी गुट बेनकाब हुआ ही न! उसके पहले ही बेनकाब हो गया। अब तो हर दिन बेनकाब हो रहा है। चुनाव आयोग को जो पत्र दिया है उसमें भी अनुशासनाहीनता की कार्यवाही समाविष्ट है। मुझे लगातार यह महसूस कराया जाता था कि कांग्रेस दगा देगी और पवार साहेब पर तो बिल्कुल भी विश्वास नहीं किया जा सकता है। वे ही आपको गिराएंगे, ऐसा ही सब कहते थे। अजीत पवार के बारे में भी मेरे पास आकर बोलते थे। हालांकि मुझे मेरे ही लोगों ने दगा दिया। 16 विधायकों पर लटकती अपात्रता की तलवार पर उद्धव ठाकरे ने कहा- उस विषय पर मैं अभी कुछ नहीं बोलूंगा, क्योंकि वह प्रकरण अभी कोर्ट में है। लेकिन कई कानून विशेषज्ञों के मतानुसार कानूनी रूप से क्या होगा, यह लोगों को अब समझ में आ गया है। क्योंकि जो कानून है उसमें सब कुछ साफ और स्पष्ट है। और मुझे नहीं लगता है कि अपने देश में संविधान विरुद्ध कृत्य करने की हिम्मत किसी में होगी। मैं पहले ही बोल चुका हूं कि रावण की जान जैसे नाभि में थी, वैसे ही इन राजनेताओं की जान मुंबई में है। ऐसा यह विचित्र प्रकार है। दिल्ली मिली है तब भी उन्हें मुंबई चाहिए।

शिवसेना को लेकर कहा
अरे छोड़ो, इससे पहले कइयों ने कहा है कि ‘शिवसेना’ इस चुनाव के बाद नहीं रहेगी वगैरह! मुंबई में अब मुंबईकर के नाते सभी एक साथ हैं। उस समय उन्होंने हिंदुओं में फूट डालने का प्रयत्न किया कि यह मराठी और वह गैर मराठी वगैरह, लेकिन अब ये सब लोग मुझे आकर मिल रहे हैं। मराठी और गैर मराठी के बीच फूट  डालने का प्रयत्न आज भी शुरू है। पर अब कोई इसका शिकार नहीं होगा। मराठी माणुस एकजुट हुआ है, तमाम मुंबईकर आज चुनाव की प्रतीक्षा कर रहे हैं। और मेरा मानना ऐसा है कि मुंबई ही नहीं, बल्कि राज्य विधानसभा के चुनाव भी होने ही चाहिए।

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